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गुरुवार, 3 दिसंबर 2009

" हट जा ताऊ पाच्छे नै दारू पिवण दे जी भर के नै"

यो ले  भाई,बात या थी के जित भी जाओ उत ताऊओ की ही चर्चा हो री सै,  मन्ने भी सोच्या साँझ का टैम सै जरा थोड़ी देर कनाट प्लेस के चक्कर काट आऊं, रीगल-रिवोली कने थोड़ी देर आंख भी सेक ल्यांगे और एकाध ओल्ड मंक का अद्धा भी ले ल्यांगे, आज जाड़ा घणा हो रह्या सै, मैं पंहुचा ही था तो म्हारे फौजी ताऊ मनफूल सिंग  सामने  दिक्खे  में तो बावला हो गया जी , अरे भाई  ताऊ जी अडे पहले ही पहुच गये, मन्ने तो बताया भी कोणी, और यो भी उरे ही सुवाद ले रहया सै. ताऊ बेटे का नाता म्हारे हरियाणे में बड़ा ही मशहूर  होया करे। बाज्जे वालों ने गाणा भी बना दिया - "हट जा ताऊ पाच्छे नै नाचण  दे जी भरके नै" तो बात या सै के पुरे हरियाणा के छोरे इस ताऊ तै ही दुखी हो रहे सै । ना खान दे ,ना पीने दे , ना नाचण दे, किसी णा किसी रूप मैं बैरी हर जगां पा जा सै, अपणा लट्ठ हमेशा ही ताणे राखे सै बैरी, जद ही मै कहूँ सूं के  ताऊ इब जमाना बदल गया, छोरों के साथ नाच्चो कुद्दो मौज मनाओ। ज्यादा परेसान करोगे तो चाँद मोहम्मद ने रास्ता तो काढ ही दिया सै। आगले का बाप्पू और दुखी सै । इसी फिजा लाया के पुरे खानदान की ही फिजा ख़राब करके धर दी । तो दुनिया के जितने भी बड़े-बड़े ताऊ जी सै, ईणने  यो ही सलाह सै के इब मान भी जाओ । और छोरों ने नाचण  दयो, कूदण दयो, मजे लेण दयो ,इब छोरों ने नया गाना और बना लिया " हट जा ताऊ पाच्छे नै दारू पिवण दे जी भर के नै" 
एक बात तो में बतानी भूल ही रह्या था। कुछ दिन पहले मै ट्रेन में आ रह्या था । मेरे सामने वाली बर्थ पे दो लुगाई थी और एक छोट्टा बच्चा था, दिल्ली तै गाड्डी चाल्ली । आगरा में ओर पेसेंजर चढ़े , उनकी सीट पे जगां देख के बैठ गे । बोल्ले आगले टेसण  तक जाणा सै । फेर आगले टेसण  पे दूसरी सवारी भी चढ़ गी ,उनने भी आगले टेसण तक जाणा था। जब आगले टेसण  पे सीट  खाली हुयी तो में बोल्यो "माता जी आप अडे सो जाओ नही तो फेर कोई और बैठ जा गा । तो वा बोली " तन्ने मैं  माताजी लाग्गू सूं ? तेरे ते कोई एक दो साल मेरी उम्र छोटी ही होगी। " मेरे तो जवाब सुण सांप सुंघ गया, काटो तो खून नही। मेरे ते रह्या नही गया "क्यूँ के बोले बिना रह नही सकता हरियाणे की इज्जत का सवाल था"  तो मन्ने पूछा "ये छोटा बच्चा आपका पोता है के दोहिता? वा बोल्ली  "दोहिता", मैं बोल्या "फेर तो हकीकत में मेरी उम्र आपसे बड़ी है। इससे बड़ा तो मेरा पडपोता सै ।" फेर वा बोल्ली " पण इतनी उम्र तो नहीं लगती आपकी" मै बोल्या " मैं जवान रहने वाली गोलियां खाता हूँ, तो बोल्ली " कहाँ मिलती है? मै बोल्या " के तूं भी लेगी", वो बोल्ली " ना ऐसे ही पूछ रही थी. तो मै बोल्या " फेर क्यूँ फालतू बावली हो रही सै," जिस गांव नहीं जाणा उसका रास्ता क्यूँ पूछना, नूये मजे ले,
तो ताऊ जी बड़ा खराब जमाना आ गया सै। जीजी  कह दो जीजा जी मुफ्त में लो, भुआ कह दो फूफा साथ में मुफ्त में लो और अगर फूफा हो ही गया तो सारे रास्ते फेर उसकी सेवा करो, उसका हुक्का-चिलम भर के लाओ
आख़िर में "लुहार" नै उसका यो ही तोड़ पाया के "मैडम" बोलो और आनन्द में रहो।


