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रविवार, 20 सितंबर 2009

फौजी ताऊ मनफूल सिंग का सिलेक्शन,ताऊ लडेगा इब हरियाणे इलेक्शन


आप सब ने रमलू की राम-राम ,
आज ताऊ की चौपाल साँझ नै फेर जम गयी आज ताऊ तो घर पे ही मोजूद था,दो दिन की गैरहाजिरी ताऊ की हमने लगा रक्खी थी,
शिम्भू नै पूछा-ताऊ आप कहाँ चले गए थे, पुरे दो दिन गायब थे,
ताऊ बोल्या-भाई शिम्भू बात यूँ हैं के वो अपना सै न गुडगांव आला परमानद जांगडा,उसने भाई नई पार्टी बनाई सै,इब इलेक्शन आरे सें न,उसने बुलाया था,पूछे था,के इलेक्शन लड़ना हैं के?
फेर आपने के कह्या? रामेषर बोल्या ,
ताऊ बोल्या-भाई बात यो हैं के पहले तो मेरे मन में इलेक्शन लड़ने की की कोई बात नहीं थी,पण परमानन्द का ब्योहार,काबिलियत पार्टी के उद्देश्य भी मेरे बिचारों से मिलते हैं, और गरीबों की बात भी समझे सै यो समझ के मन्ने इलेक्शन लड़ने का मन बना लिया,
पण ताऊ यो तो बता पार्टी का नाम के सै.-बनवारी बोल्या
ताऊ-भाई पार्टी का नाम से रास्ट्रीय सहारा पार्टी
सुखराम बोल्या-घणा सुथरा नाम सै ताऊ ,गरीबों ,मजदूरों,कामगारों,किसानो नै सहारा तो चाहिए,और या पार्टी एक दिन जरुर सहारा बनेगी,ताऊ यो तू  पहली बर कोई दिमाग आला काम करके आया सै,
ताऊ भोत बढ़िया सोच्या, हमने एक दिन यो भी काम करना था, यो तो आप शास्त्री जी के सपने नै साकार कर रहे सो, आप म्हारे हिंदुस्तान मै पहले आदमी होगे जो एक साथ किसान+जवान+नेता का रोल करोगे, वाह-वाह मौज होयगी,फेर ताऊ हमने के करना पडेगा, रमलू बोल्या
ताऊ बोल्या -रमलू इस इलेक्शन की पूरी जिम्मेदारी लिखा पढ़ी की तन्ने ही संभालनी पड़ेगी ,आज कल चुनाव लड़ना कोई बच्चों का खेल कोणी,कोई पहले की तरह कोणी के फारम भराया ओर खड़े होगे,आज कल तो चुनाव आयोग बहुत कड़े रूल निकल दिए ,मुतन का भी हिसाब देना पडेगा,
बनवारी बोल्या-नु हो गया ताऊ ,हमने तो पता  ही न था,
ताऊ बोल्या -भईयों पार्टी नै मेरी टिकट भी डिक्लेर कर दी सै ,काल के अखबारां में आज्या गा, पण तैयार इब ते ही करनी पड़ेगी,
सारे एक सूर में बोले-हम तैयार हैं ताऊ ,तू जो कहेगा सब हाजिर सै,तू हुकुम कर ,तेरे समर्थम में पूरा गाम खडा सै,हम अपने गम की इज्जत ख़राब थोड़े होने देंगे,जी जान लगा देंगे,यो समझ ले एक कुरुक्षेत्र की लडाई ओर लड़ ली
ताऊ भी राजी हो गया के अपने सारे साथी तैयार सै,
ताऊ बोल्या-तो थम सुन लो,परसुं फारम भरना हैं उसकी तयारी करनी पड़ेगी,
रामेषर बोल्या-ताऊ तन्ने ताई ते पूछ ली इलेक्शन लड़ने की ,मंजूरी ले ली, नहीं तो फेर झाडू ले के मिनी सचिवालय में तेरा जुलुस काढेगी,तेरी तो आरती होगी ओर थोडा भोत प्रसाद हमने भी दिल्वावेगा .
ताऊ बोल्या -रे मन्ने उस ते पूछ लिया से ,उसकी मंजूरी हो गयी सै, जब ही मन्ने थम ते कह्या सै, वो तो अपनी पूरी महिला मण्डली ले के तैयार सै,उसकी राधा स्वामी भजन मण्डली अपने इब कामआवेगी,
शिम्भी बोल्या- तो ताऊ फेर इलेक्शन की तयारी चालू करते हैं, अभी से,
अभी सै ,बावली बूच अभी से किस तरह चालू करेगा ,इसके लिए अपने आदमियों की मीटिंग बुला के पूरी पलानिग करनी पड़ेगी, रमलू नै सलाह दी
शिम्भू बोल्या-अरे रमलू मै नु कहे था के एक-एक- घूंट मार  लेते तो तयारी चालू हो जाती, भाई बिना दवा-
दारु के किसा इलेक्शन,
अरे शर्म कर रे बूढे,गांव बस्या ही नहीं डकैत पहले ही आ गए, रामेषर बोल्या,
ताऊ सबकी बात सुणे था चुपचाप,पुराना फौजी आदमी,नियत डोल ही गयी
ताऊ बोल्या-चालो यार इलेक्शन तो लड़ना ही सै, शिम्भू भी अपना ही आदमी सै, उसका मन मै नहीं मार सकता चालो एक-एक क्यूँ  दो-दो घूंट हो जाये, पर कल सबेरे बैठ के सारा प्रोगराम तय करना सै,ओर शाम नै यहीं पे आके पूरी तयारी का जायजा लेना सै,कड़े कोई कमी रह जाये उसने भी पूरी करनी सै,
चलो रे भाई ठेके पे ,थारी ताई नै बस पता नहीं चलना चाहिए,बाकी सब ठीक सै,
नु कहके सारे इलेक्शन की तयारी करने चल पड़े,

