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गुरुवार, 3 दिसंबर 2009

" हट जा ताऊ पाच्छे नै दारू पिवण दे जी भर के नै"

यो ले  भाई,बात या थी के जित भी जाओ उत ताऊओ की ही चर्चा हो री सै,  मन्ने भी सोच्या साँझ का टैम सै जरा थोड़ी देर कनाट प्लेस के चक्कर काट आऊं, रीगल-रिवोली कने थोड़ी देर आंख भी सेक ल्यांगे और एकाध ओल्ड मंक का अद्धा भी ले ल्यांगे, आज जाड़ा घणा हो रह्या सै, मैं पंहुचा ही था तो म्हारे फौजी ताऊ मनफूल सिंग  सामने  दिक्खे  में तो बावला हो गया जी , अरे भाई  ताऊ जी अडे पहले ही पहुच गये, मन्ने तो बताया भी कोणी, और यो भी उरे ही सुवाद ले रहया सै. ताऊ बेटे का नाता म्हारे हरियाणे में बड़ा ही मशहूर  होया करे। बाज्जे वालों ने गाणा भी बना दिया - "हट जा ताऊ पाच्छे नै नाचण  दे जी भरके नै" तो बात या सै के पुरे हरियाणा के छोरे इस ताऊ तै ही दुखी हो रहे सै । ना खान दे ,ना पीने दे , ना नाचण दे, किसी णा किसी रूप मैं बैरी हर जगां पा जा सै, अपणा लट्ठ हमेशा ही ताणे राखे सै बैरी, जद ही मै कहूँ सूं के  ताऊ इब जमाना बदल गया, छोरों के साथ नाच्चो कुद्दो मौज मनाओ। ज्यादा परेसान करोगे तो चाँद मोहम्मद ने रास्ता तो काढ ही दिया सै। आगले का बाप्पू और दुखी सै । इसी फिजा लाया के पुरे खानदान की ही फिजा ख़राब करके धर दी । तो दुनिया के जितने भी बड़े-बड़े ताऊ जी सै, ईणने  यो ही सलाह सै के इब मान भी जाओ । और छोरों ने नाचण  दयो, कूदण दयो, मजे लेण दयो ,इब छोरों ने नया गाना और बना लिया " हट जा ताऊ पाच्छे नै दारू पिवण दे जी भर के नै" 
एक बात तो में बतानी भूल ही रह्या था। कुछ दिन पहले मै ट्रेन में आ रह्या था । मेरे सामने वाली बर्थ पे दो लुगाई थी और एक छोट्टा बच्चा था, दिल्ली तै गाड्डी चाल्ली । आगरा में ओर पेसेंजर चढ़े , उनकी सीट पे जगां देख के बैठ गे । बोल्ले आगले टेसण  तक जाणा सै । फेर आगले टेसण  पे दूसरी सवारी भी चढ़ गी ,उनने भी आगले टेसण तक जाणा था। जब आगले टेसण  पे सीट  खाली हुयी तो में बोल्यो "माता जी आप अडे सो जाओ नही तो फेर कोई और बैठ जा गा । तो वा बोली " तन्ने मैं  माताजी लाग्गू सूं ? तेरे ते कोई एक दो साल मेरी उम्र छोटी ही होगी। " मेरे तो जवाब सुण सांप सुंघ गया, काटो तो खून नही। मेरे ते रह्या नही गया "क्यूँ के बोले बिना रह नही सकता हरियाणे की इज्जत का सवाल था"  तो मन्ने पूछा "ये छोटा बच्चा आपका पोता है के दोहिता? वा बोल्ली  "दोहिता", मैं बोल्या "फेर तो हकीकत में मेरी उम्र आपसे बड़ी है। इससे बड़ा तो मेरा पडपोता सै ।" फेर वा बोल्ली " पण इतनी उम्र तो नहीं लगती आपकी" मै बोल्या " मैं जवान रहने वाली गोलियां खाता हूँ, तो बोल्ली " कहाँ मिलती है? मै बोल्या " के तूं भी लेगी", वो बोल्ली " ना ऐसे ही पूछ रही थी. तो मै बोल्या " फेर क्यूँ फालतू बावली हो रही सै," जिस गांव नहीं जाणा उसका रास्ता क्यूँ पूछना, नूये मजे ले,
तो ताऊ जी बड़ा खराब जमाना आ गया सै। जीजी  कह दो जीजा जी मुफ्त में लो, भुआ कह दो फूफा साथ में मुफ्त में लो और अगर फूफा हो ही गया तो सारे रास्ते फेर उसकी सेवा करो, उसका हुक्का-चिलम भर के लाओ
आख़िर में "लुहार" नै उसका यो ही तोड़ पाया के "मैडम" बोलो और आनन्द में रहो।