(और भाई कोई सलाह देनी तो मेरा घर का किवाड़ २४ घंटे खुल्ला सै। क्यूँ के बंद किवाड़ तो बाल-बच्चेदारों के ही मिलगे देश की जनसँख्या जो बढाणी से )



आपका 
रमलू लुहार

सोमवार, 5 अक्टूबर 2009

फौजी ताऊ के"लालटेन लाइट"डिनर में उड़न तश्तरी

आज ताऊ नै टुब वेळ पे उड़न तश्तरी की आण की ख़ुशी में पार्ट्री रखी सै, टुब वेळ पे पार्टी रखने कारण यो सै के एक तो गाम ते दूर सै, ओर कोई सा बुढा टल्ली भी होयगा तो भी कोई समस्या कोणी भले ही खेतों में रात भर भाषण दिए जावे, इलेक्शन का टैम से कोई नै मना भी नहीं कर सकते,रमलू कैंटीन ते ताऊ का महीने का कोटा लेने गया सै, रात का ८ बजे का टैम सै पार्टी का ताऊ के चमचे तेयारी करण लग रहे सै. रसोइए का काम बनवारी नै संभाल रख्या सै, पत्थरों का चूल्हा बना के हांडी चढा रक्खी सै,उसमे तरी बना रहया सै ओर मुर्ग मुस्सलम  की डिश तेयार हो रही सै,ताऊ ने अपणे खास फौजी दोस्त कप्तान सिंग जाट नै भी बुला रख्या सै, ठीक ८ बजे उड़न तश्तरी की सवारी लेके ताऊ पहुच गया, टेबल तो थी कोणी "ऊंट का गाडा" के चारों तरफ कुर्सी लगा रखी थी उसके उपर दरी बिछा के बढ़िया सुन्दर गुलदस्ता लगा के बीच में लालटेन रखी थी मतबल ताऊ के गाम का "लालटेन डिनर" था, इतनी देर में रमलू भी आयटम लेके आ गया उसने पूछा बनवारी ते -क्यूँ सामान तेयार सै सब, बनवारी बोल्यो- के बताऊँ यार रमलू थोडा लेट सै, वो सुसरी मुर्गी खुल गयी तो भाज गई थी रामेषर दुबारा लेके आया सै बस १५ मिनट मै सब तेयार सै, तू चिंता ना कर जब तक पनीर लेजा मैंने बढ़िया बना दिए अपणा कार्यक्रम चालू करो, रमलू आयटम लेके डिनर टेबल पे पहुँच गया, देखते हैं के अपणे परमानद जी पहुच गे अपनी सेना लेके,उतरते बोले फौजी चिंता मत कर मै सामान साथ लाया सूं किसी छोरे नै भेज के गाड़ी में से उतरवाले,भाई आज तो सारी मण्डली ही बैठ गई पहला दौर चालू हुआ उड़न तस्तरी के नाम ते,बातचित चल रही थी, बीच मै शिम्भू बोल्या-ताऊ सुणया सै बिदेश मै आज कल एक सपेशल सवारी चल रही सै, जिसमे ना तेल लगता,ना उसका इंजन आवाज करे,ना उसने घोडे-गधे जैसे खिलाने की जरूरत, वो तो दाना ही चुगे सै,दो पैर की सै,और आदमी उस पे चढ़ के बाजार जा के सारे काम करके आ सके सै, मन्ने तो म्हारे गाम का वो नौबत सै ना वो कह था, फेर मै सोचु था कोई बिदेश ते आवे गा उस ते पूछूँगा, इब समीर भाई आ रहे सें तो सोच्या पूछ ही लूँ हो सके सै एकाध ऐसी सवारी इनने भी ले रखी हो, ताऊ बोल्या-हाँ भाई समीर बता के यो बात सच्ची सै, समीर बोले -हाँ ताऊ यो बात सच्ची