शुक्रवार, 11 सितंबर 2009

ताऊ यो तो गजब हो गया

ताऊ साँझ नै पोली के आगे बैठा था,उसके साथ गाम के आठ - दस ओर बैठे थे, मै , भैंस नै सानी देन निकला तो देखे बड़ी गरम-गरम बहस चाल रही सै मने लगया मामला तो गंभीर ही सै,धार निकालन का टाइम हो रह्या था .मने सोच्या के जल्दी से सानी गेर के फेर मामला देखेंगे, मै सानी गेर के आया.ओर उनके धोरे बैठ गया। मनीराम बोल्या -यार रमलू गजब हो गया,
के हो गया- मै बोल्या।
मनीराम-यार वो निठारी आला किस्सा सुन्या था.मै बोल्या -सुन्या था भोत अखबारां पे ,टी.वि पे आया था। फेर के हो गया?
मनीराम-अरे वो जो उसमे पकड़ा गया था ना "पंधेर " के कह्न्वे है वो इलाहबाद हाईकोर्ट ते बरी हो गया। राम-राम कितने बच्चों का खून पिया इन लोगों नै,
ताऊ-अरे भाई मै ठहरा रिटायर फौजी, कोर्ट का फ़ैसला तो म्हारे सर माथे पे सै। पण जब यो मामला सी.बी.आई धोरे था। ओर उनकी तहकीकात के बाद इतना खतरनाक अपराधी छुट जाए तो भाई यो डूब मरण की ही बात सै।
बनवारी बोल्या -ताऊ म्हारे देश का कानून ही लचीला सै वो इस बात पे न्याय करे सै के "हजार अपराधी छुट जाओ पण एक निर्दोष नै सजा नही होनी चाहिए।"
ताऊ - बनवारी तेरा कहना तो ठीक सै। पर यो पुलिस ही बावली बूच सै। इनते कोई काम ठीक होया सै। सिर्फ़ गरीब आदमी नै मारो,ठाणे में बंद दो ,जेल भेज दो, बड़ा आदमियां ओर पिसा वाला नै तो ये फूफा कहके बोलें सै।
रामधन बोल्या-ताऊ आज तो इस बात के चर्चे गाम-गाम में हो रे सै। इब्बे मै गाम ते आया तो बसड्डे आले चोरास्ते पे भीड़ लग रही थी ,सारे यो बात चालू थी।
ताऊ-में एक पुलिश का किस्सा बताऊँ ,वो अपना शमशेर कोणी थानेदार छितर आला। वो बताये करता।
मै बोल्या -के बताये करता?
ताऊ-एक बार इंडिया की पुलिस,अमेरिका, इंग्लॅण्ड की पुलिस का काम्पिटिशन होया के कुण चोर नै सबसे जल्दी पकड़ ले आवेगा। असली चोर छोड़ते तो वो भाज जाता, इसलिए जंगल में एक खरगोश छोड़ा जाएगा ,जो सबसे कम टाइम में पकड़ के ले आवेगा वो फर्स्ट माना जाएगा,
सबसे पहले अमेरिका की पुलिस गई वो तीन घंटे में खरगोश को पकड़ के ले आई ,इसके बाद इंग्लॅण्ड की पुलिस गई वो खरगोश को दो घंटे में पकड़ के ले आई,इसके बाद खरगोश फेर छोड्या गया इबके नंबर था अपनी इंडिया पुलिस का ,अपनी पुलिस का सबते काबिल थानेदार शमशेर शिंग ,जनता हवलदार ओर दो सिपाही जंगल में खरगोश ढूंढ़ने गए,पण शाम तक नही आए.इनको ढूंढ़ने के लिए एक कमेटी भेजी गई ,जब कमेटी पहुँची तो देख्या के शमशेर सिंग तो झाड़ के निच्चे सुता सै .हवलदार ओर सिपाहियों ने एक बन्दर झाड़ के उल्टा लटका राख्या सै। उसकी पिटाई करते वो कह रहे थे"बोल तू खरगोश सै के कोणी, तो भाई यो अपनी पुलिश बन्दर नै खरगोश बनान वाली पुलिस है। यो कानून को इस्तेमाल जनता की रक्षा के लिए कोणी अपना नंबर बनावन खातिर करे सै. चलो भाई दिया बत्ती को टाइम हो गया. बाकि बात कल देखंगे.

