सोमवार, 5 अक्टूबर 2009

फौजी ताऊ के"लालटेन लाइट"डिनर में उड़न तश्तरी

आज ताऊ नै टुब वेळ पे उड़न तश्तरी की आण की ख़ुशी में पार्ट्री रखी सै, टुब वेळ पे पार्टी रखने कारण यो सै के एक तो गाम ते दूर सै, ओर कोई सा बुढा टल्ली भी होयगा तो भी कोई समस्या कोणी भले ही खेतों में रात भर भाषण दिए जावे, इलेक्शन का टैम से कोई नै मना भी नहीं कर सकते,रमलू कैंटीन ते ताऊ का महीने का कोटा लेने गया सै, रात का ८ बजे का टैम सै पार्टी का ताऊ के चमचे तेयारी करण लग रहे सै. रसोइए का काम बनवारी नै संभाल रख्या सै, पत्थरों का चूल्हा बना के हांडी चढा रक्खी सै,उसमे तरी बना रहया सै ओर मुर्ग मुस्सलम  की डिश तेयार हो रही सै,ताऊ ने अपणे खास फौजी दोस्त कप्तान सिंग जाट नै भी बुला रख्या सै, ठीक ८ बजे उड़न तश्तरी की सवारी लेके ताऊ पहुच गया, टेबल तो थी कोणी "ऊंट का गाडा" के चारों तरफ कुर्सी लगा रखी थी उसके उपर दरी बिछा के बढ़िया सुन्दर गुलदस्ता लगा के बीच में लालटेन रखी थी मतबल ताऊ के गाम का "लालटेन डिनर" था, इतनी देर में रमलू भी आयटम लेके आ गया उसने पूछा बनवारी ते -क्यूँ सामान तेयार सै सब, बनवारी बोल्यो- के बताऊँ यार रमलू थोडा लेट सै, वो सुसरी मुर्गी खुल गयी तो भाज गई थी रामेषर दुबारा लेके आया सै बस १५ मिनट मै सब तेयार सै, तू चिंता ना कर जब तक पनीर लेजा मैंने बढ़िया बना दिए अपणा कार्यक्रम चालू करो, रमलू आयटम लेके डिनर टेबल पे पहुँच गया, देखते हैं के अपणे परमानद जी पहुच गे अपनी सेना लेके,उतरते बोले फौजी चिंता मत कर मै सामान साथ लाया सूं किसी छोरे नै भेज के गाड़ी में से उतरवाले,भाई आज तो सारी मण्डली ही बैठ गई पहला दौर चालू हुआ उड़न तस्तरी के नाम ते,बातचित चल रही थी, बीच मै शिम्भू बोल्या-ताऊ सुणया सै बिदेश मै आज कल एक सपेशल सवारी चल रही सै, जिसमे ना तेल लगता,ना उसका इंजन आवाज करे,ना उसने घोडे-गधे जैसे खिलाने की जरूरत, वो तो दाना ही चुगे सै,दो पैर की सै,और आदमी उस पे चढ़ के बाजार जा के सारे काम करके आ सके सै, मन्ने तो म्हारे गाम का वो नौबत सै ना वो कह था, फेर मै सोचु था कोई बिदेश ते आवे गा उस ते पूछूँगा, इब समीर भाई आ रहे सें तो सोच्या पूछ ही लूँ हो सके सै एकाध ऐसी सवारी इनने भी ले रखी हो, ताऊ बोल्या-हाँ भाई समीर बता के यो बात सच्ची सै, समीर बोले -हाँ ताऊ यो बात सच्ची सै के इस तरह का एक प्राणी तो हो सै पर उसका सवारी में काम लेते मन्ने देख्या नहीं, रमलू बोल्या-कोण का जानवर हो सै, समीर बोल्ले-उसने ताऊ "ईमू" कह सै यो आस्ट्रेलियन चिडिया सै, ओर दो पैर की हो सै दाना चुगे सै चले भी घणी सै ओर ६ से७ फुट तक की ऊँची हो सै पण इसका दिमाग छोटा हो सै,सिर्फ डेढ़ इंच का इसलिए यो जयादा सोच नही सकती ओर ज्यादा याद नहीं रख सकती इसलिए इसने जंगली पक्षी बोले सै,यो सवारी के काम नहीं आ सकती,पण इसमें ताकत घणी होया करे, वाह भाई बढ़िया बात बताई इससे तो फौज मै तो बहोत काम लिया जा सकता है-कप्तान सिंग बोल्या, रामेषर बोल्या -फौज मै दिमाग वाला के काम, जिसने अपना दिमाग लगाया ओर वो ही मार खाया,ताऊ बोल्या-सुसरे! तन्ने म्हारे में दिमाग कम लगे सै, फौजियां के कोटे की तो दारू पीवे हमेशा ओर हमने ही कम दिमाग बतावे, हम तन्ने बावली बूच लगे सै, दे रे रमलू इसकी गुद्दी पे-सुसरा आया सै चल के लम्बरदारी करण. परमानद जी ने विषय बदला ताऊ - यो बता आज तो तेरा यार कप्तान सिंग भी आ रहया सै दोनों की फौज में कटे किस तरह थी, कप्तान सिंग बोल्या-मनफूल सिंग तो था सप्लाई में ओर मै था कैंटीन इंचार्ज खूब छ्न्या करती म्हारी,दारू तो कदे खतम ही नहीं होती थी, फेर ड्यूटी भी म्हारी हेडक्वाटर में ही थी कोई समस्या नहीं थी,समीर बोल्या-तो ताऊ उस टैम आपने तनखा कितनी मिल्या करती,ताऊ बोल्या-जब भरती होया था तो चालीस रूपये तनखा मिल्या करती २ रुपये अपणे बीडी-बाडी के खर्चे के राख के ३८ रुपये घर बापू धोरे भिजवा दिया करता, बनवारी सोच्या के ताऊ के चार पैग लग लिए इब रंग मै आ गया वो पाकिस्तान की लडाई वाली बात पूछ ही लूँ, उसने ताऊ ते पूछ्या -ताऊ वो पाकिस्तान वाली लडाई की के बात थी? इतने मै कप्तान सिंग बोल्या -अरे पाकिस्तान की लडाई की बात- मनफूल सिंग बडा बहादर माणस सै यो तो लाहोर से सुसरा पकिस्तानियाँ कि भैंस भी खोल ल्याया था, शिम्भू कूद के पडा -अच्छा यो बात सै-तो ताऊ तन्ने पाकिस्तान मैं भी भैंस ही पाई ओर कुछ नहीं मिल्या लाने के लिए,-ताऊ बोल्या -यो बात आज ख़तम करो युद्ध की बात किसी ओर दिन सुनाउंगा, आज माफ़ करो, ल्याओ रे भाई खाना,लगाओ जल्दी,समीर भाई नै भी भूख लग रही होगी, ओर तुमने चाहिए तो पूरा कैरेट पड्या सै ले लियो,पण कल काम के लायक रहियो....................नहीं तो 

आपका

रमलू लुहार 

"रूकावट के लिए खेद है"-फौजी ताऊ मनफूल सिंग

ताऊ टुब बेल पार्टी कि तेयारी में लग रहया सै, इधर इलेक्शन भी चल रहया सै, चारुं तरफ का काम बढ़ गया सै, आप सोच रहे होगे के  फौजी ताऊ मनफूल सिंग कहाँ गायब हो गया, भाई इलेकशण का काम सै. थोडा इंतजार करो,मन्ने यो कविताई लिखी सै आपके लिए,यो टीवी पे जिस तरियां दिखाया करते ना वो  ही सै,"रूकावट के लिए खेद है"। आपके समझ में आ जा तो बढ़िया बात सै, और ना आवे तो धैर्य ना खोके उत्साह बढ़ाना।आपने ताऊ की राम-राम,कविताई का आनंद लो ,
ताऊ बोल्या मै पूछूं था


बता तू अकल बड़ी के भैंस........................
मास्टर जी ने सवाल लगाया के बतावे सुरेश
भैंस  में तै  पाड़ी  घटाई,झोट्टा रह गया शेष
बता तू अकल बड़ी के भैंस..........................


