शुक्रवार, 11 सितंबर 2009

ताऊ यो तो गजब हो गया

ताऊ साँझ नै पोली के आगे बैठा था,उसके साथ गाम के आठ - दस ओर बैठे थे, मै , भैंस नै सानी देन निकला तो देखे बड़ी गरम-गरम बहस चाल रही सै मने लगया मामला तो गंभीर ही सै,धार निकालन का टाइम हो रह्या था .मने सोच्या के जल्दी से सानी गेर के फेर मामला देखेंगे, मै सानी गेर के आया.ओर उनके धोरे बैठ गया। मनीराम बोल्या -यार रमलू गजब हो गया,
के हो गया- मै बोल्या।
मनीराम-यार वो निठारी आला किस्सा सुन्या था.मै बोल्या -सुन्या था भोत अखबारां पे ,टी.वि पे आया था। फेर के हो गया?
मनीराम-अरे वो जो उसमे पकड़ा गया था ना "पंधेर " के कह्न्वे है वो इलाहबाद हाईकोर्ट ते बरी हो गया। राम-राम कितने बच्चों का खून पिया इन लोगों नै,
ताऊ-अरे भाई मै ठहरा रिटायर फौजी, कोर्ट का फ़ैसला तो म्हारे सर माथे पे सै। पण जब यो मामला सी.बी.आई धोरे था। ओर उनकी तहकीकात के बाद इतना खतरनाक अपराधी छुट जाए तो भाई यो डूब मरण की ही बात सै।
बनवारी बोल्या -ताऊ म्हारे देश का कानून ही लचीला सै वो इस बात पे न्याय करे सै के "हजार अपराधी छुट जाओ पण एक निर्दोष नै सजा नही होनी चाहिए।"
ताऊ - बनवारी तेरा कहना तो ठीक सै। पर यो पुलिस ही बावली बूच सै। इनते कोई काम ठीक होया सै। सिर्फ़ गरीब आदमी नै मारो,ठाणे में बंद दो ,जेल भेज दो, बड़ा आदमियां ओर पिसा वाला नै तो ये फूफा कहके बोलें सै।
रामधन बोल्या-ताऊ आज तो इस बात के चर्चे गाम-गाम में हो रे सै। इब्बे मै गाम ते आया तो बसड्डे आले चोरास्ते पे भीड़ लग रही थी ,सारे यो बात चालू थी।
ताऊ-में एक पुलिश का किस्सा बताऊँ ,वो अपना शमशेर कोणी थानेदार छितर आला। वो बताये करता।
मै बोल्या -के बताये करता?
ताऊ-एक बार इंडिया की पुलिस,अमेरिका, इंग्लॅण्ड की पुलिस का काम्पिटिशन होया के कुण चोर नै सबसे जल्दी पकड़ ले आवेगा। असली चोर छोड़ते तो वो भाज जाता, इसलिए जंगल में एक खरगोश छोड़ा जाएगा ,जो सबसे कम टाइम में पकड़ के ले आवेगा वो फर्स्ट माना जाएगा,
सबसे पहले अमेरिका की पुलिस गई वो तीन घंटे में खरगोश को पकड़ के ले आई ,इसके बाद इंग्लॅण्ड की पुलिस गई वो खरगोश को दो घंटे में पकड़ के ले आई,इसके बाद खरगोश फेर छोड्या गया इबके नंबर था अपनी इंडिया पुलिस का ,अपनी पुलिस का सबते काबिल थानेदार शमशेर शिंग ,जनता हवलदार ओर दो सिपाही जंगल में खरगोश ढूंढ़ने गए,पण शाम तक नही आए.इनको ढूंढ़ने के लिए एक कमेटी भेजी गई ,जब कमेटी पहुँची तो देख्या के शमशेर सिंग तो झाड़ के निच्चे सुता सै .हवलदार ओर सिपाहियों ने एक बन्दर झाड़ के उल्टा लटका राख्या सै। उसकी पिटाई करते वो कह रहे थे"बोल तू खरगोश सै के कोणी, तो भाई यो अपनी पुलिश बन्दर नै खरगोश बनान वाली पुलिस है। यो कानून को इस्तेमाल जनता की रक्षा के लिए कोणी अपना नंबर बनावन खातिर करे सै. चलो भाई दिया बत्ती को टाइम हो गया. बाकि बात कल देखंगे.

आपका
रमलू लुहार

(फोटो गूगल से साभार)

3 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

हा हा!! बन्दर को खरगोश मनवा कर ही दम लेंगे. मजेदार.

संजय तिवारी ’संजू’ ने कहा…

आपकी लेखन शैली का कायल हूँ. बधाई.

Vivek Rastogi ने कहा…

सही है अपनी पुलिस तो मार मार कर खरगोश बनाने में ही जुटी है...

 

फ़ौजी ताऊ की फ़ौज