आपका
रमलू लुहार

(फोटो गूगल से साभार)

गुरुवार, 10 सितंबर 2009

ताऊ अस्पताल में

कल ताऊ पेंशन लेन गया था और आयके दारू के ठेके पे बैठ गया लुन्गाडा के साथ,ताई मनभरी उसने ढूंडती फिरे थी। ताऊ उसने सामने ठेके बठ्या दिख गया फेर के पूछना था। ताई ने उसकी रेल बना दी। किसी तरियां ताऊ घर पूंचा,
ताई ने उसकी चंगी खातिर दारी करी ।
कोई रात के ११ बजे थे ,ताऊ के रोला (चिल्लाना) की आवाज आई ,ताऊ बोल्ले कोई बचाओ रे , मर गया ,मैं तो मर गया, सारे मुहल्ले ने सर पे धर लिया ।
ताई भाजी भाजी मेरे धोरे आई "चाल रे भाई रमलू तेरे ताऊ के पता नही के हो गया। वो रोला घालन लाग रह्या सै.में तावला उठ के चाल पड्या। ताई बोली भाई डाकदर नै जल्दी बुला के ला.म्हारे गाम में एक आर.एम्.पी डाकदर रह्या करता। मै उसने बुला के लाया देखते डाकदर बोल्या - ताऊ की बीमारी तो मेरे समझ में नही आती आपको ये पेशेंट रोहतक ले जाना पडेगा। इसके पेट में दर्द है, मै दर्द की गोली दे देता हूँ। दर्द कुछ कम हो जाएगा।
रात के १२/३० हो गए थे, में भाज के गाड़ी ढूंढ़ने लगा ,मणि राम के धोरे एक जुगाड़ पा गया ,हम रात नै ताऊ नै जुगाड़ में गेर के रोहतक पी.गी.आई लेके गए .सुबेरे-सुबेरे हमने जुगाड़ आपात कालीन चिकित्सा के बोर्ड के सामने लगाया , स्टेचर लेके दो धोले कपड़े आले आए ,वे ताऊ ने उसमे गेर के भीतर वार्ड में लेगे, आगे के होया वो सुन ल्यो
एक कोट पहरे डाकदर आया आते ही ताऊ ते बोल्या
डाकदर- ताऊ मुंह खोल
ताऊ- डाकदर के मुंह में बड़ के बीमारी देखेगा।
डाकदर- ताऊ यो बता तेरे तकलीफ के सै।
ताऊ - तूं ऐ बता
डाकदर ताऊ के वार्तालाप ते परेशान हो गया। उसने पेड पे ताऊ की जाँच लिख दी
डाकदर- मेने ये जाँच लिख दी है पहले पथोलोजी में खून पेशाब की जाँच करवा के लेके आओ
हम ताऊ नै पेथोलोजी में लेके गए वहां एक सोणी सी नर्स थी ।
ताऊ बोल्या - यार रामलू बड़ी आच्छी जगह लेके आया,कुछ खुसबू सी आ रही सै।
नर्स सारी बात सुने थी । वो बोलली - डट जा बूढे तेरे सारी खुसबू तो मै इब्बे काढू सूं
उसने एक बड़ा सुइया काढा और ताऊ के हाथ की नस से निकालने लगी, ताऊ चिल्लाया -के सारा ही खून निकलेगी। राम-राम करके ताऊ ने खून दिया ,
हम उसने लेके फेर वर्ड में आ गये, डाकदर साहब आए, बोल्ले -ताऊ के पेट में घनी प्रोबलम सै, इसकी इंडोस्कोपी भी करनी पड़ेगी। इसका हिमोग्लोबिन भी कम सै खून भी चढाना पड़ेगा। खून की व्यवस्था करो, हमने पूछ्या -डाकदर साब ताऊ के बीमारी के सै। डाकदर साब बोले जरा मै ताऊ ते ही बात कर लूँ।