जाडा   घणा   पड़े  था   भाई, खूब  लगाई रेस
पहले  तो  कम्बल  ओढ़या, उस पे डाला खेस
बता तू अकल बड़ी के भैंस..........................


राधे नै  कुत्ते के पिल्लै  पकड़े, उसके  मुंडे केश
बिना उस्तरे नाइ मुंड गया ताऊ पे चल्या केश
बता तू अकल बड़ी के भैंस............................


बिना  चक्के  की  गाड्डी चाली रेल उडी परदेश
गार्ड  बेचारा  खड़ा  रह  गया  देखे  बाट   नरेश
बता तू अकल बड़ी के भैंस............................


एक पेड़ पे चालीस चिडिया तभी घटना घटी विशेष
शिकारी  की  एक गोली चाली बच गई कितनी शेष
बता तू अकल बड़ी के भैंस.................................


आपका
रमलू लुहार

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2009

लुटेरों के चंगुल में मत फंस जाणा ओर अपने ताऊ को ही वोट देना-उड़न तश्तरी -फौजी ताऊ की सभा में

खुशखबरी-खुशखबरी-बनवारी मंच ते माइक में बोलणे लग रह्या सै-जो उड़न तश्तरी आज म्हारे बीच में आण वाली सै वो गुडगाँव इंटर नेशनल हवाई अड्डे तक पहुच गई सै, तम शांति ते बैठो, आज अपने समीर लाल जी की आम सभा सै, गाँधी जी ओर लाल बहादुर शास्त्री दोनों का जनम दिन सै बहोत ही सुथरा दिन सै,गाँधी जी देश को आजाद कराया अंग्रेजों को भगाया ओर शास्त्री जी नै पाकिस्तान का बैंड बजाया,दोनों महापुरुषों का हम आदर करे सै-बनवारी का भाषण चाल रहया सै,मै आपने जरा पब्लिक के तरफ ले चलूँ, पब्लिक एक दम खचा-खच भारी सै ,सकुल के मैदान में चारों तरफ लाइट ही लाइट जग मग करण लग रही सै,ताऊ के छोरों नै भी जोरदार इंतजाम कर दिया,इब तो ओर कोई नहीं कह सके के म्हारे गाम के छोरे नालायक सै, सारे कार्यकर्ता बिल्ला लगाये पब्लिक नै सँभालने लग रहे सै,ताऊ नै पूरी छोले -चाय-पकोडे की स्टाल सकुल कने मंदर आले पीपल के नीचे लगवा दी,पाणी के टैंकर खड़े कर दिए और पब्लिक चाय नसते का मजा ले रही सै, गांव की बूढी लुगाइयां अपने पीढे घर से ला के सजा के बैठी सै, संतरा ताई नै बोल्ली-ऍ जी यो उड़न तश्तरी किसी हो सै,ताई बोल्ली-ये बीरा मन्ने के पता ये छोरे कह रहे थे भोत बड़ी हो सै ओर नु घुमती आवे सै, पहले आसमान मै गोल-गोल चक्कर कटेगी फेर सकुल के मैदान  मै उतरेगी, चन्द्कोर बोल्ली-ताई कदे वो तो नहीं सै जो कई साल पहले उतरया था,के बोल्ले थे "सकाईलेब", ना-ना वो कोणी, तन्ने ताऊ इतना बावला लगे सै?वो तो सारे काम सोच समझ के करे सै,यो के हुयी कदे दो चार घूंट लगा ले आखर फौजी जो सै, यो चर्चा ओरतों के बीच में चल रही सै, सब अपने -अपने तरीके सै उड़न तश्तरी के बारे में अंदाजा लगा रहे सै, के कैसी होगी,?इधर ताऊ,रमलू,परमानद जी ओर भी घणे सारे लोग हवाई अड्डे पहुचगे उड़न तस्तरी का सवागत करण खातिर,हवाई अड्डे पर समीर लाल जी पहुचे तो सबने उनका स्वागत किया,ताऊ नै भी अपना आशीर्वाद दिया ओर बोल्या-भाई तुने तो बहुत बढ़िया काम कर दिया जो आ गया,सारे हवाई अड्डे से गाम में सभा स्थल पे पहुचे बनवारी का भाषण चालू  ही था, सबने समीर लाल उर्फ़ उड़न तश्तरी का सुवागत किया, रमलू मंच का संचालन करने लगा-भाइयों ओर बहनों मेरे बुजुर्गों बाहर गाम ते आये हुए साथियों इब म्हारे बीच कनाडा से भाई समीर लाल जी आ चुके सै, लोग इनने ही उड़न तश्तरी के नाम ते जाने सै,इब मै आप लोगो का टैम ख़राब ना करके सीधा माइक समीर लाल जी ने  सौंपता हूँ, फार्मेलिटी में ज्यादा टैम ख़राब होता है, आप इनने ही सुनो, यो बोल  के रमलू नै माइक समीर लाल के हाथ  में सौंप दिया,
समीर लाल नै बोलना चालू करया- मेरे भाईयों ओर बहनों ताऊ-ताई,रमलू, परमानन्द जी ओर गाम के लोगो मै भी आपके बीच का ही छोरा सूं ,देश ते बाहर काम करण चला गया ओर उत ही बस गया,मै तो आप लोगो ते मिलने के लिए आया सूं, ताऊ का इलेक्शन तो एक बहाना सै,ताऊ जी इलेक्शन में खडे हुए बड़ी अच्छी बात है,आज देश नै ऐसा नेता चाहिए जो सच्चा हो इमानदार हो गरीब आदमी की मज़बूरी ओर उसकी भूख नै समझ सके,जो कारीगर की दुःख तकलीफ नै समझ सके, आज म्हारे देश के दो महापुरुषों का जनम दिन है,एक तो बापू,दूसरा शास्त्री जी,दोनों ही ईमानदारी ओर देश भक्ति की एक बहुत बडी मिशाल थे,दोनों ने ही अपना जीवन सादगी के साथ बिताया,गाँधी जी नै तो भारतवासियों का दर्द ओर गरीबी को महसूस करने के लिए लंगोटी ही पहननी चालू कर दी थी, ओर वे कहते थे की भारत की आत्मा तो गावं में ही बसती है,गावं का विकास होगा तो सारे देश का विकास हो जायेगा, ओर कैसे होगा ये बात उन्होंने गोली लगने के एक दिन पहले ही लिख दी थी,आज म्हारे देश में अमीर ओर गरीब की खाई बढती जा रही सै,अमीर ओर अमीर होता जा रह्या सै, गरीब ओर गरीब होता जा रह्या सै,मरण तो म्हारे जैसे लोगों का ही हो रह्या सै,आज भी देश में कई करोड़ ऐसे सै जिनने खाने को दाना नही मिल पाता, देश नै आजाद हुए ६३ साल हो चुके पण ये नेता अपना ही घर भरने में लग रहे सै,गरीब की तो कोई चिंता ही नही सै,सरकार में इसे -इसे मंत्री सै जो एक दिन रहने के लिए एक लाख रुपया खर्च कर रहे सै ओर यहाँ गरीब की झोपडी में दिया जलाने के लीये भी तेल कोणी,बड़े शरम की बात सै, जो हवाई जहाज में जाये सै वो भी इनने भेड़ बकरी ही दिखे सै,म्हारे जैसे सड़क पे चलने वाले तो इनने दीखते ही कोणी होंगे,ओर ये म्हारे देश के कर्णधार सै,यो देश नै किसा चलावेंगे? आज जरुरत सै देश ने गाँधी जी जैसी सोच के आदमी की आज जरुरत सै देश ने लाल बहादुर शास्त्री जैसी सोच के आदमी की,जो गरीबों का दुःख दर्द समझ सके,भाईयों मै कोई नेता तो नही सूं पण जो मेरे मन में आया आपने कह दिया,अपने रिटायर हवालदार फौजी ताऊ मनफूल सिंग जी सच्चे-इमानदार ओर मेहनतकश मनमौजी किसम के आदमी सै,इनने मेरे ते ज्यादा तो आप ही जानते हो, मै तो इतनी कहने आया हूँ इनको कप प्लेट छाप पे बटन दबा के जिताओ, ये आपको खूब सेवा करेंगे,सेवा करना तो इनका पेशा ही सै पहले तो फौज में देश की सेवा करी फेर रिटायर होके गावं की सेवा कर रहे सै,इब आप जीता दोगे तो पुरे हलके की सेवा करेंगे,मेरी तो आपसे यो ही विनती सै, बड़े बड़े पैसे वाले लोग ताऊ के सामने खड़े सै वो आपने बहकाने की कोशिश करेंगे वोट खरीदने की कोशिश करेंगे पण आप लोग इन लोकतंत्र के लुटेरों के चंगुल में मत फंस जाणा ओर अपने ताऊ को ही वोट देना,आप सब नै धन्यवाद जो आपने इतना प्यार ओर आशीर्वाद मुझे दिया,मै आपका आभारी सूं फेर मिलेंगे, एक बर ताऊ नै जिताओ,आप सबने मेरी राम-राम.
(कल ताऊ नै उड़न तश्तरी के सुवागत मै अपने टुबबेल पे एक पार्टी रखी सै,उसका आँखों देखा हाल आपको कल सुनावेंगे,सबको राम-राम)