(और भाई कोई सलाह देनी तो मेरा घर का किवाड़ २४ घंटे खुल्ला सै। क्यूँ के बंद किवाड़ तो बाल-बच्चेदारों के ही मिलगे देश की जनसँख्या जो बढाणी से )



आपका 
रमलू लुहार

सोमवार, 5 अक्टूबर 2009

फौजी ताऊ के"लालटेन लाइट"डिनर में उड़न तश्तरी

आज ताऊ नै टुब वेळ पे उड़न तश्तरी की आण की ख़ुशी में पार्ट्री रखी सै, टुब वेळ पे पार्टी रखने कारण यो सै के एक तो गाम ते दूर सै, ओर कोई सा बुढा टल्ली भी होयगा तो भी कोई समस्या कोणी भले ही खेतों में रात भर भाषण दिए जावे, इलेक्शन का टैम से कोई नै मना भी नहीं कर सकते,रमलू कैंटीन ते ताऊ का महीने का कोटा लेने गया सै, रात का ८ बजे का टैम सै पार्टी का ताऊ के चमचे तेयारी करण लग रहे सै. रसोइए का काम बनवारी नै संभाल रख्या सै, पत्थरों का चूल्हा बना के हांडी चढा रक्खी सै,उसमे तरी बना रहया सै ओर मुर्ग मुस्सलम  की डिश तेयार हो रही सै,ताऊ ने अपणे खास फौजी दोस्त कप्तान सिंग जाट नै भी बुला रख्या सै, ठीक ८ बजे उड़न तश्तरी की सवारी लेके ताऊ पहुच गया, टेबल तो थी कोणी "ऊंट का गाडा" के चारों तरफ कुर्सी लगा रखी थी उसके उपर दरी बिछा के बढ़िया सुन्दर गुलदस्ता लगा के बीच में लालटेन रखी थी मतबल ताऊ के गाम का "लालटेन डिनर" था, इतनी देर में रमलू भी आयटम लेके आ गया उसने पूछा बनवारी ते -क्यूँ सामान तेयार सै सब, बनवारी बोल्यो- के बताऊँ यार रमलू थोडा लेट सै, वो सुसरी मुर्गी खुल गयी तो भाज गई थी रामेषर दुबारा लेके आया सै बस १५ मिनट मै सब तेयार सै, तू चिंता ना कर जब तक पनीर लेजा मैंने बढ़िया बना दिए अपणा कार्यक्रम चालू करो, रमलू आयटम लेके डिनर टेबल पे पहुँच गया, देखते हैं के अपणे परमानद जी पहुच गे अपनी सेना लेके,उतरते बोले फौजी चिंता मत कर मै सामान साथ लाया सूं किसी छोरे नै भेज के गाड़ी में से उतरवाले,भाई आज तो सारी मण्डली ही बैठ गई पहला दौर चालू हुआ उड़न तस्तरी के नाम ते,बातचित चल रही थी, बीच मै शिम्भू बोल्या-ताऊ सुणया सै बिदेश मै आज कल एक सपेशल सवारी चल रही सै, जिसमे ना तेल लगता,ना उसका इंजन आवाज करे,ना उसने घोडे-गधे जैसे खिलाने की जरूरत, वो तो दाना ही चुगे सै,दो पैर की सै,और आदमी उस पे चढ़ के बाजार जा के सारे काम करके आ सके सै, मन्ने तो म्हारे गाम का वो नौबत सै ना वो कह था, फेर मै सोचु था कोई बिदेश ते आवे गा उस ते पूछूँगा, इब समीर भाई आ रहे सें तो सोच्या पूछ ही लूँ हो सके सै एकाध ऐसी सवारी इनने भी ले रखी हो, ताऊ बोल्या-हाँ भाई समीर बता के यो बात सच्ची सै, समीर बोले -हाँ ताऊ यो बात सच्ची सै के इस तरह का एक प्राणी तो हो सै पर उसका सवारी में काम लेते मन्ने देख्या नहीं, रमलू बोल्या-कोण का जानवर हो सै, समीर बोल्ले-उसने ताऊ "ईमू" कह सै यो आस्ट्रेलियन चिडिया सै, ओर दो पैर की हो सै दाना चुगे सै चले भी घणी सै ओर ६ से७ फुट तक की ऊँची हो सै पण इसका दिमाग छोटा हो सै,सिर्फ डेढ़ इंच का इसलिए यो जयादा सोच नही सकती ओर ज्यादा याद नहीं रख सकती इसलिए इसने जंगली पक्षी बोले सै,यो सवारी के काम नहीं आ सकती,पण इसमें ताकत घणी होया करे, वाह भाई बढ़िया बात बताई इससे तो फौज मै तो बहोत काम लिया जा सकता है-कप्तान सिंग बोल्या, रामेषर बोल्या -फौज मै दिमाग वाला के काम, जिसने अपना दिमाग लगाया ओर वो ही मार खाया,ताऊ बोल्या-सुसरे! तन्ने म्हारे में दिमाग कम लगे सै, फौजियां के कोटे की तो दारू पीवे हमेशा ओर हमने ही कम दिमाग बतावे, हम तन्ने बावली बूच लगे सै, दे रे रमलू इसकी गुद्दी पे-सुसरा आया सै चल के लम्बरदारी करण. परमानद जी ने विषय बदला ताऊ - यो बता आज तो तेरा यार कप्तान सिंग भी आ रहया सै दोनों की फौज में कटे किस तरह थी, कप्तान सिंग बोल्या-मनफूल सिंग तो था सप्लाई में ओर मै था कैंटीन इंचार्ज खूब छ्न्या करती म्हारी,दारू तो कदे खतम ही नहीं होती थी, फेर ड्यूटी भी म्हारी हेडक्वाटर में ही थी कोई समस्या नहीं थी,समीर बोल्या-तो ताऊ उस टैम आपने तनखा कितनी मिल्या करती,ताऊ बोल्या-जब भरती होया था तो चालीस रूपये तनखा मिल्या करती २ रुपये अपणे बीडी-बाडी के खर्चे के राख के ३८ रुपये घर बापू धोरे भिजवा दिया करता, बनवारी सोच्या के ताऊ के चार पैग लग लिए इब रंग मै आ गया वो पाकिस्तान की लडाई वाली बात पूछ ही लूँ, उसने ताऊ ते पूछ्या -ताऊ वो पाकिस्तान वाली लडाई की के बात थी? इतने मै कप्तान सिंग बोल्या -अरे पाकिस्तान की लडाई की बात- मनफूल सिंग बडा बहादर माणस सै यो तो लाहोर से सुसरा पकिस्तानियाँ कि भैंस भी खोल ल्याया था, शिम्भू कूद के पडा -अच्छा यो बात सै-तो ताऊ तन्ने पाकिस्तान मैं भी भैंस ही पाई ओर कुछ नहीं मिल्या लाने के लिए,-ताऊ बोल्या -यो बात आज ख़तम करो युद्ध की बात किसी ओर दिन सुनाउंगा, आज माफ़ करो, ल्याओ रे भाई खाना,लगाओ जल्दी,समीर भाई नै भी भूख लग रही होगी, ओर तुमने चाहिए तो पूरा कैरेट पड्या सै ले लियो,पण कल काम के लायक रहियो....................नहीं तो 