डाकदर- हाँ ताऊ ! के दारू पीते हो,
ताऊ- कदे- कदे,
डाकदर- कितने साल से पी रहे हो
ताऊ- पहले फौज में पीते थे इब भी पी लेते है।
मै बोल्या डाकदर साब बात यो है। के ताऊ ने शोले फिलम देखी थी ,तभी से अपने आप को बीरू समझ लिया ये समझ लो जी "होश सँभालते ही पैरों पे खड़े हो लिए।
ताऊ बिरच गया। तमने शराबी ही समझ लिया?
हमने ताऊ नै मनाया।
एक नर्स खून की बोतल लेके आई , खून चढाने के लिए। ताऊ लंबा सुइया देख के डर गया
ताऊ- ये सुइया किसके लगावेगी,
मै बोल्या-आपके
ताऊ -इस खून की बोतल का के करेगी ।
मै बोल्या -आपके नस में सुइया लगा के चढावेगी,
ताऊ-बिना चढाये काम नही चलेगा? अरे भाई रमलू एक काम कर यो खून की थैली मन्ने फाड़ के ही पिला दे , इस तरियां भी पेट में जानी है। और उस तरियां भी पेट में जानी है पण यो सुइया मै कोणी लगवाता,
मेने ताऊ को भतेरा समझाया पण वो उत मान्या ही कोणी
तब तक डाकदर आ गया भाई ताऊ ने ले चलो इंडोस्कोपी करनी सै
ताऊ- यो के हो सै
डाकदर - इब चाल के ही देख लिए,आगे समझ में आ जा गा
कोम्पौडर आके ताऊ नै भीतर लेगे। भीतर जा के ताऊ नै बड़ी बड़ी मशीन देखी और जोर ताई चिल्लाया
मन्ने कड़े लिआए , आपरेशन कोणी कराना.डाकदर बोल्या ताऊ आपरेशन कोणी सिर्फ़ तेरे बिमारी चेक करनी है।
ताऊ को बेड पे लिटा के डाकदर ने एक सांप जैसा सटील का निकला ।
ताऊ बोल्या - यो के सै,
डाकदर -इस ते तेरी बीमारी का चेक करना है।
ताऊ-किस तरियां करेगा
डाकदर-यो आपके पेट में डाल अन्दर बीमारी देखेंगे
ताऊ सोच्या के इब तो एक झूठ के कारन मरना ही पडेगा ताऊ ने जुगत लगे बचने की।
ताऊ- डाकदर साब मन्ने पेशाब आ रही सै। आपका यो जुगाड़ मुंह ते अन्दर जाएगा और निचे ते आपकी चादर और मेरी धोती दोनों ख़राब हो जायेगी
डाकदर -जाओ जल्दी बाथरूम करके आओ।
ताऊ बाथरूम के अन्दर गया और धोती के सहारे खिड़की ते उतर के भज लिया।
काफी देर तक ताऊ पेशाब करके नही आया तो डाकदर ने दरवाजा तुड़वाया। बाथरूम खाली पड़ा था
ताऊ गायब थे ,उसकी धोती खिड़की से लटक रही थी।
हम ताऊ ने ढूंढ़ने निकले ,ढूंढ़ते -ढूंढ़ते गाम तक पहुँच गए , तो देख्या के ताऊ दारू के ठेके पे ही बठ्या सै।
और देशी का अध्दा खोल राख्या सै। अरे ताऊ यो के करण लग रह्या सै,
ताऊ-अरे रमलू पेट की बीमारी ठीक करू सूं .पेट के कीडे इस्ते ही मरेंगे। मरने पेट के कीडे थे वो डाकदर मन्ने ही मारण की तयारी कर रह्या था।बीमारी वीमारी कुछ न थी वो तो ताई और मेरा झगडा हो गया था। आजा तू भी दो पैग मार ले। रात का जाग्या हुआ सै।