गुरुवार, 1 अक्टूबर 2009

हम मरे कोणी-म्हारे तो साल में ३६५ दिन सै-जो एक दिन श्राद्ध करोगे??? फौजी ताऊ मनफूल सिंग

ताऊ के इलेक्शन की तैयारी जोर शोर ते चल रही सै,उड़न तश्तरी ताऊ के चुनाव परचार में  आ रही सै, इस लिए सारे गाम के लोग आम सभा की तैयारी करण लग रहे सै,ताऊ ने सरपंच बुला नै बुला कै कह दिया सै के पुरे गाम में मुनादी करवा दियो के  कोई भी शख्स आजा रात का दूध नहीं जमावेगा,जिसके घर में जितना भी फालतू दूध होगा वो ग्राम पंचायत में आ के जमा करवा जाये,क्योंकि उड़न तश्तरी चुनाव प्रचार में आ रही सै,तो लोग भी घणे आवेंगे उनके लिए चाय पाणी कि बेवस्था करणी पड़ेगी,ओर जिसके भी घर में फालतू खाट ओर हुक्का सै वो भी चौपाल पे पहुंचा दे, यो मुनादी सारे गाम में बनवारी भी कर आया, उसके अभी रमलू की काल की दी हुयी बोतल का नशा नहीं उतरा सै,सारे काम हांजी-हाजी कह के बड़े मजे से कर रहया सै,रमलू उड़न तश्तरी के प्रोग्राम की परमिशन लेने मिनी सचिवालय गया हुआ सै, गाम के बीच में मंच बनाया गया सै सकुल के खेल के मैदान मै, मतबल मामला जोर ते ही चल रहया सै.इतनी देर में रामेषर आया ताऊ धोरे ओर बोल्या- ताऊ जल्दी चाल तेरा बुलावा हो रह्या सै,चौपाल में,के बात हो गई -ताऊ बोल्या,रामेषर बोल्या-ताऊ बात तो कोई बड़ी नहीं सै,आज बूढों का दिन सै, ताऊ बोल्या-अरे बावली बूच बूढों का दिन सदा ही रहवे सै, रात तो सारी खांसते निकल जा ओर दिन में कोई सोणे नहीं दे,यो के बला सै,रामेषर बोल्या-ताऊ दुनिया के सारे बूढों की पंचायत नै मिल कै फैसला करया सै के एक अक्तूबर नै हर साल बूढों को याद किया जायेगा,उनके बारे में सोच्या जायेगा,आज सरकार की तरफ ते यो दिन मनाया जा रहया सै,आप चालो, ताऊ चौपाल पे पहुचे तो गाम के सारे बूढों को इकट्ठा कर राख्या था, सरपंच ने ताऊ ते राम-राम करी ओर बोल्या - म्हारे गाम के बुजुर्ग लोगो इब म्हारे बीच में रिटायर फौजी ताऊ मनफूल सिंग जी आ चुके है,मन्ने जीतनी बात कहनी थी वो कह ली, इब ताऊ आपने वृद्ध दिवस के बारे में बतावेंगे, हम ताऊ का सुवागत करते है, ताऊ भी म्हारा घाट कोणी,उसने भी माइक संभाला ओर बोल्या-गाम के सारे बड़े बूढों ते मेरी राम-राम,भाईयों मै तो इलेक्शन की तैयारी में लाग रह्या थो के रामेषर बुला लाया के ताऊ आज बूढों का दिन आ रह्या सै, आपने सरपंच चौपाल पे बुला रह्या सै,मै भी सोच मै पड़ गया  के म्हारे हरियाणे दिन आणे का मतबल ऊपर जाने की बात होया करे मै भी सोचूं था के किस बूढे-बूढी का दिन आ गया. भाईयों एक बात मेरी समझ में नहीं आती के किस देश के बूढों नै यो दिन फैनल करया के आज बूढों का दिन मनाना है ओर इसकी जरुरत क्यों पड़ गई? म्हारे तो देश में राज ही बूढों का सै,जो भी फैसले ले सै,सारे बूढे ही मिल के ले सै, लग भग जितने भी परधान मंत्री हुए सारे ही बूढे थे ओर दूर मत जा यो म्हारे गाम का सरपंच सै बंशी यो नेहरु के ज़माने में भी सरपंच था ओर आज सरदार जी के ज़माने में भी सरपंच ही सै, इब बताओ इतने साल ते इसने सरपंची नहीं छोड़ी सै, यो ही मजे ले रहया सै बैरी ओर म्हारे गाम के जवान चाहते भी नहीं के बंशी नै छोड़ कोई दूसरा सरपंच बन जा,क्यूँ के यो सब का ख्याल रखे सै,म्हारे गाम के किसी बूढे नै कोई तकलीफ सै तो बताओ, के छोरा परेशान करे सै के बहु रोटी ना दे या ओर कोई समस्या? कोई नहीं बोल्या तो शिम्भू बोल्या-ताऊ हमने अपने छोरे-छोरियों को जलम ते ही यो बात सिखाई है के बडो बूढों की बात मानना उनकी हुकुम अदूली मत करना,म्हारे गाम ते ब्याह के भी कोई बेटी सासरे जा सै उसने भी बड़ी बूढी समझावे सै के बेटी बड़े बूढों का आदर करना कदे यो उलहना नहीं आणा चाहिए, म्हारे गाम तो कोई भी छोरा शहर में पढ़ने जावे सै,उसने कोई भी काम शहर का बता दो वो शाम नै करके लावे सै, म्हारे गाम में तो चले ही बूढों की सै ओर यो साल में एक दिन बूढों के नाम का नया रोला करया सै, यो बोल्लो के साल में ३६५ दिन बूढों की सेवा करो उसने याद रखो,भूलो मत, ताऊ बोल्या -भाई हमने तो कोई परेशानी कोणी,म्हारे इलेक्शन का भी इन जवानो ने संभाल रख्या है,ओर तो कहवे सै के ताऊ तू चिंता ना कर मौज कर हम सब कुछ संभाल लेंगे, तो भाइयों हम तो इब्बे जिन्दा सै मरे कोणी जो म्हारा साल में एक दिन श्राद्ध करोगे, म्हारे तो साल में ३६५ दिन सै,सारे गाम के छोरे दिन हो या रात ताऊ -ताऊ ही कहते रह सै,यो काम तो सै अंग्रेजन का जिसके बूढे जुवानी इसे करम करे सै के बुढापे में कोई उनने पूछता कोणी जब ही एक दिन यूँ बनाया सै के बेटे-बेटी साल में एक बार मिल जा आके, चालो भाई हो गयी बूढों की पंचायत,अपने अपने घर नै जाओ ओर बहुओं के हाथ ते गरम -गरम रोटी खाओ,अगर कोई शिकायत हो तो आके मन्ने कहो ओर ज्यादा बुढा दिन मनाना सै तो आके फेर शाम नै चौपाल पे मिलो,अपनी जुवान करण वाली दुवाई तैयार पावेगी,सब नै मेरी राम-राम कल बड़ी पंचायत मै आण की मत भूलियो.