सै के इस तरह का एक प्राणी तो हो सै पर उसका सवारी में काम लेते मन्ने देख्या नहीं, रमलू बोल्या-कोण का जानवर हो सै, समीर बोल्ले-उसने ताऊ "ईमू" कह सै यो आस्ट्रेलियन चिडिया सै, ओर दो पैर की हो सै दाना चुगे सै चले भी घणी सै ओर ६ से७ फुट तक की ऊँची हो सै पण इसका दिमाग छोटा हो सै,सिर्फ डेढ़ इंच का इसलिए यो जयादा सोच नही सकती ओर ज्यादा याद नहीं रख सकती इसलिए इसने जंगली पक्षी बोले सै,यो सवारी के काम नहीं आ सकती,पण इसमें ताकत घणी होया करे, वाह भाई बढ़िया बात बताई इससे तो फौज मै तो बहोत काम लिया जा सकता है-कप्तान सिंग बोल्या, रामेषर बोल्या -फौज मै दिमाग वाला के काम, जिसने अपना दिमाग लगाया ओर वो ही मार खाया,ताऊ बोल्या-सुसरे! तन्ने म्हारे में दिमाग कम लगे सै, फौजियां के कोटे की तो दारू पीवे हमेशा ओर हमने ही कम दिमाग बतावे, हम तन्ने बावली बूच लगे सै, दे रे रमलू इसकी गुद्दी पे-सुसरा आया सै चल के लम्बरदारी करण. परमानद जी ने विषय बदला ताऊ - यो बता आज तो तेरा यार कप्तान सिंग भी आ रहया सै दोनों की फौज में कटे किस तरह थी, कप्तान सिंग बोल्या-मनफूल सिंग तो था सप्लाई में ओर मै था कैंटीन इंचार्ज खूब छ्न्या करती म्हारी,दारू तो कदे खतम ही नहीं होती थी, फेर ड्यूटी भी म्हारी हेडक्वाटर में ही थी कोई समस्या नहीं थी,समीर बोल्या-तो ताऊ उस टैम आपने तनखा कितनी मिल्या करती,ताऊ बोल्या-जब भरती होया था तो चालीस रूपये तनखा मिल्या करती २ रुपये अपणे बीडी-बाडी के खर्चे के राख के ३८ रुपये घर बापू धोरे भिजवा दिया करता, बनवारी सोच्या के ताऊ के चार पैग लग लिए इब रंग मै आ गया वो पाकिस्तान की लडाई वाली बात पूछ ही लूँ, उसने ताऊ ते पूछ्या -ताऊ वो पाकिस्तान वाली लडाई की के बात थी? इतने मै कप्तान सिंग बोल्या -अरे पाकिस्तान की लडाई की बात- मनफूल सिंग बडा बहादर माणस सै यो तो लाहोर से सुसरा पकिस्तानियाँ कि भैंस भी खोल ल्याया था, शिम्भू कूद के पडा -अच्छा यो बात सै-तो ताऊ तन्ने पाकिस्तान मैं भी भैंस ही पाई ओर कुछ नहीं मिल्या लाने के लिए,-ताऊ बोल्या -यो बात आज ख़तम करो युद्ध की बात किसी ओर दिन सुनाउंगा, आज माफ़ करो, ल्याओ रे भाई खाना,लगाओ जल्दी,समीर भाई नै भी भूख लग रही होगी, ओर तुमने चाहिए तो पूरा कैरेट पड्या सै ले लियो,पण कल काम के लायक रहियो....................नहीं तो 

आपका

रमलू लुहार 

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2009

लुटेरों के चंगुल में मत फंस जाणा ओर अपने ताऊ को ही वोट देना-उड़न तश्तरी -फौजी ताऊ की सभा में