अब आगे ताऊ की कहानी चालु रहेगी .अभी हरियाने में चुनाव है। और ताऊ लड़ने की तयारी कर रहा है। रमलू ताऊ के साथ है। वो आपको पल-पल की ख़बर पहुंचाएगा ।

आपको ये पोस्ट कैसी लगी अपना आशीर्वाद देना ।
आपका
रमलू लुहार।

(फोटो गूगल से साभार)

बुधवार, 9 सितंबर 2009

ठेके पे बैठ के देशी की बोतल

ताऊ के सारे भतीजे - भतीजियों, बेटे-बेटियों,पोते-पोतियों,पड़पोते -पड्पोतियों,गली -मोहल्ले के बच्चों की माँ और उनके बापुओं ने मेरी राम-राम.कहन- सुनन -देखन वालन ने भी मेरी राम-राम।
यो राम-राम भी बड़ी जरुरी चीज से , बिना राम-राम के कुछ कोणी। अगर हम राम के युग में पैदा होते तो राम-राम करनी ही थी ,अगर राम कलजुग में पैदा होते तो उन्हें भी राम करनी थी.आप सोचते होगे के चिट्टी की शुरुआत में मन्ने सरे गाम ते राम-राम क्यूँ करी,? इसका जवाब यो से के ४ दिन होगे जितनी भी पोस्ट लिखी वो बिना राम-राम करे ही लिख दी, पण जब पोस्ट करण की बारी आई तो कदे बिजली चली गई कदे कम्पूटर खड़ा हो गया कदे इंटरनेट जवाब दे गया, मेरा मतबल यो से के उपद्रव चालू ,में सोचु था ये किसकी नजर लग गी मेरे ब्लॉग पे। इतने उपद्रव तो लंका की लडाई में राम ने न झेले होंगे,और इन उपद्रवी राक्शाशों की काट तो राम के ही पास सै,चलो आज की बात राम ते ही चालु करो, ठोकर खाने के बड़ ही बुधी आती है हमारे बुजुर्ग कह गए है। बुजुर्गों की बात तुलसी दास जी मानी थी तो उपद्रव से बच गे । उन्होंने "राम चरित मानस के शुरू में ही लिख दिया था।
बंदौ प्रथम मही सुर चरना , मोहजनित संशय सब हरना
कितना समझदारी काम था , भाइयों इस लिए आज से मन्ने भी यो परमपरा कायम रखने की सोच लई ,सारे गाम ते राम-राम करना इसलिए जरुरी सै के "गाम में ही राम बसता है। गाम की बंदगी हो गई ,तो राम की बंदगी भी होय गयी , अब लगे सै के मेरे ब्लॉग में भी उपद्रव होना बंद हो जा गा, नही तो फेर सवा रुपया का परसाद बाबा बजरंगबली का बोलना ही पड़ेगा, फेर इ न उताँ ने वो ही संभालेगा।
ताऊ की बात बताऊँ आज वो सबेरे ते ही ठेके पे बैठ के देशी की बोतल लगाने लग रह्या सै, ताई "मनभरी" हाथ में लाठी लेके उसने ढूंढ़ रही सै। ताऊ पेंशन लेने गया था और आके ठेके पे मौज करने लग गया, ताऊ "मनफूल"और ताई "मनभरी " का ड्रामा आगले दिन के मोड़ लेगा ........?
ताऊ की कहानी अगली बार,

आपका
रमलू लुहार

मंगलवार, 8 सितंबर 2009

बता तू अकल बड़ी के भैंस

ताऊ ने काल एक कविताई लिखी थी पण कम्पूटर महाराज की मेहरबानी तै आप तक नही पहुँची,इसलिए या कविताई आज आप तक पहुंचान की कोशिश हो रही सै। या कविताई गाम के भोले भाले ताऊ की बनाई हुई है। आपके समझ में आ जा तो आछी बात है, और ना आवे तो धैर्य ना खोके उत्साह बढ़ाना।
ताऊ बोल्या मै पूछूं था