आपका
रमलू लुहार


(फोटो गूगल से साभार)

बुधवार, 30 सितंबर 2009

फौजी ताऊ मनफूल सिंग के इलेक्सन परचार में उड़न तस्तरी -रमलू नै दी खबर

ताऊ और सारे कार्यकर्ता सूबे से ही अपणे काम में लग लिए, कोई अपनी मोटर सायकिल ते तो कोई,अपणी सायकिल ते ही आ रह्या सै ताऊ के प्रचार में, ताऊ सबने काम बाँट रह्या था किसने किधर जाणा सै, रमलू आज मिनी सचिवालय गया सै ताऊ का प्रतिनिधि बण के,वहां पे चुनाव चिन्ह मिलेंगे,रामेषर ने ते कह्या-ताऊ राम-राम ,ताऊ बोल्या राम-राम भाई राम-राम, बनवारी नहीं दिखाता कड़े चला गया सुसरा ,रामेषर बोल्या,बनवारी तो भैंसा नै सानी ही डाल रह्या सै..ताऊ ने आवाज लगाई - अरे बनवारी के भैंसा नै भी साथ ले जा गा प्रचार में, सुसरे तन्ने तीन घंटे हो गए सान्नी गेरते ने, इब्बे आया ताऊ- बनवारी बोल्या, थोडी देर बाद रमलू भी आ गया, ताऊ ने पूछ्या- के निशान मिल्या सै? रमलू बोल्या - कप प्लेट मिल्या सै, ताऊ बोल्या - यार यो तो बहुत ही अच्छा निशान सै हर घर में पावे सै, शिम्भू बोल्या- हाँ ताऊ निशान तो बढ़िया मिल्या सै, फेर एकाध ने बिल्ले - विल्ले छ्पवान भेज दे. रमलू बोल्या - ताऊ परचार सामग्री की चिंता कोणी परमानद जी नै कह दिया सै के कल ते पहुच जायेगी, तम अपणा परचार चालू रखो, यो सब काम मेरे पे छोड़ दो, रामेषर बोल्या- चालो भाई एक तो समस्या हल हुयी,ताऊ बोल्या-रमलू कल का दौरे का प्रोग्राम बना लिया, हाँ ताऊ सब तेयार सै, कल आपां सेक्टर वाले एरिये में चलेगे, वहां सब जगह एक -एक सभा ले लेगे, एक सभा डी.एल.ऍफ़. में ले लेंगे, डुंडा हेडा, उद्योग विहार, बस टेंड, महरोली रोड के गोल चक्कर पे, मै आज रात नै, सारी कहानी फिट करूँ सूं, बनवारी बोल्या -ताऊ कल अपने पतरकार वार्ता में कही थी के कोई बाहर बिदेश ते भी आवेगा चुनाव परचार के लिए,?ताऊ  बोल्या-हाँ भाई आवेगा, कल ही मेरे धोरे उसकी मेल आई सै,रामेसर बोल्या -तो ताऊ के नाम से इसका ? ताऊ बोल्या-अरे भाई उसने उड़न तश्तरी कहवे सै, शिम्भू बोल्या -ताऊ यो नाम तो बहुत सुणयोड़ा सै, ये जो आकाश मै उड़ती फिरे है उसने ही कहवे सै, तो ताऊ फेर ये परचार किस तरियां करेगी, के इसके भी हाथ मुह हो सै? अरे-अरे रुक जा बावली बूच-ताऊ बोल्या-यो भी तो उस तरियां उड़न वाला ही सै, पर यो अपणा ही देशी छोरा सै,इसका नाम समीर लाल सै, लोग इसने इंटरनेट की किताब के नाम ते जाने सै,यो इन्टर नेट में रोज लिखे सै,बिदेश में रहे सै, जब आणा हो तो उड़ के ही आता है, भोत बड़ा आदमी है, गरीबों के लिए कुछ करने की इसके मन में ललक है, कविता -कहानी -किस्से खूब लिखे सै, मै तो सुन्या सै के इसने किताब भी लिखी सै, मन्ने तो इस ते एक बार कही थी कहते मान गया, बोल्या "ताऊ लड़ ले इलेक्शन जब मेरी जरुरत पड़े बुला लियो, ओर तो राम-राम भी कही सै, सारे गाम वाला ते,रामेषर बोया-यो तो ताऊ भोत अच्छी बात सै, आपने सारी बता दी, तो मै भी उड़न तस्तरी ही समझू था, तो फेर पोस्टर छपवाओ ओर परचार चालू करो २ तारीख नै बापू वाली जयेंती पे गाम में उड़न तस्तरी की आम सभा की तैयारी  करो -ताऊ बोल्या, यो ले ताऊ इब ते ही तैयारी चालू होयगी- अरी ताई २ तारीख ने उड़न तस्तरी की आम सभा सै,यो बिदेश ते आवेगी, अपनी सारी बुड्ढी सहेलियों नै बता देना शिम्भू बोल्या, यो ले या भी ठीक रही तुने प्रचार म्हारे घर ते चालू कर दिया, रमलू बोल्या - ताऊ सभा की तो परमिशन लेनी पड़ेगी, तो तू परमिशन ले ओर हम आम सभा की तैयारी सुरु करे सै- ताऊ बोल्या, चालो भाई अपणे -अपणे काम ते लगो,काम ज्यादा सै और बखत कम सै-रामेषर बोल्या, बनवारी धीरे सै बोल्या-ताऊ एक बोतल रम की ही दे दे सारे दो-दो घूंट ले लेंगे-हाथ पैरां में बडा दर्द सै, नहीं तो फेर इस तरियां म्हारे ते काम होगा नहीं, ताऊ बोल्या जा चुपचाप रमलू धोरे ले ओर रोला मत ना करियो, अपणे चुपचाप घूंट मारो ओर काम पे लग जाओ कोई शिकायत नहीं आणि चाहिए नहीं तो सुसरो मन्ने बदनाम करवाओगे, रमलू दे दिए रे ताऊ बोल्या, अब उड़न तस्तरी आणे वाली सै काम पे लग जाओ, अरे यो रिटायर फौजी ताऊ मनफूल सिंग का  इलेकसन सै, किसी नत्थू खैरे का नही, रमलू बनवारी लोगो नै बोतल देन गया सै, चालो यार आपां भी दो चार पैग मार के तबियत हरी करें, 

