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शनिवार, 12 सितंबर 2009

फौजी ताऊ की कारस्तानी


चलो भाई सबने मेरी राम-राम आज शाम नै ताऊ की मण्डली फेर बैठ गई,रामधन हुक्के की चिलम भर लाया और काम चालू हो गया,मै भी पहुँच गया ताऊ धोरे ,क्यूँ के रिटाएर फौजी धोरे टाइम पास मजे ते हो जाया करे.रामफल नै हुक्के का एक सुट्टा मारा फेर बोल्या ---

"ताऊ एक बात तो बता तू फोज़ मै कुकर भरती हो गया ? पढ़ा लिखा तू सै कोणी फेर किसने फोज मै भरती कर लिया ? तन्ने यो चमत्कार किस तरियां करया

ताऊ बोल्या- अरे छोरो पहले की तो बात ही अलग सै.पहले फोज मै पढ़ाई लिखाई की जरुरत कोणी थी फोज मै भरती होण ते पहले मै भैंस चराया करताएक दिन मै भैंस चरावे था तो सड़क पे एक जीप आ के रुकी. एक फौजी साहब उतरा ,
पहले तो मै डर गया फेर उसने पुच्चा "क्या तुम फौज में भरती होगे",
में सोच में पड़ गया. फेर बोल्या तुम्हारे घर में कोण-कोण हैं,
मै बोल्या -बापू सै माँ तो कोणी ताई धोरे रहू सूं.
वो बोल्या "कल पानीपत में भरती हैं ,तुम अपने बापू से पूछ के आ जाना मै भरती कर लूँगा "
तो बड़े मुस्किल ते मै ताई और बापू नै मना के पानीपत चला गया फोज में भरती हो गया.
तो वो टाइम लडाई का टाइम था .तगडे ६ फुट साढ़े ६ फुट के जवान तुरते भर्ती कर लेते थे. फिर उनको वहां फौज में भरती करके पढ़ते थे. रोमन अंग्रेजी सिखाते थे. एसा नही हैं की अनपढ़ ही रहते थे .
फौज में अनुशासन जयादा होता हैं. येस मतबल येस ,नो तो हैं नहीं वहां पे.तो ताऊ तेरे ते कभी अनुशासन में गलती हुई हैं.? मणि राम ने पूछा.

एक बार का किस्सा बताऊ -म्हारे हेड क्वाटर मै आग लग गयी और हमारा ऑफिस सातवी मंजिल पे था.आग निचे के मंजिल मै लगी थी
ब्रिगेडियर सब बोले - हवलदार मनफूल सिंग,तुम सबको ऊपर छत पर ले जाओ जावो ,
हमने नीचे जाल पकडा के सिपाही तैनात कर दिए हैं, वे जाल पकडेंगे और तुम सब एक एक करके कूद जाओ .
मै बोला जी साब जी.
फेर बोले सबसे बाद में मै कुदूंगा ध्यान रखना अटेंशन रहना ,
जी साब जी.
हम सारे छत पे गए निचे सिपाही जाल पकड के खड़े थे सारे सिपाही कूद गए .
उसके बाद ब्रिगेडियर साब और मै बच गए थे .साब ने कहा मनफूल सिंग कूदो, ये कहते ही मै कूद गया. अब बारी ब्रिगेडियर साब की थी .वो ऊपर से बोले "तैयार -अटेंशन -और कूद गए. निचे क्या हुआ उसका हॉल सुण ले, ऊपर से ज्यों ही साहब कूदे ,मैंने भी हुँकार भरी "सावधान" सारे सिपाही धरती पे जाल छोड़ "सावधान " हो गये.
भगवान् उनकी आत्मा नै शांति दे. बड़े अच्छे अफसर थे. इसे कड़े अनुशासन में हमने काम करना पड़ा करता. बाकी की काल देखेंगे.

आपको हमारे ताऊ कैसे लगे जिवंत प्रतिक्रिया आमंत्रित है.जिससे हमारा भी उत्साह बना रहे ,
हमारे पुराने जानकार अनील पुसदकर भी २२ साल बाद मिले आज यहाँ ब्लॉग पर मिलकर बड़ा अच्छा लगा.
आपका
रमलू लुहार

(फोटो गूगल से साभार).

 

फ़ौजी ताऊ की फ़ौज