बता तू अकल बड़ी के भैंस
मास्टर जी ने सवाल लगाया के बतावे सुरेश
भैंस में तै पाड़ी घटाई झोट्टा रह गया शेष
बता तू अकल बड़ी के भैंस

जाडा भोत पड़े था भाई खूब लगाई रेस
पहले तो कम्बल ओड्या उस पे डाला खेस
बता तू अकल बड़ी के भैंस

कुत्ते के पिल्लै पकड़े उसके मुंडे केश
बिना उस्तरे नाइ मुंडा ताऊ पे चल्या केश
बता तू अकल बड़ी के भैंस

बिना चक्के की गाड्डी चाली रेल उडी परदेश
गार्ड बेचारा खड़ा रह गया देखे बाट नरेश
बता तू अकल बड़ी के भैंस

एक पेड़ पे चालीस चिडिया तभी घटना घटी विशेष
शिकारी की एक गोली चाली बच गई कितनी शेष

बता तू अकल बड़ी के भैंस


सबने मेरी राम राम

आपका
रमलू लुहार
रामपुरा वाला

सोमवार, 7 सितंबर 2009

ताऊ की चौपाल

भाइयों देशां में देश हरियाणा, जड़े दूध दही का खाना, या बात म्हारे हरियाणे की सै ,यहाँ का दूध दही,घी मशहूर है. तो यहाँ के ताऊ और फूफे भी पुरे जगत में मशहूर हैं ,इनपे हजारों किस्से सुनते आए हैं। ताऊ तो हरियाणे  के हरेक गाँव में सै। म्हारे भी गाँव में एक ताऊ से रिटायर फौजी मनफूल सिंग जी, उसकी कहानी भी सारे ताउओं जैसी है ,पण कुछ हट के सै म्हारा यो ताऊ,म्हारा गाँव जिला महेंद्र गढ़ में रामपुरा सै, ताऊ मनफूल सिंग म्हारे गांव का सबसे पद्या लिख्या और सुलझा हुआ माणस सै, पुरे गाम  मै इसकी ही चौधर चाले सै, गांव के सारे नौजवान छोरे भी जितने भी सें ताऊ के पिच्छे ही हांडते फिरे सै क्युके ताऊ नई कैंटीन ते राम जो मिले सै, बस ताऊ की चौपाल रोज साँझ नै उसके नोहरे के सामने लग ही जा सै, फेर दुनिया के सारे किस्से उरे ही पैदा हो जावे सै, ओबामा से लेके म्हारे गाम के सरपंच तक की सारी कहानी बन जावे सै. ताऊ म्हारा हर गरीब-अमीर, बूढे-जवान सबके सुख दुःख मैं काम आवे सै, इसका और म्हारी ताई का कदे-कदे लठ भी बाज जाये करे किसी बात नै लेके, फेर रिटायर फौजी सै तो फ़ौज के किस्से घणे ही सै. लोग अपणा टैम भी पास कर लें सै, ताऊ के किस्से सूं के,ताऊ का एक चमचा भी सै, जिसने मोड़े कह्या करें नै पट्ट शिष्य याने चेला, यो ताऊ के साथ हरदम मिलेगा, मान लो ताऊ म्हारे गाम का प्रधानमंत्री सै तो रमलू लुहार उसका प्रवक्ता सै, जो रमलू कह दे समझ लो ताऊ कह रह्या सै. आपने इस ब्लाग म्हारे ताऊ के किस्से सुनने मिलगे, ताऊ की चौपाल में. आपका स्वागत सै.