आपका

रमलू लुहार 

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2009

लुटेरों के चंगुल में मत फंस जाणा ओर अपने ताऊ को ही वोट देना-उड़न तश्तरी -फौजी ताऊ की सभा में

खुशखबरी-खुशखबरी-बनवारी मंच ते माइक में बोलणे लग रह्या सै-जो उड़न तश्तरी आज म्हारे बीच में आण वाली सै वो गुडगाँव इंटर नेशनल हवाई अड्डे तक पहुच गई सै, तम शांति ते बैठो, आज अपने समीर लाल जी की आम सभा सै, गाँधी जी ओर लाल बहादुर शास्त्री दोनों का जनम दिन सै बहोत ही सुथरा दिन सै,गाँधी जी देश को आजाद कराया अंग्रेजों को भगाया ओर शास्त्री जी नै पाकिस्तान का बैंड बजाया,दोनों महापुरुषों का हम आदर करे सै-बनवारी का भाषण चाल रहया सै,मै आपने जरा पब्लिक के तरफ ले चलूँ, पब्लिक एक दम खचा-खच भारी सै ,सकुल के मैदान में चारों तरफ लाइट ही लाइट जग मग करण लग रही सै,ताऊ के छोरों नै भी जोरदार इंतजाम कर दिया,इब तो ओर कोई नहीं कह सके के म्हारे गाम के छोरे नालायक सै, सारे कार्यकर्ता बिल्ला लगाये पब्लिक नै सँभालने लग रहे सै,ताऊ नै पूरी छोले -चाय-पकोडे की स्टाल सकुल कने मंदर आले पीपल के नीचे लगवा दी,पाणी के टैंकर खड़े कर दिए और पब्लिक चाय नसते का मजा ले रही सै, गांव की बूढी लुगाइयां अपने पीढे घर से ला के सजा के बैठी सै, संतरा ताई नै बोल्ली-ऍ जी यो उड़न तश्तरी किसी हो सै,ताई बोल्ली-ये बीरा मन्ने के पता ये छोरे कह रहे थे भोत बड़ी हो सै ओर नु घुमती आवे सै, पहले आसमान मै गोल-गोल चक्कर कटेगी फेर सकुल के मैदान  मै उतरेगी, चन्द्कोर बोल्ली-ताई कदे वो तो नहीं सै जो कई साल पहले उतरया था,के बोल्ले थे "सकाईलेब", ना-ना वो कोणी, तन्ने ताऊ इतना बावला लगे सै?वो तो सारे काम सोच समझ के करे सै,यो के हुयी कदे दो चार घूंट लगा ले आखर फौजी जो सै, यो चर्चा ओरतों के बीच में चल रही सै, सब अपने -अपने तरीके सै उड़न तश्तरी के बारे में अंदाजा लगा रहे सै, के कैसी होगी,?इधर ताऊ,रमलू,परमानद जी ओर भी घणे सारे लोग हवाई अड्डे पहुचगे उड़न तस्तरी का सवागत करण खातिर,हवाई अड्डे पर समीर लाल जी पहुचे तो सबने उनका स्वागत किया,ताऊ नै भी अपना आशीर्वाद दिया ओर बोल्या-भाई तुने तो बहुत बढ़िया काम कर दिया जो आ गया,सारे हवाई अड्डे से गाम में सभा स्थल पे पहुचे बनवारी का भाषण चालू  ही था, सबने समीर लाल उर्फ़ उड़न तश्तरी का सुवागत किया, रमलू मंच का संचालन करने लगा-भाइयों ओर बहनों मेरे बुजुर्गों बाहर गाम ते आये हुए साथियों इब म्हारे बीच कनाडा से भाई समीर लाल जी आ चुके सै, लोग इनने ही उड़न तश्तरी के नाम ते जाने सै,इब मै आप लोगो का टैम ख़राब ना करके सीधा माइक समीर लाल जी ने  सौंपता हूँ, फार्मेलिटी में ज्यादा टैम ख़राब होता है, आप इनने ही सुनो, यो बोल  के रमलू नै माइक समीर लाल के हाथ  में सौंप दिया,
