गुरुवार, 17 सितंबर 2009

फौजी ताऊ की चौपाल में कविताई

शाम नै फेर ताऊ की चौपाल जम गयी पर ताऊ नै आया,सबने चिंता होने लग गयी के ताऊ गया तो गया कहाँ ,
बनवारी बोल्या-रमलू आज ताऊ नहीं आया मन्ने हुक्का भी सिलगा लिया चिलम भी भर लाया,
रमलू बोल्या गया होगा कहीं काम से आ जायेगा, रामेषर बोल्या -रमलू जा पूछ के आ के ताऊ गया कहाँ,
रमलू बोल्या -किस ते पुछू ?
शिम्भू बोल्या -ताई ते पुच्या. मैं कोणी जाता मन्ने ताई ते डर लगे हैं, जाते ही सौ सवाल खडे कर देगी,रमलू बोल्या,
राधे बोल्या - अरे बूढे शिम्बू तेरी अकाल ख़राब हो रही सै, तू बूढी ने ताई बोलता हैं,तेरी तो भाभी लगे सै,
शिम्भू बोल्या-बुढापे में बालक ओर बूढे की एक ही मति हो जाती हैं ओर ताई कह भी दिया तो के फर्क पड़े सै ,म्हारे बच्चों की तो ताई हैं, सोच ले म्हारी भी ताई ही समझ ले ,जा बातों की खराद मत उतर पूछ के आ
रमलू पूछे गया तो ताई नै बताया के सरपंच के साथ जाने वाला था फेर गया के पता नहीं, फेर बोली याद आया वो तो सुखराम के साथ बैल गाड़ी पे बैठ के एक गाम में गया हैं, बतावे था के सुखराम कीछोरी नै उसकी सासू घणी परेशान करे सै,तो गाम मै पंचायत होगी उसमे ही गया सै, रमलू जवाब लेके वापस आया ,ओर सबको ये बात बताई , बनवारी बोल्या- यार आज की साँझ ख़राब हो गयी ताऊ भी ना पाया,
रामेसर बोल्या कैसे ख़राब होय गी, आज मै ताऊ पे एक कविताई बना के लाया हूँ, वो सुनो,
राधे बोल्या -अरे तू कवी कब से हो गया, सुसरे इस्कूल का तो तनने मुह नहीं देख्या,
अरे कविता करने के लिए के इस्कूल जाना जरुरी सै, अपने मन में याद कर ले फेर किसी पढ़े लिखे मास्टर ते डायरी में लिखवा ले, यो बात तो पते की कही,हमारे देश में इतने कवी हुए के उनके पास डिग्री थी ओर बड़े
बड़े ग्रन्थ लिख मारे ,बहोत बढ़िया सुना भाई ,शंभू बोल्या,
रमलू बोल्या - अरे रोला मत मचाओ भाई प्रेम ते कविताई सुनो रामेषर की,
ताऊ मनफूल सिंग का पाया नहीं ठिकाना
इब उस फौजी नै मन्ने ही ढूंढ़ने पडेगा जाना
बहोत बढ़िया वाह -वाह कर दिया कमाल,यो कविता तो इसने म्हारे ताऊ पे बने हैं, चल आगे बोल, रमलू बोल्या
या मिलेगा फेर तन्ने रमलू की गोल मॉल में
या मिलेगा फेर तन्ने गांव के अल्हड चाल में
या मिलेगा फेर तन्ने गुरतुर गोठ की ताल में
या मिलेगा फेर तन्ने एक लोहार की टाल में
या मिलेगा फेर तन्ने ललित डॉट के माल में
या मिलेगा फेर तन्ने ललित वा
बोल्डणी के जाल में
या मिलेगा फेर तन्ने शिल्पकार की पड़ताल में
या मिलेगा फेर तन्ने जंतर-मंतर की हड़ताल में
या मिलेगा फेर तन्ने अपने घर के ही जंजाल में
रोज मिलेगा फेर तन्ने ताऊ साँझ की चोपाल में

वाह भाई वह बड़ी बढ़िया कविता सुनाई, मजा आ गया जी सा आ गया ,बनवारी बोया, चलो भाई आज की सभा ख़त्म करो कल मिलेंगे जब ताऊ आ जायेगा,
सबने राम -राम

1 टिप्पणी:

alka sarwat ने कहा…

ताऊ पता नहीं कल गाव की चौपाल में मिलेगा की नहीं ये आप लोग जानिए ,मुझे तो ललित शर्मा मिल गये
बहुत दिनों से इनको खोज रही थी धन्यवाद देने के लिए ,क्योंकि आपने मेरे ब्लॉग का अनुसरण करके मेरा हौसला बढाया है
वैसे हरियाणा की ठेठ भाषा बहुत मीठी लग रही है

 

फ़ौजी ताऊ की फ़ौज