आपका
रमलू लुहार

गुरुवार, 20 अगस्त 2009

अरे भाई! फोटू देख के फंसियो न कोय


बात यूँ हुई के म्हारे ताऊजी के छोरे का ब्याह था। तैयारी बड़ी जोर-शोर ते चल रही थी। एक दिन ताऊ मेरे धोरे आए ओर बोल्ले- एँ रे रमलू तन्ने बेरा कोणी के राधे का ब्याह आखा तीज का मांड राख्या सै। तूं अडे आडा पड्या सै। चाल मेरे साथ घोडी करण चालना सै। मन्ने मन ही मन में सोच्या वाह रे ताऊ मेरे ब्याह में तो झोट्टा (भैसा) तक ल्याण ने कोन्या था इब अपने पूत के ब्याह में घोडी ढूंढे सै । चालो ताऊ जी बोल के मै तयार होग्या। दोनु जणे मोटरसायकिल पै बैठ के शहर चाल पडे। मेरे धोरे बुलेट मोटरसायकल थी। उसमे थोडी खराबी आ रक्खी थी। चालते-चालते मोटर सायकल मिसफायर करया करती। मेरे मन में आज ताऊ की परेड कराण की मन में आयगी। मै ताऊ ते बोल्या - ताऊ इस मोटर सायकल में माडी सी खराबी आ री सै। या जब गर्म हो जा सै । तो इसके इंजन में बम सा पाटे सै, इसी बात होगी तो मै गाड़ी रोकूंगा ओर तू उतर के भाज लिए। ब्याह का टैम सै । किते चोट - फेट लाग गी तो लोग सोचेंगे , के ताऊ दारू पीके पड़ मरया मुफ्त में बदनामी होगी ताऊ बोल्या ठीक सै। थोडी देर बाद गाड्डी ने मिसफायर करया मन्ने झट ब्रेक लाया ओर गाड्डी पटक के भाज लिया , आगे -आगे मै पीछे -पीछे धोती की लाँग पकडे-पकडे ताऊ। मै एक किलोमीटर भाज्या होऊंगा। ताऊ की हालत ख़राब, बोल्या- मन्ने बेरा होता तो बस ते ही आ जाता। माटी ख़राब तो नही होती। मै बोल्या ताऊ इब न होवे चाल बैठ ले । हम शहर पहुँच गे ।इब आगे की कहाणी सुण ल्यो। हम घोडी आले के पंहुचे , उसने क्या इक्यावंसो लूँगा ,ताऊ मोल-भावः करण लाग्या तो घोडी आला बोल्या देख ताऊ आखातीज का सावा सै। तेरी समझ में आवे तो दे बयाना घोडी टैम ते तेरे घर पहुँच जायेगी। तो ताऊ बोल्या पहले घोडी दिखा। तो घोडी आले ने बताया के घोडी तो ब्याह में जा रही सै। उसकी फोटो दिखा सकूँ सुं। घोडी वाले ने फोटो दिखाई घोडी धोले-चिट्टे (सफ़ेद) रंग की तगडी जानदार थी। ताऊ ने फोटू देख के बयाना दे दिया। हम घर आ गे।आखातीज का दिन भी आगया , निकासी की तयारी हो ली थी । बच्चे चिल्लाने लगे "घोडी आगी-घोडी आगी" मन्ने बाहर निकल के देख्या तो घोडी तो मेरा मटा खूब सजा कै लाया था। घोडी पै दूल्हा बैठ गया निकासी चालु हो गई। गाम का चक्कर काट लिया। जब दूल्हा घोडी ते उतरया तो कूद के घोडी पे एक छोरा चढ़ गया। चढ़ते ही उसे एड लगाईं, लगते ही घोडी बेहोस हो के पड़ गयी. घोडी वाले ने रोला मचाना (चिल्लाना) शुरू कर दिया- मेरी घोडी मार दई-मेरी घोडी मार दई, इतनी देर म्हारा सरपंच आया बोल्या के रोला मचा रख्या सै। घोडी वाले ने सारा किस्सा बताना,सरपंच ने घोडी के ऊपर का कपडे का श्रृंगार हटवाया और घोडी के कान में एक फूंक मारी घोडी उठ के खड़ी होगी ताऊ भी खड़े होके देख रह्या था. उसने देख्या के घोडी के तो बाल भी उडोडे थे, घोडी तो एक दम बूढी थी. ताऊ का छोह (गुस्सा) सातवें आसमान पे था. उसने कहा- के साले ठगी करता है. जो घोडी तुने बताई थी ये वो नहीं है. घोडी वाला बोला" मन्ने घोडी ना दिखाई उसकी फोटू दिखाई थी. ताऊ बोले वो तो जवान ठाडी गोदी की फोटू थी और ये बूढी फूस पड़ी है. घोडी वाला बोला ताऊ मै झूठ नहीं बोलता घोडी वाही सै. पण थोडा सा फर्क यो सै के जो फोटू मन्ने दिखाई थी वो "इसकी जवानी की थी." ताऊ के साथ तो चाला हो गया.जवान की फोटू दिखा कै बूढी थमा दी. यो तो थी ताऊ के साथ धोखाधडी की बात,एक नया किस्सा सुण...................म्हारे सरपंच का छोरा फुलसिंग कॉलेज में पढ़े सै। होया नु के आज कल कम्पूटर पे इंटरनेट से दोस्ती-दोस्ती खेलने का काम चल रह्या सै। उसने उसमे भी भाग लिया.गांव का छोरा तो था ही.उसने ऑरकुट में अपनी पिछाण बनाई. जैसे ही ऑरकुट का पन्ना खुल्या उसने एक सोणी सी छोरी की फोटू दिखी. उसने उसके बारे में जानकारी लेने की कोशिश करी,लेकिन बात तो नु थी ना पहले दोस्त बनो फेर फोटू दिखेगी उसने दोस्ती का हाथ बढा दिया. उस छोरी ने दोस्ती कबूल कर ली. जब छोरे ने उसकी फोटू का अलबम खोल्या तो उसमे उसके बेटे के ब्याह की और उसके पोते के कुआ पूजन की फोटू थी. बेचारा फुलसिंग "फूल" बन गया. तो इस तरह के धोखे देने वाले तो पग-पग पे मिले हैं. लुहार ने इसका तोड़ यो पाया के भाई सौदा अपनी आँख के सामने देख के करो नहीं फेर थारी भी निकासी रूंग (बाल) उडी घोडी पे ही निकलेगी.
ताऊ के बेटे,पोतों,भतीजे,भतीजियों,सरपंचो,सबने लुहार की राम-राम,मेरी सलाह अच्छी लागी हो तो भाई एकाध कार्ड इंटरनेट पे लिख दियो।इससे मुझे पता चल जायेगा के भाइयों का प्यार मेरे जैसे को मिलन लाग रह्या sai.