आपका
रमलू लुहार

(फोटो गूगल से साभार)

गुरुवार, 10 सितंबर 2009

ताऊ अस्पताल में

कल ताऊ पेंशन लेन गया था और आयके दारू के ठेके पे बैठ गया लुन्गाडा के साथ,ताई मनभरी उसने ढूंडती फिरे थी। ताऊ उसने सामने ठेके बठ्या दिख गया फेर के पूछना था। ताई ने उसकी रेल बना दी। किसी तरियां ताऊ घर पूंचा,
ताई ने उसकी चंगी खातिर दारी करी ।
कोई रात के ११ बजे थे ,ताऊ के रोला (चिल्लाना) की आवाज आई ,ताऊ बोल्ले कोई बचाओ रे , मर गया ,मैं तो मर गया, सारे मुहल्ले ने सर पे धर लिया ।
ताई भाजी भाजी मेरे धोरे आई "चाल रे भाई रमलू तेरे ताऊ के पता नही के हो गया। वो रोला घालन लाग रह्या सै.में तावला उठ के चाल पड्या। ताई बोली भाई डाकदर नै जल्दी बुला के ला.म्हारे गाम में एक आर.एम्.पी डाकदर रह्या करता। मै उसने बुला के लाया देखते डाकदर बोल्या - ताऊ की बीमारी तो मेरे समझ में नही आती आपको ये पेशेंट रोहतक ले जाना पडेगा। इसके पेट में दर्द है, मै दर्द की गोली दे देता हूँ। दर्द कुछ कम हो जाएगा।
रात के १२/३० हो गए थे, में भाज के गाड़ी ढूंढ़ने लगा ,मणि राम के धोरे एक जुगाड़ पा गया ,हम रात नै ताऊ नै जुगाड़ में गेर के रोहतक पी.गी.आई लेके गए .सुबेरे-सुबेरे हमने जुगाड़ आपात कालीन चिकित्सा के बोर्ड के सामने लगाया , स्टेचर लेके दो धोले कपड़े आले आए ,वे ताऊ ने उसमे गेर के भीतर वार्ड में लेगे, आगे के होया वो सुन ल्यो
एक कोट पहरे डाकदर आया आते ही ताऊ ते बोल्या
डाकदर- ताऊ मुंह खोल
ताऊ- डाकदर के मुंह में बड़ के बीमारी देखेगा।
डाकदर- ताऊ यो बता तेरे तकलीफ के सै।
ताऊ - तूं ऐ बता
डाकदर ताऊ के वार्तालाप ते परेशान हो गया। उसने पेड पे ताऊ की जाँच लिख दी
डाकदर- मेने ये जाँच लिख दी है पहले पथोलोजी में खून पेशाब की जाँच करवा के लेके आओ
हम ताऊ नै पेथोलोजी में लेके गए वहां एक सोणी सी नर्स थी ।
ताऊ बोल्या - यार रामलू बड़ी आच्छी जगह लेके आया,कुछ खुसबू सी आ रही सै।
नर्स सारी बात सुने थी । वो बोलली - डट जा बूढे तेरे सारी खुसबू तो मै इब्बे काढू सूं
उसने एक बड़ा सुइया काढा और ताऊ के हाथ की नस से निकालने लगी, ताऊ चिल्लाया -के सारा ही खून निकलेगी। राम-राम करके ताऊ ने खून दिया ,
हम उसने लेके फेर वर्ड में आ गये, डाकदर साहब आए, बोल्ले -ताऊ के पेट में घनी प्रोबलम सै, इसकी इंडोस्कोपी भी करनी पड़ेगी। इसका हिमोग्लोबिन भी कम सै खून भी चढाना पड़ेगा। खून की व्यवस्था करो, हमने पूछ्या -डाकदर साब ताऊ के बीमारी के सै। डाकदर साब बोले जरा मै ताऊ ते ही बात कर लूँ।