समीर लाल नै बोलना चालू करया- मेरे भाईयों ओर बहनों ताऊ-ताई,रमलू, परमानन्द जी ओर गाम के लोगो मै भी आपके बीच का ही छोरा सूं ,देश ते बाहर काम करण चला गया ओर उत ही बस गया,मै तो आप लोगो ते मिलने के लिए आया सूं, ताऊ का इलेक्शन तो एक बहाना सै,ताऊ जी इलेक्शन में खडे हुए बड़ी अच्छी बात है,आज देश नै ऐसा नेता चाहिए जो सच्चा हो इमानदार हो गरीब आदमी की मज़बूरी ओर उसकी भूख नै समझ सके,जो कारीगर की दुःख तकलीफ नै समझ सके, आज म्हारे देश के दो महापुरुषों का जनम दिन है,एक तो बापू,दूसरा शास्त्री जी,दोनों ही ईमानदारी ओर देश भक्ति की एक बहुत बडी मिशाल थे,दोनों ने ही अपना जीवन सादगी के साथ बिताया,गाँधी जी नै तो भारतवासियों का दर्द ओर गरीबी को महसूस करने के लिए लंगोटी ही पहननी चालू कर दी थी, ओर वे कहते थे की भारत की आत्मा तो गावं में ही बसती है,गावं का विकास होगा तो सारे देश का विकास हो जायेगा, ओर कैसे होगा ये बात उन्होंने गोली लगने के एक दिन पहले ही लिख दी थी,आज म्हारे देश में अमीर ओर गरीब की खाई बढती जा रही सै,अमीर ओर अमीर होता जा रह्या सै, गरीब ओर गरीब होता जा रह्या सै,मरण तो म्हारे जैसे लोगों का ही हो रह्या सै,आज भी देश में कई करोड़ ऐसे सै जिनने खाने को दाना नही मिल पाता, देश नै आजाद हुए ६३ साल हो चुके पण ये नेता अपना ही घर भरने में लग रहे सै,गरीब की तो कोई चिंता ही नही सै,सरकार में इसे -इसे मंत्री सै जो एक दिन रहने के लिए एक लाख रुपया खर्च कर रहे सै ओर यहाँ गरीब की झोपडी में दिया जलाने के लीये भी तेल कोणी,बड़े शरम की बात सै, जो हवाई जहाज में जाये सै वो भी इनने भेड़ बकरी ही दिखे सै,म्हारे जैसे सड़क पे चलने वाले तो इनने दीखते ही कोणी होंगे,ओर ये म्हारे देश के कर्णधार सै,यो देश नै किसा चलावेंगे? आज जरुरत सै देश ने गाँधी जी जैसी सोच के आदमी की आज जरुरत सै देश ने लाल बहादुर शास्त्री जैसी सोच के आदमी की,जो गरीबों का दुःख दर्द समझ सके,भाईयों मै कोई नेता तो नही सूं पण जो मेरे मन में आया आपने कह दिया,अपने रिटायर हवालदार फौजी ताऊ मनफूल सिंग जी सच्चे-इमानदार ओर मेहनतकश मनमौजी किसम के आदमी सै,इनने मेरे ते ज्यादा तो आप ही जानते हो, मै तो इतनी कहने आया हूँ इनको कप प्लेट छाप पे बटन दबा के जिताओ, ये आपको खूब सेवा करेंगे,सेवा करना तो इनका पेशा ही सै पहले तो फौज में देश की सेवा करी फेर रिटायर होके गावं की सेवा कर रहे सै,इब आप जीता दोगे तो पुरे हलके की सेवा करेंगे,मेरी तो आपसे यो ही विनती सै, बड़े बड़े पैसे वाले लोग ताऊ के सामने खड़े सै वो आपने बहकाने की कोशिश करेंगे वोट खरीदने की कोशिश करेंगे पण आप लोग इन लोकतंत्र के लुटेरों के चंगुल में मत फंस जाणा ओर अपने ताऊ को ही वोट देना,आप सब नै धन्यवाद जो आपने इतना प्यार ओर आशीर्वाद मुझे दिया,मै आपका आभारी सूं फेर मिलेंगे, एक बर ताऊ नै जिताओ,आप सबने मेरी राम-राम.
(कल ताऊ नै उड़न तश्तरी के सुवागत मै अपने टुबबेल पे एक पार्टी रखी सै,उसका आँखों देखा हाल आपको कल सुनावेंगे,सबको राम-राम)