आपकारमलू लुहार

बुधवार, 19 अगस्त 2009

जय बोलो ठाणेदार की।

ताऊ जी राम- राम ,

या कविताई थारी नजर करूं सुं। बालक का ध्यान रखियो.



जय बोलो ठाणेदार की



निसदिन जो करे प्रतिज्ञा, मानव के कल्याण की,

आज सुना रहा हूँ मै गाथा,धरती के बलवान की,

जय बोलो ठाणेदार की,



सर पर मुकुट सोहे है उसके, कटी शास्त्र भी धरता है,

हस्त दंडिका लेकर चलता ,तब अम्बर भी हिलता है,

है मजाल कोई आए सामने, जय बोलो ठाणेदार की,



एक सो इक्यावन से अभिमंत्रित,अमोघ अस्त्र तेरा है,

चोर,उचक्के,ठगी, जगियों का,थाना ही अन्तिम बसेरा है,

बिना लड़े ही चित्त कर देता, जय बोलो ऐसे प्रहार की,

जय बोलो ठाणेदार की,



तेरा अभय paate ही ,निर्बल भी निर्भय हो जाता है,

करे वंदना सभी उसी की, जो तेरा आशीष पता है

गुननिधि, बल विशारद , जय बोलो महा उदार की,

जय बोलो ठाणेदार की



जिस पर तेरी किरपा होती, वो बंधन मुक्त हो जाता है,

वह प्राणी मृत्युलोक मै भी, स्वर्ग लोक का सुख पता है,

कृपा पात्र को धन्य करता, जय बोलो बड़े सरकार की

जय बोलो ठाणेदार की,


जन-मन-गन निसदिन ,तुझको ही ध्याता है,

कोटि तीर्थ सम फल पके, भवसागर तर जाता है

दुष्ट भंजक विधि के रक्षक ,जय बोलो करुनागार ,

जय बोलो ठाणेदार की, जय बोलो ठाणेदार की,




आपका


रमलू,

मंगलवार, 18 अगस्त 2009

"हट जा ताऊ पाच्छे नै"