खुशखबरी-खुशखबरी-बनवारी मंच ते माइक में बोलणे लग रह्या सै-जो उड़न तश्तरी आज म्हारे बीच में आण वाली सै वो गुडगाँव इंटर नेशनल हवाई अड्डे तक पहुच गई सै, तम शांति ते बैठो, आज अपने समीर लाल जी की आम सभा सै, गाँधी जी ओर लाल बहादुर शास्त्री दोनों का जनम दिन सै बहोत ही सुथरा दिन सै,गाँधी जी देश को आजाद कराया अंग्रेजों को भगाया ओर शास्त्री जी नै पाकिस्तान का बैंड बजाया,दोनों महापुरुषों का हम आदर करे सै-बनवारी का भाषण चाल रहया सै,मै आपने जरा पब्लिक के तरफ ले चलूँ, पब्लिक एक दम खचा-खच भारी सै ,सकुल के मैदान में चारों तरफ लाइट ही लाइट जग मग करण लग रही सै,ताऊ के छोरों नै भी जोरदार इंतजाम कर दिया,इब तो ओर कोई नहीं कह सके के म्हारे गाम के छोरे नालायक सै, सारे कार्यकर्ता बिल्ला लगाये पब्लिक नै सँभालने लग रहे सै,ताऊ नै पूरी छोले -चाय-पकोडे की स्टाल सकुल कने मंदर आले पीपल के नीचे लगवा दी,पाणी के टैंकर खड़े कर दिए और पब्लिक चाय नसते का मजा ले रही सै, गांव की बूढी लुगाइयां अपने पीढे घर से ला के सजा के बैठी सै, संतरा ताई नै बोल्ली-ऍ जी यो उड़न तश्तरी किसी हो सै,ताई बोल्ली-ये बीरा मन्ने के पता ये छोरे कह रहे थे भोत बड़ी हो सै ओर नु घुमती आवे सै, पहले आसमान मै गोल-गोल चक्कर कटेगी फेर सकुल के मैदान  मै उतरेगी, चन्द्कोर बोल्ली-ताई कदे वो तो नहीं सै जो कई साल पहले उतरया था,के बोल्ले थे "सकाईलेब", ना-ना वो कोणी, तन्ने ताऊ इतना बावला लगे सै?वो तो सारे काम सोच समझ के करे सै,यो के हुयी कदे दो चार घूंट लगा ले आखर फौजी जो सै, यो चर्चा ओरतों के बीच में चल रही सै, सब अपने -अपने तरीके सै उड़न तश्तरी के बारे में अंदाजा लगा रहे सै, के कैसी होगी,?इधर ताऊ,रमलू,परमानद जी ओर भी घणे सारे लोग हवाई अड्डे पहुचगे उड़न तस्तरी का सवागत करण खातिर,हवाई अड्डे पर समीर लाल जी पहुचे तो सबने उनका स्वागत किया,ताऊ नै भी अपना आशीर्वाद दिया ओर बोल्या-भाई तुने तो बहुत बढ़िया काम कर दिया जो आ गया,सारे हवाई अड्डे से गाम में सभा स्थल पे पहुचे बनवारी का भाषण चालू  ही था, सबने समीर लाल उर्फ़ उड़न तश्तरी का सुवागत किया, रमलू मंच का संचालन करने लगा-भाइयों ओर बहनों मेरे बुजुर्गों बाहर गाम ते आये हुए साथियों इब म्हारे बीच कनाडा से भाई समीर लाल जी आ चुके सै, लोग इनने ही उड़न तश्तरी के नाम ते जाने सै,इब मै आप लोगो का टैम ख़राब ना करके सीधा माइक समीर लाल जी ने  सौंपता हूँ, फार्मेलिटी में ज्यादा टैम ख़राब होता है, आप इनने ही सुनो, यो बोल  के रमलू नै माइक समीर लाल के हाथ  में सौंप दिया,