सोमवार, 21 सितंबर 2009

पावला जी को पहले जन्मदिन की बधाई,रिटायर फौजी ताऊ मनफूल सिंग की तरफ से


ताऊ बोल्या-अरे सुणियो रे लोगो आज सबके जन्म दिन की की खबर रखने
वाले बी.एस.पावला जी का जनम दिन सै,तमने पता हैं के नहीं
रमलू बोल्या- ताऊ आज तो मन्ने टाइम ही नहीं मिला इन्टरनेट पे जाण का
ताऊ बोल्या-अरे भाई सूबे ते ही पावला जी ने बधाई देने लग रहे हैं लोग चलो हम भी उनको शुभकामनायें दे दे
रमलू बोल्या -ताऊ पावला जी कितने साल के हो गए कुछ पता हैं आपको
ताऊ-बोल्या-जब ते तू किसी को जाणे,उसका जन्म दिन तो तब से समझना चाहिए मेरी तो कल ही बात हुयी थी पावला जी से रात को यो समझ ले कोई १४-१५ घंटे हुए होंगे,इसलिए में समझू सूं के पावला जी कोई आज साँझ तक एक दिन के होही जायेंगे कोई ज्यादा उम्र नही हैं,इब हम तो पके फल हो गए म्हारी भी उम्र लाग जाये पावला जी को,

