सोमवार, 14 सितंबर 2009

ताऊ फौजी तन्ने दीखता कोणी ! मुच्छा वाला मर्द

आप सब नै रमलू का राम-राम। भाइयों आज तो मै दूध-धार का काम निपटा चुका। अब टाइम हो रहा है अपनी मण्डली धोरे जाण का.ताऊ आज भिवानी गया था, आ गया होगा,मै पहुँचा अपणे अड्डे ताऊ आली पोली पे , सारे फालतू के लोग वहां काम की बातें करते मिलेंगे, और उनका हेड आपणा ताऊ ,फेर के पूछना सबकीमोज नए टोपिक पे गरमा -गर्म बहस।
इतनी देर में ताऊ भी आ गया ।
ताऊ राम-राम ! बडा तावला आ गया ?
ताऊ बोल्या - अरे इसा कुण सा मै लंका में चला गया था। भिवानी ही तो गया था, कईr काम थे ,पहला तो मुरारी के छोरे ने वा के होया कर कलेक्टर बनाने वाले परीक्षा का फार्म भरना था, और आँख दिखानी थी।गुप्ता हस्पताल में ,
रामेसर बोल्या-फेर दिखा दी आपने ,
ताऊ- हाँ भाई दिखा दी ,डाकदर बोल्या "ताऊ दुवाई लेजा ,इब्बे कुछ नही बिगडा सै.दस-पन्द्र साल और चाल जागी।
बनवारी बोल्या-ताऊ किसा रह्या सफर,ठीक ठाक तो था ? इब बनवारी ने ताऊ के सफर की चिंता करी।
ताऊ बोल्या-अरे भाई सूबे जाके टिकट ली, घणी लम्बी लाइन थी, फेर मन्ने वो जुग्गे वाला छोरा सुद्धू दिख गया मै बोल्या रे बेटा एक टिकट मेरी भी ले दे .उसने मेरी टिकट ली। रेल में घणी भीड़ थी ,तले-ऊपर आदमी चढ़े पड़े थे। मन्ने तो भाई एक छोरे ने अपनी सीट दे दी।
मेरी सिट के सामने चार-पॉँच लुगाई भी बैठी थी उसमे ते एक लम्बी -तगडी थी ,उसने पहले तो मन्ने देख्या फेर झट घूँघट निकला, तो उसने बराबर आली लुगाई ने पूछ्या " ये बैरण इब क्यूँ घूँघट काढ्या ? वो बोल्ली-" ये भोलू की माँ !!!!! तन्ने दीखता कोणी ! मुच्छा वाला मर्द तो इब्बे चढ्या सै गाड्डी में,पहले तो सारे मेरे जैसे ही बैठे थे।
रमलू बोल्या ताऊ इब भी तेरे मार्केट वेल्यु बनी हुयी सै. जरा संभल के चल्या कर।
ताऊ-अरे इब आगे की सुण- इतने में टी टी आ गया "चलो भाई टिकट दिखाओ"
मेरे सामने सिट पे खरक बोंद वाला गोवर्धन बैठा था,उसके साथ उसके बेटी -जमाई,उसकी लुगाई और दो जवान-जवान छोरे थे। टी टी ने टिकट दिखान की कही तो उसने पञ्च टिकट निकाली.
टी टी ने कह्या "माणस छह और टिकट पांच, तो गोवर्धन बोल्या "साब ये चार टिकट तो हमारे चारो बड़ों के और ये एक टिकट इन दोना टाबरों (बच्चों) की आधी - आधी करके
टी टी बोल्या " तू जिनको बच्चे कह रहा है ये ब्याह लायक हो गये हैं।
मेरी भी पुराणी खुंदक थी गोवर्धन के साथ मैं बोल्या" टी टी साब जब आपको ये छोरे बयाह के लायक दिख रहे हैं तो कर दे इनका टीका।"
टी टी बोला "अभी करता हूँ टीका फौजी आप के सामणे.यो कहके टी टी ने अपनी रसीद निकाली और पांच-पॉँच सौ के दंड की पर्ची फाड़ दी.
मैं बोल्या " रे गोवर्धन तेरे दोनों छोरों का टीका तो करवा दिया बरात के न्युते ने भूल मत जाइये.
चलो रे भाई इब टैम अपने - अपने घर चालो, नहीं तो थारी भी पर्ची कटेगी घर जा के. यो कह के ताऊ हुक्के का दो सुट्टा मार के चाल पड़ा घर नै.

मित्रों आपको कैसी लगी ताऊ की यात्रा,अपनी जीवंत उपस्थिति टिप्पणी के माध्यम से दे .
कल हमारा ताऊ पाकिस्तान की लडाई के पुराणी यादो में ले जाएगा.इंतजार करें................

आपका
रमलू लुहार

(फोटो गूगल से साभार)

2 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

ताऊ यात्रा मस्त रही.

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.

कृप्या अपने किसी मित्र या परिवार के सदस्य का एक नया हिन्दी चिट्ठा शुरू करवा कर इस दिवस विशेष पर हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार का संकल्प लिजिये.

जय हिन्दी!

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

"सारे फालतू के लोग वहां काम की बातें करते मिलेंगे"

या बात जम्मीं खरी कही......यो तो हरियाणे की परम्परा दिखै:)

बहुत बढिया किस्सा सुनाया!

 

फ़ौजी ताऊ की फ़ौज