डाकदर- हाँ ताऊ ! के दारू पीते हो,
ताऊ- कदे- कदे,
डाकदर- कितने साल से पी रहे हो
ताऊ- पहले फौज में पीते थे इब भी पी लेते है।
मै बोल्या डाकदर साब बात यो है। के ताऊ ने शोले फिलम देखी थी ,तभी से अपने आप को बीरू समझ लिया ये समझ लो जी "होश सँभालते ही पैरों पे खड़े हो लिए।
ताऊ बिरच गया। तमने शराबी ही समझ लिया?
हमने ताऊ नै मनाया।
एक नर्स खून की बोतल लेके आई , खून चढाने के लिए। ताऊ लंबा सुइया देख के डर गया
ताऊ- ये सुइया किसके लगावेगी,
मै बोल्या-आपके
ताऊ -इस खून की बोतल का के करेगी ।
मै बोल्या -आपके नस में सुइया लगा के चढावेगी,
ताऊ-बिना चढाये काम नही चलेगा? अरे भाई रमलू एक काम कर यो खून की थैली मन्ने फाड़ के ही पिला दे , इस तरियां भी पेट में जानी है। और उस तरियां भी पेट में जानी है पण यो सुइया मै कोणी लगवाता,
मेने ताऊ को भतेरा समझाया पण वो उत मान्या ही कोणी
तब तक डाकदर आ गया भाई ताऊ ने ले चलो इंडोस्कोपी करनी सै
ताऊ- यो के हो सै
डाकदर - इब चाल के ही देख लिए,आगे समझ में आ जा गा
कोम्पौडर आके ताऊ नै भीतर लेगे। भीतर जा के ताऊ नै बड़ी बड़ी मशीन देखी और जोर ताई चिल्लाया
मन्ने कड़े लिआए , आपरेशन कोणी कराना.डाकदर बोल्या ताऊ आपरेशन कोणी सिर्फ़ तेरे बिमारी चेक करनी है।
ताऊ को बेड पे लिटा के डाकदर ने एक सांप जैसा सटील का निकला ।
ताऊ बोल्या - यो के सै,
डाकदर -इस ते तेरी बीमारी का चेक करना है।
ताऊ-किस तरियां करेगा
डाकदर-यो आपके पेट में डाल अन्दर बीमारी देखेंगे
ताऊ सोच्या के इब तो एक झूठ के कारन मरना ही पडेगा ताऊ ने जुगत लगे बचने की।
ताऊ- डाकदर साब मन्ने पेशाब आ रही सै। आपका यो जुगाड़ मुंह ते अन्दर जाएगा और निचे ते आपकी चादर और मेरी धोती दोनों ख़राब हो जायेगी
डाकदर -जाओ जल्दी बाथरूम करके आओ।
ताऊ बाथरूम के अन्दर गया और धोती के सहारे खिड़की ते उतर के भज लिया।
काफी देर तक ताऊ पेशाब करके नही आया तो डाकदर ने दरवाजा तुड़वाया। बाथरूम खाली पड़ा था
ताऊ गायब थे ,उसकी धोती खिड़की से लटक रही थी।
हम ताऊ ने ढूंढ़ने निकले ,ढूंढ़ते -ढूंढ़ते गाम तक पहुँच गए , तो देख्या के ताऊ दारू के ठेके पे ही बठ्या सै।
और देशी का अध्दा खोल राख्या सै। अरे ताऊ यो के करण लग रह्या सै,
ताऊ-अरे रमलू पेट की बीमारी ठीक करू सूं .पेट के कीडे इस्ते ही मरेंगे। मरने पेट के कीडे थे वो डाकदर मन्ने ही मारण की तयारी कर रह्या था।बीमारी वीमारी कुछ न थी वो तो ताई और मेरा झगडा हो गया था। आजा तू भी दो पैग मार ले। रात का जाग्या हुआ सै।