ताऊ ओर रमलू लुहार ओर पुरे गाम की तरफ से पावला जी को पहले जन्म दिन पे हार्दिक बधाई
रमलू बोल्या-ताऊ फेर आज साँझ नै पार्टी होगी के नहीं,ढाबे वाली?
ताऊ बोल्या-अरे बावला इब पार्टी की बात करे से ,हम हरियाणा में ओर पावला जी भिलाई में
फेर पार्टी किस तरह होगी?
रमलू बोल्या - ताऊ न्यू कर ले पार्टी हम आज मना लेते हैं हरियाणा में ओर जब भिलाई जायेंगे तो पार्टी का बिल पावला जी दे देंगे के भाई तेरे पहले जन्म दिन  की खुसी मनाई थी उसका बिल हैं
ताऊ बोल्या-तू ठीक बोल्या, नु ए कर ले,साँझ ने जब तक बोतल ना खुलेगी तो फेर किसा जन्म दिन,अरे भाई अस्सी ओर तुस्सी नहीं पैग मारे तो मजा किस तरह आवेगा. 
रमलू बोल्या-नहीं ताऊ जन्म दिन जोर शोर से मानेगा तू चिंता मत कर मै इब्बे केंटिन ते बोतल ले के आऊं
ताऊ ओर रमलू लुहार ओर पुरे गाम की तरफ से पावला जी को पहले जन्म दिन पे हार्दिक बधाई वे शतायु हो ताऊ नै भी अपनी उम्र जोड़ दी हैं,मिला के गिन लियो,
खूब जमेगी मिलके, जब बैठेंगे दो दीवाने जमके 