आपका 
रमलू लुहार   

फोटो गूगल से साभार

दारू चलनी चाहिए-यो म्हारे जैसे बुड्ढों के टैम-टैम पे काम आवे सै-फौजी ताऊ मनफूल सिंग पत्रकार वार्ता में

ताऊ की चौपाल में आज ताऊ के इलेक्शन की पहली प्रेस वार्ता सै, ताऊ नै पूरा इंतजाम करवा दिया और चौपाल पे बहुत सारी खाट लगाव दी,जिसमे आने वाले पत्रकार और मेहमान- कार्यकर्ता बैठेंगे, रमलू ताऊ नै पत्रकार वार्ता की बारीकी सिखाने लग रहा सै, किस सवाल का जवाब देना सै, किसका जवाब टाल देना सै, बिदेशी पत्रकार भी आ रहे सै, वो भी ताऊ का अनोखा इलेक्शन देखना चावे सै, उनके लिए भी ताऊ नै ब्रेड बिस्कुट का इंतजाम कर राख्या सै। 

आच्छी तगडी भीड़ इकट्ठी हो रही सै, पूरा गाम ही इकट्ठा हो रह्या सै, ताई भी अपनी सहेलियों को लेकर तैयार है, सारे पत्रकार टी.वी. चैनल वाले अपनी -अपनी गाड़ियों में पहुच रहे है, ये देश का पहली पत्रकार वार्ता है, जो खुले में पूरे गाम की जनता के बीच हो रही सै, बनवारी,रामेसर,शिम्भू,झोट्टा, पाडा सारे ही आने वालों की खातिर में लग रहे सै, चालो भाई पत्रकारों का कैमरा विमर सब सेट हो गया सै, पत्रकार वार्ता चालू होने वाली है, ताई भी घूँघट निकाल के ताऊ के बगल में आके बैठ गई, रमलू सारा मसोदा ले के ताऊ के पीछे बैठा सै।  

इब पत्रकार वार्ता चालू हो रही सै,ताऊ ने माईक संभल लिया ओर बोल्या-भईयों आपने सबने मेरा राम-राम, मेरे इलेक्शन में खडे होणे का मतबल यो सै के जो गरीब मजदूर,कारीगर, लोग सै उनकी सुनने वाला कोई नहीं सै, कोई भी पार्टी इनने टिकिट नहीं देती,लेकिन वोट जरुर लेती है, मै इलेक्शन में इसलिए खडा हुआ के पैसे वाले लोग गरीब लोगों के वोट का बेजा इस्तेमाल करते है,,मै भी कारीगर समाज से ही हूँ, मन्ने पता सै के इनकी तकलीफ के सै, इनकी तकलीफ दूर कारने के लिए मै पुरजोर परयास करूँगा, आप मन्ने अपना वोट दे के एक बर जितवा बस दो फेर सारा काम-दुःख तकलीफ मेरे पे छोड़ दो, आज तक आपके हमेशा काम आया सूं, और इब भी काम आऊंगा, मै आपके सामने दोनों हाथ जोड़ के अपनी उम्मीदवारी घोषित करता हूँ, यो आपका ताऊ सै जो किसी के भी दबाव मै नहीं आणे वाला, आप मन्ने अपणा वोट दे के चुनाव जिताओ, भाई गाम वाले सरे शांत बैठेंगे, कोई रोला नहीं करेगा, हाँ भाई पत्रकार लोगो आप अपने सवाल इब पूछ सकते हो पूछो,

टाईम्स ऑफ़ इंडिया का पत्रकार बोल्या- ताऊ मनफूल सिंग जी आप ये बताओ के आपने रास्ट्रीय सहारा पार्टी से ही अपनी उम्मीदवारी क्यों की? आपने और भी दूसरी बड़ी पार्टी टिकट दे रही थी?
ताऊ बोल्या-देखो देस के भीतर अनेक राजनैतिक पार्टिया है, लेकिन उन सबका टिकिट देने का आधार प्रत्याशी की आर्थिक स्थिति ओर पार्टी को चंदा कितना दे रहया होता है, हमारी पार्टी में उन सभी लोगों को टिकट दिया है जिनके खान-दान में किसी ने विधान सभा का मुह नही देखा है, हमारी पार्टी में आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सताए हुए लोगो नै परमुख स्थान दिया सै, इस पार्टी में वो लोग सै जो एक दिन की दिहाडी के लिये कमरतोड़  मेहनत करते है, चाहे वो कोई भी जात-धर्म -संप्रदाय का है, पर सबके काम करने के औजार तो एक ही है ना, इस पार्टी में भाई भतीजावाद नहीं सै और हमारे पार्टी के परधान परमानन्द जी नै घोषणा कर दी है के वे कभी भी इलेक्शन नहीं लडेंगे और भाई भतीजा वाद को कभी पार्टी में नहीं होणे देंगे, पार्टी हमेशा काबिल लोगों को ही टिकट देगी, तो इस लिए मैंने रा.सा.पा में आके इलेक्शन लड़ने की सोची।

आपको पार्टी के पास विकास की क्या योजना है -पंजाब केशरी के पत्रकार ने पूछा,

ताऊ बोल्या-  म्हारी योजना यो है जी के हम अपने विधान सभा के सभी गावों को शहर की सारी सुविधा उपलब्ध कराएँगे, कानून बेवस्था में सुधर लायेंगे, खरगोश को बन्दर बनाने वाली पुलिस के ढांचे में सुधार करेंगे, गावों में ही रोजगार के साधन मुहईया करवाएंगे, एक आम नागरिक की बेहतरी के लिए सारे काम करेंगे. मै कोई नेता तो हूँ नहीं-ना ही मेरे खान-दान में कोई था इसलिए झूठे आश्वासन तो में दूंगा नहीं, जितने के बाद करके दिखाऊंगा।

हरिभूमि ने पूछा-ताऊ आपको इलेक्शन लड़ने के लिए पैसे कहाँ से मिल रहे है?