अब आगे ताऊ की कहानी चालु रहेगी .अभी हरियाने में चुनाव है। और ताऊ लड़ने की तयारी कर रहा है। रमलू ताऊ के साथ है। वो आपको पल-पल की ख़बर पहुंचाएगा ।

आपको ये पोस्ट कैसी लगी अपना आशीर्वाद देना ।
आपका
रमलू लुहार।

(फोटो गूगल से साभार)

सोमवार, 7 सितंबर 2009

ताऊ की चौपाल

भाइयों देशां में देश हरियाणा, जड़े दूध दही का खाना, या बात म्हारे हरियाणे की सै ,यहाँ का दूध दही,घी मशहूर है. तो यहाँ के ताऊ और फूफे भी पुरे जगत में मशहूर हैं ,इनपे हजारों किस्से सुनते आए हैं। ताऊ तो हरियाणे  के हरेक गाँव में सै। म्हारे भी गाँव में एक ताऊ से रिटायर फौजी मनफूल सिंग जी, उसकी कहानी भी सारे ताउओं जैसी है ,पण कुछ हट के सै म्हारा यो ताऊ,म्हारा गाँव जिला महेंद्र गढ़ में रामपुरा सै, ताऊ मनफूल सिंग म्हारे गांव का सबसे पद्या लिख्या और सुलझा हुआ माणस सै, पुरे गाम  मै इसकी ही चौधर चाले सै, गांव के सारे नौजवान छोरे भी जितने भी सें ताऊ के पिच्छे ही हांडते फिरे सै क्युके ताऊ नई कैंटीन ते राम जो मिले सै, बस ताऊ की चौपाल रोज साँझ नै उसके नोहरे के सामने लग ही जा सै, फेर दुनिया के सारे किस्से उरे ही पैदा हो जावे सै, ओबामा से लेके म्हारे गाम के सरपंच तक की सारी कहानी बन जावे सै. ताऊ म्हारा हर गरीब-अमीर, बूढे-जवान सबके सुख दुःख मैं काम आवे सै, इसका और म्हारी ताई का कदे-कदे लठ भी बाज जाये करे किसी बात नै लेके, फेर रिटायर फौजी सै तो फ़ौज के किस्से घणे ही सै. लोग अपणा टैम भी पास कर लें सै, ताऊ के किस्से सूं के,ताऊ का एक चमचा भी सै, जिसने मोड़े कह्या करें नै पट्ट शिष्य याने चेला, यो ताऊ के साथ हरदम मिलेगा, मान लो ताऊ म्हारे गाम का प्रधानमंत्री सै तो रमलू लुहार उसका प्रवक्ता सै, जो रमलू कह दे समझ लो ताऊ कह रह्या सै. आपने इस ब्लाग म्हारे ताऊ के किस्से सुनने मिलगे, ताऊ की चौपाल में. आपका स्वागत सै.


