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सोमवार, 7 सितंबर 2009

ताऊ की चौपाल

भाइयों देशां में देश हरियाणा, जड़े दूध दही का खाना, या बात म्हारे हरियाणे की सै ,यहाँ का दूध दही,घी मशहूर है. तो यहाँ के ताऊ और फूफे भी पुरे जगत में मशहूर हैं ,इनपे हजारों किस्से सुनते आए हैं। ताऊ तो हरियाणे  के हरेक गाँव में सै। म्हारे भी गाँव में एक ताऊ से रिटायर फौजी मनफूल सिंग जी, उसकी कहानी भी सारे ताउओं जैसी है ,पण कुछ हट के सै म्हारा यो ताऊ,म्हारा गाँव जिला महेंद्र गढ़ में रामपुरा सै, ताऊ मनफूल सिंग म्हारे गांव का सबसे पद्या लिख्या और सुलझा हुआ माणस सै, पुरे गाम  मै इसकी ही चौधर चाले सै, गांव के सारे नौजवान छोरे भी जितने भी सें ताऊ के पिच्छे ही हांडते फिरे सै क्युके ताऊ नई कैंटीन ते राम जो मिले सै, बस ताऊ की चौपाल रोज साँझ नै उसके नोहरे के सामने लग ही जा सै, फेर दुनिया के सारे किस्से उरे ही पैदा हो जावे सै, ओबामा से लेके म्हारे गाम के सरपंच तक की सारी कहानी बन जावे सै. ताऊ म्हारा हर गरीब-अमीर, बूढे-जवान सबके सुख दुःख मैं काम आवे सै, इसका और म्हारी ताई का कदे-कदे लठ भी बाज जाये करे किसी बात नै लेके, फेर रिटायर फौजी सै तो फ़ौज के किस्से घणे ही सै. लोग अपणा टैम भी पास कर लें सै, ताऊ के किस्से सूं के,ताऊ का एक चमचा भी सै, जिसने मोड़े कह्या करें नै पट्ट शिष्य याने चेला, यो ताऊ के साथ हरदम मिलेगा, मान लो ताऊ म्हारे गाम का प्रधानमंत्री सै तो रमलू लुहार उसका प्रवक्ता सै, जो रमलू कह दे समझ लो ताऊ कह रह्या सै. आपने इस ब्लाग म्हारे ताऊ के किस्से सुनने मिलगे, ताऊ की चौपाल में. आपका स्वागत सै.


आपका
रमलू लुहार

मंगलवार, 18 अगस्त 2009

"हट जा ताऊ पाच्छे नै"











यो ले भाई,
इब हम भी आगये मैदान में,
बात या थी के जित भी जाओ उत ब्लॉग की ही चर्चा हो री सै, एक दिन में भी इंटर नेट पै था। तबी सामने ताऊ डाट काम का ब्लॉग आ गया। में तो बावला होगया जी , अरे भाई म्हारे ताऊ जी अडे पहले ही पहुच गये मन्ने तो बताया भी नही आप पहले ही पुन्च गे। ताऊ बेटे का रिश्ता म्हारे हरियाणे में बड़ा ही मधुर होया करे। बाज्जे वालों ने गाना भी बना दिया - "हट जा ताऊ पाच्छे नै नाचन दे जी भरके नै"
तो बात या है पुरे हरियाणा के छोरे इस ताऊ तै ही दुखी हो रहए हैं। ना खान दे ,ना पीने दे , ना नाचन दे, ताऊ इब जमाना बदल गया, छोरों के साथ नाच्चो कुद्दो मौज मनाओ। ज्यादा परेसान करोगे तो चाँद मोह्ह्म्म्द ने रास्ता तो बता ही दिया सै। बाप्पू दुखी कर राख्या सै । इसी फिजा लाया के पुरे खानदान की ही फिजा ख़राब करके धर दी । तो दुनिया के जितने भी बड़े-बड़े ताऊ जी सै, इनने यो ही सलाह सै के इब मान भी जाओ । और छोरों ने नाचन दयो।
एक बात तो में बतानी भूल ही रह्या था। कुछ दिन lट्रेन में आ रह्या था । मेरे सामने वाली बर्थ पे दो महिलाएं और एक छोट्टा बच्चा था, दिल्ली सै गाड्डी चालली। आगरा में और पेसेंजर चढ़े , उनकी सिट पे जगा देख के बैठ गये । बोलले आगले टेसन तक जाना है। फेर आगले टेसन पे दूसरी सवारी भी चढ़ गयी ,उन्हें भी आगले टेसन जाना था। जब आगले टेसन पे सिट खाली हुयी तो में बोल्यो "माता जी आप अडे सो जाओ नही तो फेर कोई और बैठ जा गा । तो वा बोली" तनने में माताजी laagu su ? तेरे ते कोई एक दो साल मेरी उम्र छोटी ही होगी।" मेरे तो सांप सुंग गया ,काटो तो खून नही। मेरे ते रह्या नही गया "क्यूँ के बोले बिना रह नही सकता हरियाणे की इज्जत का सवाल था" तो मन्ने पूछा "ये छोटा बच्चा आपका पोता है के दोहिता? वा बोलली "दोहिता" में बोल्या "फेर तो हकीकत में मेरी उम्र आपसे बड़ी है।इससे बड़ा तो मेरा पडपोता है।"
तो ताऊ जी बड़ा खराब जमाना आ गया सै। बहन जी कह दो जीजा जी मुफ्त में लो, भुआ कह दो फूफा साथ में मुफ्त में लो और अगर फूफा हो ही गया तो सारे रास्ते फेर उसकी सेवा करो, उसका हुक्का भर के लाओ।
आख़िर में "लुहार" नै उसका यो ही तोड़ पाया के "मैडम" बोलो और आनन्द में रहो।
ताऊ के सारे बेटे पोतों को मेरी राम-राम
(और भाई कोई सलाह देनी तो मेरा घर का किवाड़ २४ ghante खुल्ला सै। क्यूँ के बंद किवाड़ तो बाल-बच्चेदारों के ही मिलगे देश की जनसँख्या जो बढानी से )

आपका
रमलू

 

फ़ौजी ताऊ की फ़ौज