ताऊ बोल्या- सच बोलूं !! पर्चे बेनर तो पार्टी की तरफ से है, गाड्डी-घोडे का इंतजाम ये सारे  यार- दोस्तों -रिश्तेदारों ने किया सै, और हाथ खर्च के लिए ताई नै अपने गुल्लक ते निकाल के दिए सै।

तो ताऊ दारू बंदी के बारे में आपकी क्या राय है? गाम के छोरे दारू पी के बिगड़ रहे है,

ताऊ- भाई !! दारू बंदी के बारे में तो मेरे राय ठीक सै, दारू चलनी चाहिए वो म्हारे जैसे बुड्ढों के टैम -टैम पे काम आवे सै, ओर अगर फौजी धोरे दारु का कोटा ही ना तो सारा मामला गड-बड,इस लिए ये तो चलनी चाहिए,ओर छोरों को इसे नहीं  पीनी चाहिए,

हिंदुस्तान टाईम्स - ताऊ ! आपके परचार के लिए बाहर से कोण- कोण से स्टार आ रहे  हैं ,सभी पार्टियाँ तो बड़े बड़े फिलम स्टार को बुला रही है, आपक किसको बुला रहे है,

ताऊ- भाई म्हारे  प्रचार में तो वो ही आवेगा जिसके दिल में गरीब मजदूरों के लिए दर्द है, म्हारे धोरे भी बड़े -बड़े स्टार सै, देश ओर विदेशों से भी म्हारे परचार में हस्तियां आ रही सै,

जी.टी.वी.-तो ताऊ कोण -कोण आ रहा है जरा नाम का खुलासा तो करो,

ताऊ - जिनकी मंजूरी  आई  है उसमे सबसे पहले कनाडा से उड़न तस्तरी, सूरत से लाफ्टर शो विनर अलबेला खत्री, भिलाई से  बी.एस. पावला, अभनपुर से ललित शर्मा, दुर्ग से संजीव तिवारी ओर रायपुर से अनिल पुसदकर की मंजूरी आणि बची  है, उम्मीद है वो भी आ जावेगा,  तो  भाई इब हो गया यो प्रेस कान्फरेंस इब ख़तम करो, और पत्रकार साथियों खाने का इंतजाम है, आप भोजन का आनंद ले के जाणा, रमलू जल्दी तैयारी करवा, कल चुनाव का निशान भी लेने जाणा है। 


आपका 
रमलू लुहार

फोटो गूगल से साभार 

मंगलवार, 29 सितंबर 2009

दारू चलनी चाहिए वो म्हारे जैसे बुड्ढों के टैम -टैम पे काम आवे सै-फौजी ताऊ मनफूल सिंग