समीर लाल नै बोलना चालू करया- मेरे भाईयों ओर बहनों ताऊ-ताई,रमलू, परमानन्द जी ओर गाम के लोगो मै भी आपके बीच का ही छोरा सूं ,देश ते बाहर काम करण चला गया ओर उत ही बस गया,मै तो आप लोगो ते मिलने के लिए आया सूं, ताऊ का इलेक्शन तो एक बहाना सै,ताऊ जी इलेक्शन में खडे हुए बड़ी अच्छी बात है,आज देश नै ऐसा नेता चाहिए जो सच्चा हो इमानदार हो गरीब आदमी की मज़बूरी ओर उसकी भूख नै समझ सके,जो कारीगर की दुःख तकलीफ नै समझ सके, आज म्हारे देश के दो महापुरुषों का जनम दिन है,एक तो बापू,दूसरा शास्त्री जी,दोनों ही ईमानदारी ओर देश भक्ति की एक बहुत बडी मिशाल थे,दोनों ने ही अपना जीवन सादगी के साथ बिताया,गाँधी जी नै तो भारतवासियों का दर्द ओर गरीबी को महसूस करने के लिए लंगोटी ही पहननी चालू कर दी थी, ओर वे कहते थे की भारत की आत्मा तो गावं में ही बसती है,गावं का विकास होगा तो सारे देश का विकास हो जायेगा, ओर कैसे होगा ये बात उन्होंने गोली लगने के एक दिन पहले ही लिख दी थी,आज म्हारे देश में अमीर ओर गरीब की खाई बढती जा रही सै,अमीर ओर अमीर होता जा रह्या सै, गरीब ओर गरीब होता जा रह्या सै,मरण तो म्हारे जैसे लोगों का ही हो रह्या सै,आज भी देश में कई करोड़ ऐसे सै जिनने खाने को दाना नही मिल पाता, देश नै आजाद हुए ६३ साल हो चुके पण ये नेता अपना ही घर भरने में लग रहे सै,गरीब की तो कोई चिंता ही नही सै,सरकार में इसे -इसे मंत्री सै जो एक दिन रहने के लिए एक लाख रुपया खर्च कर रहे सै ओर यहाँ गरीब की झोपडी में दिया जलाने के लीये भी तेल कोणी,बड़े शरम की बात सै, जो हवाई जहाज में जाये सै वो भी इनने भेड़ बकरी ही दिखे सै,म्हारे जैसे सड़क पे चलने वाले तो इनने दीखते ही कोणी होंगे,ओर ये म्हारे देश के कर्णधार सै,यो देश नै किसा चलावेंगे? आज जरुरत सै देश ने गाँधी जी जैसी सोच के आदमी की आज जरुरत सै देश ने लाल बहादुर शास्त्री जैसी सोच के आदमी की,जो गरीबों का दुःख दर्द समझ सके,भाईयों मै कोई नेता तो नही सूं पण जो मेरे मन में आया आपने कह दिया,अपने रिटायर हवालदार फौजी ताऊ मनफूल सिंग जी सच्चे-इमानदार ओर मेहनतकश मनमौजी किसम के आदमी सै,इनने मेरे ते ज्यादा तो आप ही जानते हो, मै तो इतनी कहने आया हूँ इनको कप प्लेट छाप पे बटन दबा के जिताओ, ये आपको खूब सेवा करेंगे,सेवा करना तो इनका पेशा ही सै पहले तो फौज में देश की सेवा करी फेर रिटायर होके गावं की सेवा कर रहे सै,इब आप जीता दोगे तो पुरे हलके की सेवा करेंगे,मेरी तो आपसे यो ही विनती सै, बड़े बड़े पैसे वाले लोग ताऊ के सामने खड़े सै वो आपने बहकाने की कोशिश करेंगे वोट खरीदने की कोशिश करेंगे पण आप लोग इन लोकतंत्र के लुटेरों के चंगुल में मत फंस जाणा ओर अपने ताऊ को ही वोट देना,आप सब नै धन्यवाद जो आपने इतना प्यार ओर आशीर्वाद मुझे दिया,मै आपका आभारी सूं फेर मिलेंगे, एक बर ताऊ नै जिताओ,आप सबने मेरी राम-राम.
(कल ताऊ नै उड़न तश्तरी के सुवागत मै अपने टुबबेल पे एक पार्टी रखी सै,उसका आँखों देखा हाल आपको कल सुनावेंगे,सबको राम-राम)