आपका 
रमलू लुहार





बुधवार, 16 सितंबर 2009

मैडल वाला मुक्का जणू इसने ही मारया हैं-ताऊ फौजी मनफूल सिंग की चौपाल

ताऊ के घर के आगे नीम का पेड़ सै,आज साँझ नै अपनी चौपाल फेर जमने लग गई,लगभग सारे लिए पर ताऊ नही आया,सारे ताऊ का इंतजार कर रहे थे ,
रमलू बोल्या -"कल दोपहरे में ताऊ कह गया था के सारे बुड्ढों को बता देना के कल हिन्दी दिवस मान्या गया है सबको अपनी बोली में ही हिन्दी बोलना है,
रामेसर बोल्या-यो ताऊ हिन्दी दिवस कब मना गया हमने तो पता ही नही चाला,
बनवारी बोल्या-अपने हिंदुस्तान हिन्दी दिवस यूँ ही मनाया जाता है, के किसी को पता भी ना चाले और हिन्दी दिवस भी मन जा,
भाई क्यूँ हिन्दी के पीछे पड़ रहे हो, जब दिवस मन गया तो मन गया जब अपने ताऊ नै कै ही दिया सै तो मान भी लो और सारे हिन्दी बोलो,रामधन बोल्या
इतने में ताऊ भी आ गया
शिम्भू बोल्या-ताऊ राम-राम,
ताऊ बोल्या राम-राम,
भाई आज आपने देर हो गयी -रमलू बोल्या
अरे भाई आज म्हारे गाम में गुल्ली डंडा संग के अध्यक्ष का चुनाव था,
बड़ा हंगामा हुआ जैसे लाडू बाँट रहे हों,ताऊ बोल्या
रमलू बोल्या " तो ताऊ आपने भी परधानी का फार्म भरया था के ?
भरया तो था रे भाई, लेकिन हमने तो कुण जितने दे था. वहां तो बड़े बड़े आदमी आये थे लम्बी लम्भी गाड़ियों में बैठ के,
तो ताऊ अपना गुल्ली डंडा के सारे देश में इतन प्रसिद्ध हो गया जो इतने बड़े बड़े आदमी आये थे प्रधानी करने के लिए. रमलू बोल्या,
ताऊ बोल्या-अरे भाई पहले तो हुक्का भरो,अरे बनवारी चिलम सुलगा के नहीं लाया, सुसरे
आज ठाली बैठा हैं,
बनवारी बोल्या-नहीं ताऊ आपका इंतजाम तो मै आपके आने के पहले ही तैयार रखता हूँ, यो ले,
ताऊ नै एक सुट्टा मार के लम्बी सास भरी और बोल्या - अरे भाई यो परधानी इलेक्शन इतना बड़ा हो जायेगा मन्ने पता नहीं था, गाम में जैसे मेला लाग गया हो, सकुल के पास एक ने हलवाई बैठा दिया था,वो पूरी छोले मुफ्त में खिला रहा था,एक कंडीडेट ने जलेबी और दूध की ही दुकान लगा दी थी,अपने मुफ्त में खाए जाओ,
मन्ने हलवाई ते पूछ्या- छोरे तू ये बता तेरे को यहाँ ये मुफ्त की दुकान किसने लगवाई हैं?
हलवाई बोल्या - वो अपना सेठ हैं न बनिया रोडूमल उसने लगवाया हैं, वो भी खडा हैं न परधानी के लिए सबको मुफ्त में देशी घी की जलेभियाँ और इमरती खिला रहा सै,
अरे भाई इसकी बाम्बे में फैक्टरी भी सै ना-ताऊ बोल्या
हलवाई बोल्या - ताऊ इसकी मोबाइल की फेक्ट्री सै, सबने एक -एक मोबाइल भी देगा फ्री में,
तो भाई बता रमलू सारी जिन्दगी बचपने में गुल्ली डंडा हम खेले हमारे बाप दादा खेले और म्हारे बच्चे भी खेल रहे सै,ताऊ बोल्या
ताऊ तो अपने ज़माने में गुल्ली डंडे का एक लम्बर का खिलाडी था तुने तो परधान बनना जरूरी था?तू परधानी करता तो कम ते कम गुल्ली डंडा ओलम्पिक में शामिल तो हो जाता और गोल्ड मैडल अपने देश नै ही मिलता, रामेषर बोल्या,
ताऊ एक लम्बी साँस खीच के बोल्या, अरे भाई देख यो काम तेरे मेरे बस का नहीं हैं, आज जिसके पास पैसे हैं रुतबा हैं दिल्ली की गलियां जिसने जाने सै ये काम उसका हैं, सेन्ट्रल गोरमेंट नै खेल का अलग फंड बना रख्या सै, उसे सै ये खेल संघ नै पैसे देके चलावे सै, जब बिदेशां में कोई बड़ा टूर्नामेंट होसे तो ये हवाई जहाज से जा सै, अपनी लुगाई नै भी साथ ले जा सै चल घूम के आ जाना कहके,
रमलू बोल्या- तो यो बात सै ताऊ, तो अपने बच्चों को भी ले जाते होंगे?
ताऊ बोल्या- तू बच्चों की बात करता हैं ये मालिश करने वाले भी साथ में जाते हैं,नाम खिलाडियों का होता हैं और मालिश अपनी करवाते हैं, जब कोई खिलाडी अपनी मेहनत और काबिलियत ते जीत जाता हैं तो उसके साथ अपनी फोटो ऐसे खिचवाते हैं जैसे यो मैडल इसने ही लड़ के जित्या सै,
बनवारी बोल्या-हाँ मन्ने देख्या था जब अपना बिजेंद्र मैडल जिताया तो सारे फोटू खिचाने ऐसे कूदे के जणू मैडल वाला मुक्का इन्होने ही मारा हैं,
ताऊ बोल्या - के जमाना आ गया, जिसने कभी हाकी देखि नहीं वो हाकी संघ का प्रधान, जिसने कदे तीर धनुष नहीं देखा वो तीरंदाजी का प्रधान जैसे पुरे महाभारत की लडाई में गुरुद्रोन का परथम शिष्य वो ही था,जिसने कदे फुटबाल के एक भी लात नहीं मारी वो फूटबाल संघ का प्रधान,बना फिर रहा हैं,
बनवारी बोल्या- बताओ फेर देश को मैडल किस तरह मिलेगा? बड़े शर्म की बात सै सवा करोड़ की जनता में एक सोने मैडल लिया वो भी अपने दम पे लेके आया तो नाम रह गया नहीं तो नाक कटी की कटी पड़ी थी,
रमलू बोल्या-भाई यो सोचना देश की जनता का काम सै,आगे ऐसे आदमी चुन के भेजो जो जो म्हारे देश के खिलाडीयों के बारे में सोचे और खुद भी इन्टरनेशनल खिलाडी हो, उसका अनुभव ही हमें मैडल दिलाएगा,
ताऊ बोल्या-रमलू तुने सही बात कही ऐसा दिन हमको लाना ही पडेगा।नेताओं के लिए मेरी ये ही सलाह हैं की भाई तुम देश को चलाओ और खिलाडीयों को खेलने दो खेल संघ चलाने दो,चलो रे भाई दिया बत्ती का टैम हो गया सै,
रमलू बोल्या-ताऊ कल की पाकिस्तान की लडाई का किस्सा तो अधुरा ही रह गया,
ताऊ बोल्या-अरे मै अभी जिन्दा हूँ मरया कोणी फेर किसे दिन सुना देंगे,तुमने तो मन्ने इस लफडे में ही उलझा दिया ,चलो रे भाई सबने मेरी राम-राम