ताऊ की चौपाल में आज ताऊ के इलेक्शन की पहली प्रेस वार्ता सै, ताऊ नै पूरा इंतजाम करवा दिया और चौपाल पे बहुत सारी खाट लगाव दी,जिसमे आने वाले पत्रकार और मेहमान- कार्यकर्ता बैठेंगे, रमलू ताऊ नै पत्रकार वार्ता की बारीकी सिखाने लग रहा सै,किस सवाल का जवाब देना सै,किसका जवाब टाल देना सै, बिदेशी पत्रकार भी आ रहे सै, वो भी ताऊ का अनोखा इलेक्शन देखना चावे सै, उनके लिए भी ताऊ नै ब्रेड बिस्कुट का इंतजाम कर राख्या सै, आच्छी तगडी भीड़ इकट्ठी हो रही सै, पूरा गाम ही इकट्ठा हो रह्या सै, ताई भी अपनी सहेलियों को लेकर तैयार है, सारे पत्रकार टी.वी. चैनल वाले अपनी -अपनी गाड़ियों में पहुच रहे है, ये देश का पहली पत्रकार वार्ता है, जो खुले में पुरे गाम की जनता के बीच हो रही सै, बनवारी,रामेसर,शिम्भू,झोट्टा, पाडा सारे ही आने वालों की खातिर में लग रहे सै, चालो भाई पत्रकारों का कैमरा विमर सब सेट हो गया सै, पत्रकार वार्ता चालू होने वाली है, ताई भी घूँघट निकाल के ताऊ के बगल में आके बैठ गई,रमलू सारा मसोदा ले के ताऊ के पीछे बैठा सै, इब पत्रकार वार्ता चालू हो रही सै,ताऊ ने माईक संभल लिया ओर बोल्या-भईयों आपने सबने मेरा राम-राम, मेरे इलेक्शन में खडे होणे का मतबल यो सै के जो गरीब मजदूर,कारीगर, लोग सै उनकी सुनने वाला कोई नहीं सै, कोई भी पार्टी इनने टिकिट नहीं देती,लेकिन वोट जरुर लेती है, मै इलेक्शन में इसलिए खडा हुआ के पैसे वाले लोग गरीब लोगों के वोट का बेजा इस्तेमाल करते है,,मै भी कारीगर समाज से ही हूँ, मन्ने पता सै के इनकी तकलीफ के सै, इनकी तकलीफ दूर कारने के लिए मै पुरजोर परयास करूँगा,आप मन्ने अपना वोट दे के एक बर  जितवा बस दो फेर सारा काम-दुःख तकलीफ मेरे पे छोड़ दो,आज तक आपके हमेशा काम आया सूं,और इब भी काम आऊंगा, मै आके सामने दोनों हाथ जोड़ के अपनी उम्मीदवारी घोषित करता हु, यो आपका ताऊ सै जो किसी के भी दबाव मै नहीं आणे वाला, आप मन्ने अपणा वोट दे के चुनाव जिताओ, भाई गाम वाले सरे शांत बैठेंगे, कोई रोला नहीं करेगा, हाँ भाई पत्रकार लोगो आप अपने सवाल इब पूछ सकते हो पूछो,
टाईम्स ऑफ़ इंडिया का पत्रकार बोल्या- ताऊ मनफूल सिंग जी आप ये बताओ के आपने रास्ट्रीय सहारा पार्टी से ही अपनी उम्मीदवारी क्यों की? आपने और भी दूसरी बड़ी पार्टी टिकट दे रही थी?
ताऊ बोल्या-देखो देस के भीतर अनेक राजनैतिक पार्टिया है, लेकिन उन सबका टिकिट देने का आधार प्रत्याशी की आर्थिक स्थिति ओर पार्टी को चंदा कितना दे रहया होता है, हमारी पार्टी में उन सभी लोगों को टिकट दिया है जिनके खान-दान में किसी ने विधान सभा का मुह नही देखा है, हमारी पार्टी में आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सताए हुए लोगो नै परमुख स्थान दिया सै, इस पार्टी में वो लोग सै जो एक दिन की दिहाडी के लीये कमरतोड़  मेहनत करते है,चाहे वो कोई भी जात-धर्म -संप्रदाय का है, पर सबके काम कारने के औजार तो एक ही है ना,इस पार्टी में भाई भतीजावाद नहीं सै,और हमारे पार्टी के परधान परमानन्द जी नै घोषणा कर दी है के वे कभी भी इलेक्शन नहीं लडेंगे और भाई भतीजा वाद को कभी पार्टी में नहीं होणे देंगे, पार्टी हमेशा काबिल लोगों को ही टिकट देगी, तो इस लिए मैंने रा.सा.पा में आके इलेक्शन लड़ने की सोची ,
आपको पार्टी के पास विकास की क्या योजना है -पंजाब केशरी के पत्रकार ने पूछा,
ताऊ बोल्या-  म्हारी योजना यो है जी के हम अपने विधान सभा के सभी गावों को शहर की सारी सुविधा उपलब्ध कराएँगे, कानून बेवस्था में सुधर लायेंगे, खरगोश को बन्दर बनाने वाली पुलिस के ढांचे में सुधार करेंगे, गावों में ही रोजगार के साधन मुहईया करवाएंगे, एक आम नागरिक की बेहतरी के लिए सारे काम करेंगे. मै कोई नेता तो हूँ नहीं-ना ही मेरे खान-दान में कोई था इसलिए झूठे आश्वासन तो में दूंगा नहीं, जितने के बाद करके दिखाऊंगा,
हरिभूमि ने पूछा-ताऊ आपको इलेक्शन लड़ने के लिए पैसे कहाँ से मिल रहे है?
ताऊ बोल्या- सच बोलूं !! पर्चे बेनर तो पार्टी की तरफ से है, गाड्डी-घोडे का इंतजाम ये सारे  यार- दोस्तों -रिश्तेदारों ने किया सै, और हाथ खर्च के लिए ताई नै अपने गुल्लक ते निकाल के दिए सै,
तो ताऊ दारू बंदी के बारे में आपकी क्या राय है? गाम के छोरे दारू पी के बिगड़ रहे है,
ताऊ- भाई !! दारू बंदी के बारे में तो मेरे राय ठीक सै, दारू चलनी चाहिए वो म्हारे जैसे बुड्ढों के टैम -टैम पे काम आवे सै, ओर अगर फौजी धोरे दारु का कोटा ही ना तो सारा मामला गड-बड,इस लिए ये तो चलनी चाहिए,ओर छोरों को इसे नहीं  पीनी चाहिए,
हिंदुस्तान टाईम्स - ताऊ ! आपके परचार के लिए बाहर से कोण- कोण से स्टार आ रहे  हैं ,सभी पार्टियाँ तो बड़े बड़े फिलम स्टार को बुला रही है, आपक किसको बुला रहे है,
ताऊ- भाई म्हारे  प्रचार में तो वो ही आवेगा जिसके दिल में गरीब मजदूरों के लिए दर्द है, म्हारे धोरे भी बड़े -बड़े स्टार सै, देश ओर विदेशों से भी म्हारे परचार में हस्तियां आ रही सै,
जी.टी.वी.-तो ताऊ कोण -कोण आ रहा है जरा नाम का खुलासा तो करो,
ताऊ - जिनकी मंजूरी  आई  है उसमे सबसे पहले कनाडा से उड़न तस्तरी, सूरत से लाफ्टर शो विनर अलबेला खत्री, भिलाई से  बी.एस. पावला, अभनपुर से ललित शर्मा, दुर्ग से संजीव तिवारी ओर रायपुर से अनिल पुसदकर की मंजूरी आणि बची  है, उम्मीद है वो भी आ जावेगा,  तो  भाई इब हो गया यो प्रेस कान्फरेंस इब ख़तम करो, और पत्रकार साथियों खाने का इंतजाम है, आप भोजन का आनंद ले के जाणा, रमलू जल्दी तैयारी करवा, कल चुनाव का निशान भी लेने जाणा है, 


आपका 
रमलू लुहार

फोटो गूगल से साभार 





सोमवार, 28 सितंबर 2009

जो बटन प्रोबलम कर रहया सै उसने डायरेकट कर दो -फौजी ताऊ मनफूल सिंग का कहणा

सुबह-सुबह ताऊ ने पता चल्या के ब्लोग्वानी बंद हो गयी ताऊ नई भी बड़ा अफ़सोस होया,के क्यूँ बंद होयगी? इसा के हो गया मेरी भी समझ में नहीं आया फेर दो चार लोंगो ने कहानी बताई सारी के सिर्फ एक बटन का ही प्रोब्लम सै, तो यारो जो बटन प्रोब्लम कर रह्या सै उसी ने हटा दो सारा रोला ख़तम,यो मान लो के बटन ही ख़राब हो गया था डायरेकट कर दो, हम भी कभी - कभी घर के बिजली के बटन,टयूबवेल के मोटर के बटन को डायरेकट करते है,यो सारा मामला रेंकिंग का सै पसंद -नापसंद का सै, हमने तो भाई इस ते इतना मतबल कोणी, भाई एक म्हारे जैसे गांव के गंवार की भी बाते पाठको तक पहुच रही सै यो ही म्हारे लिए बड़ी बात है, चाहे उसका माध्यम कोई भी हो, जैसे भी अपनी नाराजी दूर करो ब्लोग्वानी फेर से चालू करो,आज सुबह से ही ठीक नहीं लग रह्या सै, जणू अपना कोई ख़ास आज म्हारे ते बिछड़ गया, मन्ने तो यो समाचार भी अविनाश जी की पोस्ट ते मिल्या, तो लोगो एक बार फेर रिटायर फौजी हवलदार ताऊ मनफूल सिंग का कहणा सै के ब्लोगवाणी चालू करनी चाहिए.
रमलू भी यो ही बात कह रहया सै,