बुधवार, 30 सितंबर 2009

दारू चलनी चाहिए-यो म्हारे जैसे बुड्ढों के टैम-टैम पे काम आवे सै-फौजी ताऊ मनफूल सिंग पत्रकार वार्ता में

ताऊ की चौपाल में आज ताऊ के इलेक्शन की पहली प्रेस वार्ता सै, ताऊ नै पूरा इंतजाम करवा दिया और चौपाल पे बहुत सारी खाट लगाव दी,जिसमे आने वाले पत्रकार और मेहमान- कार्यकर्ता बैठेंगे, रमलू ताऊ नै पत्रकार वार्ता की बारीकी सिखाने लग रहा सै, किस सवाल का जवाब देना सै, किसका जवाब टाल देना सै, बिदेशी पत्रकार भी आ रहे सै, वो भी ताऊ का अनोखा इलेक्शन देखना चावे सै, उनके लिए भी ताऊ नै ब्रेड बिस्कुट का इंतजाम कर राख्या सै। 

आच्छी तगडी भीड़ इकट्ठी हो रही सै, पूरा गाम ही इकट्ठा हो रह्या सै, ताई भी अपनी सहेलियों को लेकर तैयार है, सारे पत्रकार टी.वी. चैनल वाले अपनी -अपनी गाड़ियों में पहुच रहे है, ये देश का पहली पत्रकार वार्ता है, जो खुले में पूरे गाम की जनता के बीच हो रही सै, बनवारी,रामेसर,शिम्भू,झोट्टा, पाडा सारे ही आने वालों की खातिर में लग रहे सै, चालो भाई पत्रकारों का कैमरा विमर सब सेट हो गया सै, पत्रकार वार्ता चालू होने वाली है, ताई भी घूँघट निकाल के ताऊ के बगल में आके बैठ गई, रमलू सारा मसोदा ले के ताऊ के पीछे बैठा सै।  

इब पत्रकार वार्ता चालू हो रही सै,ताऊ ने माईक संभल लिया ओर बोल्या-भईयों आपने सबने मेरा राम-राम, मेरे इलेक्शन में खडे होणे का मतबल यो सै के जो गरीब मजदूर,कारीगर, लोग सै उनकी सुनने वाला कोई नहीं सै, कोई भी पार्टी इनने टिकिट नहीं देती,लेकिन वोट जरुर लेती है, मै इलेक्शन में इसलिए खडा हुआ के पैसे वाले लोग गरीब लोगों के वोट का बेजा इस्तेमाल करते है,,मै भी कारीगर समाज से ही हूँ, मन्ने पता सै के इनकी तकलीफ के सै, इनकी तकलीफ दूर कारने के लिए मै पुरजोर परयास करूँगा, आप मन्ने अपना वोट दे के एक बर जितवा बस दो फेर सारा काम-दुःख तकलीफ मेरे पे छोड़ दो, आज तक आपके हमेशा काम आया सूं, और इब भी काम आऊंगा, मै आपके सामने दोनों हाथ जोड़ के अपनी उम्मीदवारी घोषित करता हूँ, यो आपका ताऊ सै जो किसी के भी दबाव मै नहीं आणे वाला, आप मन्ने अपणा वोट दे के चुनाव जिताओ, भाई गाम वाले सरे शांत बैठेंगे, कोई रोला नहीं करेगा, हाँ भाई पत्रकार लोगो आप अपने सवाल इब पूछ सकते हो पूछो,

टाईम्स ऑफ़ इंडिया का पत्रकार बोल्या- ताऊ मनफूल सिंग जी आप ये बताओ के आपने रास्ट्रीय सहारा पार्टी से ही अपनी उम्मीदवारी क्यों की? आपने और भी दूसरी बड़ी पार्टी टिकट दे रही थी?
ताऊ बोल्या-देखो देस के भीतर अनेक राजनैतिक पार्टिया है, लेकिन उन सबका टिकिट देने का आधार प्रत्याशी की आर्थिक स्थिति ओर पार्टी को चंदा कितना दे रहया होता है, हमारी पार्टी में उन सभी लोगों को टिकट दिया है जिनके खान-दान में किसी ने विधान सभा का मुह नही देखा है, हमारी पार्टी में आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सताए हुए लोगो नै परमुख स्थान दिया सै, इस पार्टी में वो लोग सै जो एक दिन की दिहाडी के लिये कमरतोड़  मेहनत करते है, चाहे वो कोई भी जात-धर्म -संप्रदाय का है, पर सबके काम करने के औजार तो एक ही है ना, इस पार्टी में भाई भतीजावाद नहीं सै और हमारे पार्टी के परधान परमानन्द जी नै घोषणा कर दी है के वे कभी भी इलेक्शन नहीं लडेंगे और भाई भतीजा वाद को कभी पार्टी में नहीं होणे देंगे, पार्टी हमेशा काबिल लोगों को ही टिकट देगी, तो इस लिए मैंने रा.सा.पा में आके इलेक्शन लड़ने की सोची।