आपका

रमलू लुहार

सोमवार, 14 सितंबर 2009

ताऊ फौजी तन्ने दीखता कोणी ! मुच्छा वाला मर्द

आप सब नै रमलू का राम-राम। भाइयों आज तो मै दूध-धार का काम निपटा चुका। अब टाइम हो रहा है अपनी मण्डली धोरे जाण का.ताऊ आज भिवानी गया था, आ गया होगा,मै पहुँचा अपणे अड्डे ताऊ आली पोली पे , सारे फालतू के लोग वहां काम की बातें करते मिलेंगे, और उनका हेड आपणा ताऊ ,फेर के पूछना सबकीमोज नए टोपिक पे गरमा -गर्म बहस।
इतनी देर में ताऊ भी आ गया ।
ताऊ राम-राम ! बडा तावला आ गया ?
ताऊ बोल्या - अरे इसा कुण सा मै लंका में चला गया था। भिवानी ही तो गया था, कईr काम थे ,पहला तो मुरारी के छोरे ने वा के होया कर कलेक्टर बनाने वाले परीक्षा का फार्म भरना था, और आँख दिखानी थी।गुप्ता हस्पताल में ,
रामेसर बोल्या-फेर दिखा दी आपने ,
ताऊ- हाँ भाई दिखा दी ,डाकदर बोल्या "ताऊ दुवाई लेजा ,इब्बे कुछ नही बिगडा सै.दस-पन्द्र साल और चाल जागी।
बनवारी बोल्या-ताऊ किसा रह्या सफर,ठीक ठाक तो था ? इब बनवारी ने ताऊ के सफर की चिंता करी।
ताऊ बोल्या-अरे भाई सूबे जाके टिकट ली, घणी लम्बी लाइन थी, फेर मन्ने वो जुग्गे वाला छोरा सुद्धू दिख गया मै बोल्या रे बेटा एक टिकट मेरी भी ले दे .उसने मेरी टिकट ली। रेल में घणी भीड़ थी ,तले-ऊपर आदमी चढ़े पड़े थे। मन्ने तो भाई एक छोरे ने अपनी सीट दे दी।
मेरी सिट के सामने चार-पॉँच लुगाई भी बैठी थी उसमे ते एक लम्बी -तगडी थी ,उसने पहले तो मन्ने देख्या फेर झट घूँघट निकला, तो उसने बराबर आली लुगाई ने पूछ्या " ये बैरण इब क्यूँ घूँघट काढ्या ? वो बोल्ली-" ये भोलू की माँ !!!!! तन्ने दीखता कोणी ! मुच्छा वाला मर्द तो इब्बे चढ्या सै गाड्डी में,पहले तो सारे मेरे जैसे ही बैठे थे।
रमलू बोल्या ताऊ इब भी तेरे मार्केट वेल्यु बनी हुयी सै. जरा संभल के चल्या कर।
ताऊ-अरे इब आगे की सुण- इतने में टी टी आ गया "चलो भाई टिकट दिखाओ"
मेरे सामने सिट पे खरक बोंद वाला गोवर्धन बैठा था,उसके साथ उसके बेटी -जमाई,उसकी लुगाई और दो जवान-जवान छोरे थे। टी टी ने टिकट दिखान की कही तो उसने पञ्च टिकट निकाली.
टी टी ने कह्या "माणस छह और टिकट पांच, तो गोवर्धन बोल्या "साब ये चार टिकट तो हमारे चारो बड़ों के और ये एक टिकट इन दोना टाबरों (बच्चों) की आधी - आधी करके
टी टी बोल्या " तू जिनको बच्चे कह रहा है ये ब्याह लायक हो गये हैं।
मेरी भी पुराणी खुंदक थी गोवर्धन के साथ मैं बोल्या" टी टी साब जब आपको ये छोरे बयाह के लायक दिख रहे हैं तो कर दे इनका टीका।"
टी टी बोला "अभी करता हूँ टीका फौजी आप के सामणे.यो कहके टी टी ने अपनी रसीद निकाली और पांच-पॉँच सौ के दंड की पर्ची फाड़ दी.
मैं बोल्या " रे गोवर्धन तेरे दोनों छोरों का टीका तो करवा दिया बरात के न्युते ने भूल मत जाइये.
चलो रे भाई इब टैम अपने - अपने घर चालो, नहीं तो थारी भी पर्ची कटेगी घर जा के. यो कह के ताऊ हुक्के का दो सुट्टा मार के चाल पड़ा घर नै.

मित्रों आपको कैसी लगी ताऊ की यात्रा,अपनी जीवंत उपस्थिति टिप्पणी के माध्यम से दे .
कल हमारा ताऊ पाकिस्तान की लडाई के पुराणी यादो में ले जाएगा.इंतजार करें................

आपका
रमलू लुहार

(फोटो गूगल से साभार)

 

फ़ौजी ताऊ की फ़ौज