यो ले भाई,
इब हम भी आगये मैदान में,
बात या थी के जित भी जाओ उत ब्लॉग की ही चर्चा हो री सै, एक दिन में भी इंटर नेट पै था। तबी सामने ताऊ डाट काम का ब्लॉग आ गया। में तो बावला होगया जी , अरे भाई म्हारे ताऊ जी अडे पहले ही पहुच गये मन्ने तो बताया भी नही आप पहले ही पुन्च गे। ताऊ बेटे का रिश्ता म्हारे हरियाणे में बड़ा ही मधुर होया करे। बाज्जे वालों ने गाना भी बना दिया - "हट जा ताऊ पाच्छे नै नाचन दे जी भरके नै"
तो बात या है पुरे हरियाणा के छोरे इस ताऊ तै ही दुखी हो रहए हैं। ना खान दे ,ना पीने दे , ना नाचन दे, ताऊ इब जमाना बदल गया, छोरों के साथ नाच्चो कुद्दो मौज मनाओ। ज्यादा परेसान करोगे तो चाँद मोह्ह्म्म्द ने रास्ता तो बता ही दिया सै। बाप्पू दुखी कर राख्या सै । इसी फिजा लाया के पुरे खानदान की ही फिजा ख़राब करके धर दी । तो दुनिया के जितने भी बड़े-बड़े ताऊ जी सै, इनने यो ही सलाह सै के इब मान भी जाओ । और छोरों ने नाचन दयो।
एक बात तो में बतानी भूल ही रह्या था। कुछ दिन lट्रेन में आ रह्या था । मेरे सामने वाली बर्थ पे दो महिलाएं और एक छोट्टा बच्चा था, दिल्ली सै गाड्डी चालली। आगरा में और पेसेंजर चढ़े , उनकी सिट पे जगा देख के बैठ गये । बोलले आगले टेसन तक जाना है। फेर आगले टेसन पे दूसरी सवारी भी चढ़ गयी ,उन्हें भी आगले टेसन जाना था। जब आगले टेसन पे सिट खाली हुयी तो में बोल्यो "माता जी आप अडे सो जाओ नही तो फेर कोई और बैठ जा गा । तो वा बोली" तनने में माताजी laagu su ? तेरे ते कोई एक दो साल मेरी उम्र छोटी ही होगी।" मेरे तो सांप सुंग गया ,काटो तो खून नही। मेरे ते रह्या नही गया "क्यूँ के बोले बिना रह नही सकता हरियाणे की इज्जत का सवाल था" तो मन्ने पूछा "ये छोटा बच्चा आपका पोता है के दोहिता? वा बोलली "दोहिता" में बोल्या "फेर तो हकीकत में मेरी उम्र आपसे बड़ी है।इससे बड़ा तो मेरा पडपोता है।"
तो ताऊ जी बड़ा खराब जमाना आ गया सै। बहन जी कह दो जीजा जी मुफ्त में लो, भुआ कह दो फूफा साथ में मुफ्त में लो और अगर फूफा हो ही गया तो सारे रास्ते फेर उसकी सेवा करो, उसका हुक्का भर के लाओ।
आख़िर में "लुहार" नै उसका यो ही तोड़ पाया के "मैडम" बोलो और आनन्द में रहो।
ताऊ के सारे बेटे पोतों को मेरी राम-राम
(और भाई कोई सलाह देनी तो मेरा घर का किवाड़ २४ ghante खुल्ला सै। क्यूँ के बंद किवाड़ तो बाल-बच्चेदारों के ही मिलगे देश की जनसँख्या जो बढानी से )

आपका
रमलू

 

फ़ौजी ताऊ की फ़ौज