बुधवार, 19 अगस्त 2009

जय बोलो ठाणेदार की।

ताऊ जी राम- राम ,

या कविताई थारी नजर करूं सुं। बालक का ध्यान रखियो.



जय बोलो ठाणेदार की



निसदिन जो करे प्रतिज्ञा, मानव के कल्याण की,

आज सुना रहा हूँ मै गाथा,धरती के बलवान की,

जय बोलो ठाणेदार की,



सर पर मुकुट सोहे है उसके, कटी शास्त्र भी धरता है,

हस्त दंडिका लेकर चलता ,तब अम्बर भी हिलता है,

है मजाल कोई आए सामने, जय बोलो ठाणेदार की,



एक सो इक्यावन से अभिमंत्रित,अमोघ अस्त्र तेरा है,

चोर,उचक्के,ठगी, जगियों का,थाना ही अन्तिम बसेरा है,

बिना लड़े ही चित्त कर देता, जय बोलो ऐसे प्रहार की,

जय बोलो ठाणेदार की,



तेरा अभय paate ही ,निर्बल भी निर्भय हो जाता है,

करे वंदना सभी उसी की, जो तेरा आशीष पता है

गुननिधि, बल विशारद , जय बोलो महा उदार की,

जय बोलो ठाणेदार की



जिस पर तेरी किरपा होती, वो बंधन मुक्त हो जाता है,

वह प्राणी मृत्युलोक मै भी, स्वर्ग लोक का सुख पता है,

कृपा पात्र को धन्य करता, जय बोलो बड़े सरकार की

जय बोलो ठाणेदार की,


जन-मन-गन निसदिन ,तुझको ही ध्याता है,

कोटि तीर्थ सम फल पके, भवसागर तर जाता है

दुष्ट भंजक विधि के रक्षक ,जय बोलो करुनागार ,

जय बोलो ठाणेदार की, जय बोलो ठाणेदार की,




आपका


रमलू,

मंगलवार, 18 अगस्त 2009

"हट जा ताऊ पाच्छे नै"











यो ले भाई,
इब हम भी आगये मैदान में,
बात या थी के जित भी जाओ उत ब्लॉग की ही चर्चा हो री सै, एक दिन में भी इंटर नेट पै था। तबी सामने ताऊ डाट काम का ब्लॉग आ गया। में तो बावला होगया जी , अरे भाई म्हारे ताऊ जी अडे पहले ही पहुच गये मन्ने तो बताया भी नही आप पहले ही पुन्च गे। ताऊ बेटे का रिश्ता म्हारे हरियाणे में बड़ा ही मधुर होया करे। बाज्जे वालों ने गाना भी बना दिया - "हट जा ताऊ पाच्छे नै नाचन दे जी भरके नै"
तो बात या है पुरे हरियाणा के छोरे इस ताऊ तै ही दुखी हो रहए हैं। ना खान दे ,ना पीने दे , ना नाचन दे, ताऊ इब जमाना बदल गया, छोरों के साथ नाच्चो कुद्दो मौज मनाओ। ज्यादा परेसान करोगे तो चाँद मोह्ह्म्म्द ने रास्ता तो बता ही दिया सै। बाप्पू दुखी कर राख्या सै । इसी फिजा लाया के पुरे खानदान की ही फिजा ख़राब करके धर दी । तो दुनिया के जितने भी बड़े-बड़े ताऊ जी सै, इनने यो ही सलाह सै के इब मान भी जाओ । और छोरों ने नाचन दयो।
एक बात तो में बतानी भूल ही रह्या था। कुछ दिन lट्रेन में आ रह्या था । मेरे सामने वाली बर्थ पे दो महिलाएं और एक छोट्टा बच्चा था, दिल्ली सै गाड्डी चालली। आगरा में और पेसेंजर चढ़े , उनकी सिट पे जगा देख के बैठ गये । बोलले आगले टेसन तक जाना है। फेर आगले टेसन पे दूसरी सवारी भी चढ़ गयी ,उन्हें भी आगले टेसन जाना था। जब आगले टेसन पे सिट खाली हुयी तो में बोल्यो "माता जी आप अडे सो जाओ नही तो फेर कोई और बैठ जा गा । तो वा बोली" तनने में माताजी laagu su ? तेरे ते कोई एक दो साल मेरी उम्र छोटी ही होगी।" मेरे तो सांप सुंग गया ,काटो तो खून नही। मेरे ते रह्या नही गया "क्यूँ के बोले बिना रह नही सकता हरियाणे की इज्जत का सवाल था" तो मन्ने पूछा "ये छोटा बच्चा आपका पोता है के दोहिता? वा बोलली "दोहिता" में बोल्या "फेर तो हकीकत में मेरी उम्र आपसे बड़ी है।इससे बड़ा तो मेरा पडपोता है।"
तो ताऊ जी बड़ा खराब जमाना आ गया सै। बहन जी कह दो जीजा जी मुफ्त में लो, भुआ कह दो फूफा साथ में मुफ्त में लो और अगर फूफा हो ही गया तो सारे रास्ते फेर उसकी सेवा करो, उसका हुक्का भर के लाओ।
आख़िर में "लुहार" नै उसका यो ही तोड़ पाया के "मैडम" बोलो और आनन्द में रहो।
ताऊ के सारे बेटे पोतों को मेरी राम-राम
(और भाई कोई सलाह देनी तो मेरा घर का किवाड़ २४ ghante खुल्ला सै। क्यूँ के बंद किवाड़ तो बाल-बच्चेदारों के ही मिलगे देश की जनसँख्या जो बढानी से )

आपका
रमलू

 

फ़ौजी ताऊ की फ़ौज