आपका
रमलू लुहार

मंगलवार, 18 अगस्त 2009

"हट जा ताऊ पाच्छे नै"











यो ले भाई,
इब हम भी आगये मैदान में,
बात या थी के जित भी जाओ उत ब्लॉग की ही चर्चा हो री सै, एक दिन में भी इंटर नेट पै था। तबी सामने ताऊ डाट काम का ब्लॉग आ गया। में तो बावला होगया जी , अरे भाई म्हारे ताऊ जी अडे पहले ही पहुच गये मन्ने तो बताया भी नही आप पहले ही पुन्च गे। ताऊ बेटे का रिश्ता म्हारे हरियाणे में बड़ा ही मधुर होया करे। बाज्जे वालों ने गाना भी बना दिया - "हट जा ताऊ पाच्छे नै नाचन दे जी भरके नै"
तो बात या है पुरे हरियाणा के छोरे इस ताऊ तै ही दुखी हो रहए हैं। ना खान दे ,ना पीने दे , ना नाचन दे, ताऊ इब जमाना बदल गया, छोरों के साथ नाच्चो कुद्दो मौज मनाओ। ज्यादा परेसान करोगे तो चाँद मोह्ह्म्म्द ने रास्ता तो बता ही दिया सै। बाप्पू दुखी कर राख्या सै । इसी फिजा लाया के पुरे खानदान की ही फिजा ख़राब करके धर दी । तो दुनिया के जितने भी बड़े-बड़े ताऊ जी सै, इनने यो ही सलाह सै के इब मान भी जाओ । और छोरों ने नाचन दयो।
एक बात तो में बतानी भूल ही रह्या था। कुछ दिन lट्रेन में आ रह्या था । मेरे सामने वाली बर्थ पे दो महिलाएं और एक छोट्टा बच्चा था, दिल्ली सै गाड्डी चालली। आगरा में और पेसेंजर चढ़े , उनकी सिट पे जगा देख के बैठ गये । बोलले आगले टेसन तक जाना है। फेर आगले टेसन पे दूसरी सवारी भी चढ़ गयी ,उन्हें भी आगले टेसन जाना था। जब आगले टेसन पे सिट खाली हुयी तो में बोल्यो "माता जी आप अडे सो जाओ नही तो फेर कोई और बैठ जा गा । तो वा बोली" तनने में माताजी laagu su ? तेरे ते कोई एक दो साल मेरी उम्र छोटी ही होगी।" मेरे तो सांप सुंग गया ,काटो तो खून नही। मेरे ते रह्या नही गया "क्यूँ के बोले बिना रह नही सकता हरियाणे की इज्जत का सवाल था" तो मन्ने पूछा "ये छोटा बच्चा आपका पोता है के दोहिता? वा बोलली "दोहिता" में बोल्या "फेर तो हकीकत में मेरी उम्र आपसे बड़ी है।इससे बड़ा तो मेरा पडपोता है।"
तो ताऊ जी बड़ा खराब जमाना आ गया सै। बहन जी कह दो जीजा जी मुफ्त में लो, भुआ कह दो फूफा साथ में मुफ्त में लो और अगर फूफा हो ही गया तो सारे रास्ते फेर उसकी सेवा करो, उसका हुक्का भर के लाओ।
आख़िर में "लुहार" नै उसका यो ही तोड़ पाया के "मैडम" बोलो और आनन्द में रहो।
ताऊ के सारे बेटे पोतों को मेरी राम-राम
(और भाई कोई सलाह देनी तो मेरा घर का किवाड़ २४ ghante खुल्ला सै। क्यूँ के बंद किवाड़ तो बाल-बच्चेदारों के ही मिलगे देश की जनसँख्या जो बढानी से )

आपका
रमलू

 

फ़ौजी ताऊ की फ़ौज