आपको पार्टी के पास विकास की क्या योजना है -पंजाब केशरी के पत्रकार ने पूछा,

ताऊ बोल्या-  म्हारी योजना यो है जी के हम अपने विधान सभा के सभी गावों को शहर की सारी सुविधा उपलब्ध कराएँगे, कानून बेवस्था में सुधर लायेंगे, खरगोश को बन्दर बनाने वाली पुलिस के ढांचे में सुधार करेंगे, गावों में ही रोजगार के साधन मुहईया करवाएंगे, एक आम नागरिक की बेहतरी के लिए सारे काम करेंगे. मै कोई नेता तो हूँ नहीं-ना ही मेरे खान-दान में कोई था इसलिए झूठे आश्वासन तो में दूंगा नहीं, जितने के बाद करके दिखाऊंगा।

हरिभूमि ने पूछा-ताऊ आपको इलेक्शन लड़ने के लिए पैसे कहाँ से मिल रहे है?

ताऊ बोल्या- सच बोलूं !! पर्चे बेनर तो पार्टी की तरफ से है, गाड्डी-घोडे का इंतजाम ये सारे  यार- दोस्तों -रिश्तेदारों ने किया सै, और हाथ खर्च के लिए ताई नै अपने गुल्लक ते निकाल के दिए सै।

तो ताऊ दारू बंदी के बारे में आपकी क्या राय है? गाम के छोरे दारू पी के बिगड़ रहे है,

ताऊ- भाई !! दारू बंदी के बारे में तो मेरे राय ठीक सै, दारू चलनी चाहिए वो म्हारे जैसे बुड्ढों के टैम -टैम पे काम आवे सै, ओर अगर फौजी धोरे दारु का कोटा ही ना तो सारा मामला गड-बड,इस लिए ये तो चलनी चाहिए,ओर छोरों को इसे नहीं  पीनी चाहिए,

हिंदुस्तान टाईम्स - ताऊ ! आपके परचार के लिए बाहर से कोण- कोण से स्टार आ रहे  हैं ,सभी पार्टियाँ तो बड़े बड़े फिलम स्टार को बुला रही है, आपक किसको बुला रहे है,

ताऊ- भाई म्हारे  प्रचार में तो वो ही आवेगा जिसके दिल में गरीब मजदूरों के लिए दर्द है, म्हारे धोरे भी बड़े -बड़े स्टार सै, देश ओर विदेशों से भी म्हारे परचार में हस्तियां आ रही सै,

जी.टी.वी.-तो ताऊ कोण -कोण आ रहा है जरा नाम का खुलासा तो करो,

ताऊ - जिनकी मंजूरी  आई  है उसमे सबसे पहले कनाडा से उड़न तस्तरी, सूरत से लाफ्टर शो विनर अलबेला खत्री, भिलाई से  बी.एस. पावला, अभनपुर से ललित शर्मा, दुर्ग से संजीव तिवारी ओर रायपुर से अनिल पुसदकर की मंजूरी आणि बची  है, उम्मीद है वो भी आ जावेगा,  तो  भाई इब हो गया यो प्रेस कान्फरेंस इब ख़तम करो, और पत्रकार साथियों खाने का इंतजाम है, आप भोजन का आनंद ले के जाणा, रमलू जल्दी तैयारी करवा, कल चुनाव का निशान भी लेने जाणा है। 


आपका 
रमलू लुहार

फोटो गूगल से साभार 

 

फ़ौजी ताऊ की फ़ौज