रविवार, 13 सितंबर 2009

आज ताऊ की आंट कोण आया देखो?????????

ताऊ आज तावला-तावला बस अड्डे से आण लग रह्या था में भी कुछ पड़चुनी का सामन लें जा रह्या था."ताऊ राम-राम कहाँ भाज्या जा रह्या सै तावला-तावला?"
ताऊ बोल्या "अरे जा नही रहा रह्या हूँ."ससुरा गया था. तेरी ताई नै घी जोड़ राख्या था.उसके भतीजे का ब्याह सै दीवाली पीछे.कई दिन ते कह रही थी ,सोच्या के आज उसकी भी शिकायत दूर कर दयूं
मै बोल्या ताऊ जल्दी जा तेरी मण्डली पोली के आगे तैयार बैठी सै.हुक्का राख्या सै, और रामधन चिलम सिल्गान गया था ,जाते ही गरम -गरम मिलेगीसामान लेके मैं भी पहुँच रह्या सूं।

ताऊ गया अपने ठिकाने पे, मण्डली जमी हुई थीहुक्का तैयार था ,गाम के सारे बिगडे हुए ,घर से काढे हुए बुड्ढे मौजूद थे, ताऊ का ही इंतजार हो रह्या था, ताऊ तो म्हारे गाम की रौनक सै,
ताऊ के पहुचते ही सारे बोले "ताऊ राम-राम.कित हो आया?
ताऊ बोल्या ससुराल गया था ,घी पहुचाने,तम बताओ के चल रहया सै,
बनवारी बोल्या हम तो ताऊ तेरी ही बाट देखे थे ,कल का किस्सा फोज आला आगे भी सुनना सै,
वाह रे भाई !!! आगे की सुण ल्यो,
लडाई का टाइम था म्हारी कानबाई (गाड़ियों का काफिला) जम्मू ते श्रीनगर जावे था ,रस्ते में ब्रेक हुआ हम सब खाना खाने बैठे ,खाना खाने के बाद चलन लगे तो,म्हारी गाडी स्टार्ट ही नहीं हुई,पुराना ज़माना था ,गाडियाँ भी इसी थी के ठण्ड के मारे डीजल भी जम जाया करता.
हमारे सूबेदार साहब बोले "हवलदार मनफूल सिंग ! गाडी स्टार्ट क्यों नहीं हो रही हैं?
पता नहीं साब के बिगड़ गया? जोंगा जीप थी,
चलो बोनट खोलो हम देखते हैं.
मेने बोनट खोल्या ,सूबेदार ने मरमम्त का काम चालू कराया.पंप का आइल काला था वो साब के सारे कपडों में लग गया.खैर गाडी तो चालू होयगी.साब बोले मेरी दूसरी वर्दी लाओ, और इसको साफ़ करवा देना , जी साब .
वो वर्दी मेने डांगरी को दे दी.उसने मेरे ते पूछ्या साब "इसमें तो काला आइल ज्यादा लग साबुन से तो साफ़ होगी नहीं(उस ज़माने में कोण सा सुपररीन ,सर्फ़ एक्सेल मिल्या करता), वो डांगरी भी सुसरा बावली बूच था .सुसरा आधा पागल .
मेने उसते क्या "म्हारे पास पेट्रोल घणा ही तो एक काम कर इसे पेट्रोल से साफ़ कर ले."
वो गया और शेर के बच्चे ने पेट्रोल का जरीकेन निकाल के उसमे सारी वर्दी हैट सब डबो के धो दिए ,
उसमे से बाद में पेट्रोल नहीं निकला तो ,मेरे धोरे आया
और बोल्या साब "वर्दी तो धो दी पण उसका पेट्रोल नहीं निकल रहा हैं.
मन्ने सोच्या मन ही मन के इब साला आंट में आया सै १५ अगस्त आले दिन साले ने मेरी वर्दी ऐसी धोई थी के सी.ओ.साब नै परेड ग्राउंड मै ही सबके सामने मेरी परेड ले ली.आज इसका भी नंबर सै ,
मै बोल्या "अरे छीतरिया तू रह गया न मुर्ख का मुर्ख". एक काम कर,माचिस सै तेरे धोरे?
वो बोल्या -हाँ साब
मै बोल्या -तू नु कर उस पत्थर पे इस वर्दी नै धर के आग लगा दे ,पेट्रोल -पेट्रोल जल जा गा. और वर्दी मेसे पेट्रोल भी निकल जा गा ,सूबेदार साब भी तन्ने शाबासी देगा.
आगे के होया आप खुद समझदार हो,वो भी सुण ल्यो
सूबेदार साब नै उसको साबासी दी और इनाम में एक हफ्ते २ घंटे की पिट्टू परेड कराई ,इसके बाद एक हफ्ते के क्वाटरगार्ड ड्यूटी भी लगाई ,तो भाई फौज के तो ये मजे थे ,पहले के आदमी भोले भी थे.बात मान भी जाया करते.
चालो भाई दिया बत्ती का टाइम हो रह्या सै, थारी ताई भी बाट देखती होगी के मेरे पीहर गया था के सामाचार लाया, बाकी कल देखेंगे, अरे भाई काल तो मन्ने भिवानी जाना सै.सांझ नै मिलेंगे.अरे बनवारी यो हुक्के की के तम्बाखू लाया सै, कल थोडी झटके वाली लाइए ,यो ओडर देके ताऊ हुक्के का एक दम मार के घर नै चाल पड़ा .
भाई आपने यो म्हारा फौजी ताऊ कैसा लाग्या,एक चटका लगा के अपनी उपस्थिति दर्ज कराओ
और भाई एक बात बताऊँ "यो उड़न तस्तरी आराम कब करे सै इसका पता लगे तो मन्ने जरुर बतइयो,मन्ने तो लगे सै इसने कई डरैवर राख रक्खे सै जब ही रात-दिन हांडती फिरे सै,क्यूँ के ताऊ धोरे भी आवेसै रात नै."

आपका
रमलू लुहार


(फोटो गूगल से साभार )

3 टिप्‍पणियां:

संजय तिवारी ’संजू’ ने कहा…

आपको हिन्दी में लिखता देख गर्वित हूँ.

भाषा की सेवा एवं उसके प्रसार के लिये आपके योगदान हेतु आपका हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ.

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

ताउ जय जोहार, क्षेत्रीय बोली और भाषाओं का अपना अलग ही मजा है. आप सुणाते जाओ हम सुण रहे हैं. काल तो तन्ने भिवानी जाना सै तो सांझ नै जरूर मिलेंगे.

वाणी गीत ने कहा…

ताऊ के फौजी कारनामों की रोचक प्रस्तुति ..
बहुत आभार ..!!

 

फ़ौजी ताऊ की फ़ौज