शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2009

फोटू देख के फँसणा ना कोय-फौजी ताऊ मनफूल सिंग

बात यूँ हुई के म्हारे ताऊजी के छोरे का ब्याह था। तैयारी बड़ी जोर-शोर ते चल रही थी। एक दिन ताऊ मेरे धोरे आए ओर बोल्ले- एँ रे रमलू तन्ने बेरा कोणी के राधे का ब्याह आखा तीज का मांड राख्या सै। तूं अडे आडा पड्या सै। चाल मेरे साथ घोडी करण चालना सै। मन्ने मन ही मन में सोच्या वाह रे ताऊ मेरे ब्याह में तो झोट्टा (भैसा) तक ल्याण ने कोन्या था इब अपने पूत के ब्याह में घोडी ढूंढे सै । चालो ताऊ जी बोल के मै तयार होग्या। दोनु जणे मोटरसायकिल पै बैठ के शहर चाल पडे। मेरे धोरे बुलेट मोटरसायकल थी। उसमे थोडी खराबी आ रक्खी थी। चालते-चालते मोटर सायकल मिसफायर करया करती। मेरे मन में आज ताऊ की परेड कराण की मन में आयगी। मै ताऊ ते बोल्या - ताऊ इस मोटर सायकल में माडी सी खराबी आ री सै। या जब गर्म हो जा सै । तो इसके इंजन में बम सा पाटे सै, इसी बात होगी तो मै गाड़ी रोकूंगा ओर तू उतर के भाज लिए। ब्याह का टैम सै । किते चोट - फेट लाग गी तो लोग सोचेंगे , के ताऊ दारू पीके पड़ मरया मुफ्त में बदनामी होगी, ताऊ बोल्या- ठीक सै। थोडी देर बाद गाड्डी ने मिसफायर करया मन्ने झट ब्रेक लाया ओर गाड्डी पटक के भाज लिया, आगे -आगे मै, पीछे -पीछे धोती की लाँग पकडे-पकडे ताऊ। मै एक किलोमीटर भाज्या होऊंगा। ताऊ की हालत ख़राब, बोल्या- मन्ने बेरा होता तो बस ते ही आ जाता। माटी ख़राब तो नही होती। मै बोल्या- ताऊ इब न होवे, चाल बैठ ले । हम शहर पहुँच गे ।इब आगे की कहाणी सुण ल्यो। हम घोडी आले के पंहुचे , उसने क्या इक्यावंसो लूँगा ,ताऊ मोल-भावः करण लाग्या तो घोडी आला बोल्या देख ताऊ आखातीज का सावा सै। तेरी समझ में आवे तो दे बयाना घोडी टैम ते तेरे घर पहुँच जायेगी। तो ताऊ बोल्या पहले घोडी दिखा। तो घोडी आले ने बताया के घोडी तो ब्याह में जा रही सै। उसकी फोटो दिखा सकूँ सुं। घोडी वाले ने फोटो दिखाई घोडी धोले-चिट्टे (सफ़ेद) रंग की तगडी जानदार थी। ताऊ ने फोटू देख के बयाना दे दिया। हम घर आ गे।आखातीज का दिन भी आगया , निकासी की तयारी हो ली थी । बच्चे चिल्लाने लगे "घोडी आगी-घोडी आगी" मन्ने बाहर निकल के देख्या तो घोडी तो मेरा मटा खूब सजा कै लाया था। घोडी पै दूल्हा बैठ गया निकासी चालु हो गई। गाम का चक्कर काट लिया। जब दूल्हा घोडी ते उतरया तो कूद के घोडी पे एक छोरा चढ़ गया। चढ़ते ही उसे एड लगाईं, लगते ही घोडी बेहोस हो के पड़ गयी. घोडी वाले ने रोला मचाना (चिल्लाना) शुरू कर दिया- मेरी घोडी मार दई-मेरी घोडी मार दई, इतनी देर म्हारा सरपंच आया बोल्या के रोला मचा रख्या सै। घोडी वाले ने सारा किस्सा बताना,सरपंच ने घोडी के ऊपर का कपडे का श्रृंगार हटवाया और घोडी के कान में एक फूंक मारी घोडी उठ के खड़ी होगी, ताऊ भी खड़े होके देख रह्या था. उसने देख्या के घोडी के तो बाल भी उडोडे थे, घोडी तो एक दम बूढी थी. ताऊ का छोह (गुस्सा) सातवें आसमान पे था. उसने कहा- के साले ठगी करता है. जो घोडी तुने बताई थी ये वो नहीं है. घोडी वाला बोला" मन्ने घोडी ना दिखाई उसकी फोटू दिखाई थी. ताऊ बोले वो तो जवान ठाडी गोदी की फोटू थी और ये बूढी फूस पड़ी है. घोडी वाला बोला ताऊ मै झूठ नहीं बोलता घोडी वाही सै. पण थोडा सा फर्क यो सै के जो फोटू मन्ने दिखाई थी वो "इसकी जवानी की थी." ताऊ के साथ तो चाला हो गया.जवान की फोटू दिखा कै बूढी घोडी थमा दी. 

यो तो थी ताऊ के साथ धोखाधडी की बात,एक नया किस्सा सुण...................म्हारे सरपंच का छोरा फुलसिंग कॉलेज में पढ़े सै। होया नु के आज कल कम्पूटर पे इंटरनेट से दोस्ती-दोस्ती खेलने का काम चल रह्या सै। उसने उसमे भी भाग लिया.गांव का छोरा तो था ही.उसने ऑरकुट में अपनी पिछाण बनाई. जैसे ही ऑरकुट का पन्ना खुल्या उसने एक सोणी सी छोरी की फोटू दिखी. उसने उसके बारे में जानकारी लेने की कोशिश करी,लेकिन बात तो नु थी ना पहले दोस्त बनो फेर फोटू दिखेगी उसने दोस्ती का हाथ बढा दिया. उस छोरी ने दोस्ती कबूल कर ली. जब छोरे ने उसकी फोटू का अलबम खोल्या तो उसमे उसके बेटे के ब्याह की और उसके पोते के कुआ पूजन की फोटू थी. बेचारा फुलसिंग "फूल" बन गया. तो इस तरह के धोखे देने वाले तो पग-पग पे मिले हैं. लुहार ने इसका तोड़ यो पाया के भाई सौदा अपनी आँख के सामने देख के करो नहीं फेर थारी भी निकासी रूंग (बाल) उडी घोडी पे ही निकलेगी.

सबने लुहार की राम-राम,मेरी सलाह अच्छी लागी हो तो भाई एकाध कार्ड इंटरनेट पे लिख दियो।इससे मुझे पता चल जायेगा के भाइयों का प्यार म्हारी खातिर भी सै.





आपका



रमलू लुहार 

(फोटो गूगल से साभार)

5 टिप्‍पणियां:

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा…

प्रस्तुति का अंदाज ...

बेहतरीन

धन्यवाद ...

महफूज़ अली ने कहा…

ghodi to bahut sunder say....

prastuti ka andaaz ekdum nirala hai...

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

सलाह तो बहुत बढ़िया दी है जी | सारा सौदा सही ढंग से देख भाल करके के ही करना चाहिए | वरना हर जगह जगह धोखे ही धोखे है |

बेहतरीन प्रस्तुति :)

Nirmla Kapila ने कहा…

बहुत बडिया बधाई और शुभकामनायेम्

राज भाटिय़ा ने कहा…

लालित भाई मजा आ गया आज अपनी बोली मै यह सब पढ कर.
धन्यवाद

 

फ़ौजी ताऊ की फ़ौज