आपका 
रमलू लुहार  

रविवार, 27 सितंबर 2009

जब मै पर्चा दाखिल कर रह्या सूं,तो इलेक्शन तो लडूंगा ही-फौजी ताऊ मनफूल सिंग

रमलू लुहार आज सारे काम जल्दी-जल्दी निपटाने लग रहा था,क्योंकि आज ताऊ को पर्चा भरना है,५ दिन से तैयारी चल रही थी,इलेक्शन में खडा होना कोई मामूली बात तो नहीं है, दो दिन तक तो पावला जी का जनम दिन मनाया कैंटीन की असली दारू थी, बूढों को जयादा चढ़ गई, रामेसर और बनवारी तो दो दिन खाट से ही नहीं उठे, बनवारी के दस्त लग गे,उसके दारू गर्मी कर गयी, इब कर गई तो कर गई, सारे के सारे ही बडे से बड़े उत सै,ताऊ तो पहले ही कह रहा था के कम चढाओ पण मान्य ही कोई नहीं, वो कह्या करे ना "चाहे जूते पडो हजार तमाशा घुस के देखेंगे" यो ही हाल इन बूढों का सै,इब इसमें फंस गया रमलू पूरी तैयारी रमलू नै ही करनी पड़ी,हरियाणे का इलेक्शन सै,वो भी गुडगावं विधान सभा सीट का बड़ा मुस्किल काम सै,एक ते एक पैसे वाले लोगो को पार्टियों अपने टिकट दिए हैं,यो अपनी सहारा पार्टी तो गरीबों की पार्टी सै,धन बल का मुकाबला जन बल ते ही हो सके है, तो ताऊ नै अपणे सारे सगे सम्बन्धी-रिश्तेदार-यार-मित्तर नै कह दिया के,कल पर्चा भरण जाणा सै,अपनी अपनी सवारी लेके आ जाईयो, सूबे ते ही सारे आण लग रहे सै, गावं की सीमा में ताऊ नै पूरी छोलों की बेवस्था करवा दी है, गोवर्धन हलवाई नै बैठा दिया,सबको खिलाओ,कोई भूखा नहीं जाणा चाहिए,फालतू कोई खाली पेट चक्कर खा के पडेगा ओर बदनामी ताऊ की होगी, रमलू नै सारा इंतजाम कर लिया पहले ते ही,वो गुरु सुलेमान के अखाडे के ४० पहलवान किराये में कर के आ गया था वो पहुच गए,अखाडे के पहलवानों की सेवा म्हारे यहाँ सारी पार्टियाँ लेती है,कईयों के तो खुद के ही अखाडे है,गाम के छोरे घर ते दूध पी के आ यही जोर लगते है, ३ ट्रेक्टर कर दिए, साउंड सिस्टम लगा दिया, बेनर ओर पोस्टर परमानन्द जी ने भिजवा दिए ओर दारू अपणे कोटे की ताऊ केंटिन ते लेके ही आ गया था, हरियाणे में फोजियों की नफरी ज्यादा है, हर गांव में ५० तो रिटायर फोजी मिल ही जायेंगे,ताऊ नै रिटायर फोजियों की एसोसिअशन से भी कह दिया था पूरी एसोसिएसन ताऊ के समर्थन में है,फोजियों की समस्या है,अगर एक फौजी विधायक बन जायेगा तो चलो अपना फौजी तो सै कुछ तो काम करेगा, यो कह के सारे फौजी भी अपणे साथ सै, ताई नै भी अपनी सारी भायली एकठी कर रखी है,सूबे ते ही घाघरी गोटेदार चमकाए कड़ी है, पूछ रही सै बर-बर में कब चालना सै? ताऊ भी अपनी डरेश लगा के तैयार सै, सर पे पगड़ी फौजी बुसशर्ट और निचे पतलून एक दम नोसे (दूल्हा) सा लग रह्या सै, रमलू नै पर्चा तैयार कर राख्या सै, ताऊ ने यो मिनी सचिवालय में जा के भरना सै, अरे चालो रे !!!!!!!! चालो टैम हो लिया इब चाल भी पडो फेर टैम निकल जायेगा, बनवारी नै जोर लगाया, रामेषर बोल्या - अरे धीरे जोर सुसरे कल तो तेरे दस्त लाग रहे थे, कड़े धोती ही ख़राब करेगा, बनवारी चुप हो गया, रामेषर नै तो साले नै मुफ्त की चौधर चाहिए,खुद तो कुछ करेगा नहीं और दुसरे नै भी नहीं करण देगा,शुम्भु बोल्या, चालो -चालो टैम मत ना लगाओ ताऊ बोल्या,
इब ताऊ का लश्कर निकल पड़या पर्चा दाखिल करण के लिए,भाई रेली की शान देखते ही बणे थी,सबते आगे ताऊ और ताई ट्रेक्टर के अंजन पे बैठे थे नोटों की माला डाल रखी थी, रमलू ट्रेक्टर चलावे था,४० पहलवान ट्रेक्टर के चारों तरफ मोटर सायकिलों पे पीछे ट्रेक्टर,जिप ,ऊंट गाड़ी, जुगाड़ सारी सवारी ही चल रही थी,अपणे ताऊ का टौर ही कुछ ओर सै, ताऊ की रेली में किसान जवान मजदूर रिटायर फौजी सारे ही आ लिए, आगे -आगे "खड़ी चोट बेन्ड पार्टी" का बेन्ड बाजण लगा रह्या है, छोरे भी अपना डी.जे. लेके आ गये,"गाना बजा राख्या है दीवाना राधे का" जोर दार डांस हो रहया है, ताऊ की चारों तरफ रोनक -रोनक, सहर के सरे नागरिकों से ताऊ हाथ जोड़ के राम-राम कर रह्या सै,ताई भी घूँघट में से हाथ निकल के हिला रही सै जणू इब्बे इटली ते ही आई सै, ताऊ का जलुश मिनी सचिवालय पहुँच गया, सिर्फ १० आदमियों ने ही फार्म भरण वाली जगह में जाणे की इजाजत सै,अपणे परधान परमानन्द जी पहले ही पहुच गए थे, ताऊ को फारम भरवाना था, निर्वाचन अधिकारी के सामने ताऊ नै पर्चे पे दस्खत करे, अधिकारी ने पूछ्या-ताऊ इलेक्शन लड़ रहे हो, म्हारे ताऊ का भी दिमाग घूम गया वो बोल्या-"जब मै पर्चा दाखिल कर रह्या सूं,तो इलेक्शन तो लडूंगा ही,नहीं तो या सारी बारात तेरी भुवा नै ब्याहण नै ले के आया सूं," वो बेचारा जवाब सुण के चुप हो गया, ताऊ का पर्चा दाखिल हो गया, बड़ी धूम-धाम सै,सारे पतरकार ताऊ के पीछे कैमरे लेके पड़ गए,बोल्ले ताऊ एकाध बाईट तो दे दे, ताऊ बोल्या " बाईट यूँ सड़क पे नहीं मिल्या करती" कल सारे म्हारे चौपाल पे आओ तो वही पतरकार सम्मलेन होगा खुली चौपाल में," आपको मेरा न्योता है, खाने पीने का पूरा इंतजाम रहेगा,यो कह के ताऊ नै सबसे बिदा ली ओर आगली तैयारी के लिए अपनी मण्डली को लेके गावं नै चल दिए.

मित्रों ताऊ की चौपाल में कल पतरकार वार्ता है, ताऊ रिटायर फौजी हवालदार मनफूल सिंग की आपने भी आना है, सबने ताऊ का निमंत्रण सै,जिसने ताऊ कहनी भूल गए उसने मै कह रह्या सूं,जरुर -जरुर आणा,



आपका 
रमलू लुहार 


(फोटो गूगल से साभार)

सोमवार, 21 सितंबर 2009

पावला जी को पहले जन्मदिन की बधाई,रिटायर फौजी ताऊ मनफूल सिंग की तरफ से


ताऊ बोल्या-अरे सुणियो रे लोगो आज सबके जन्म दिन की की खबर रखने
वाले बी.एस.पावला जी का जनम दिन सै,तमने पता हैं के नहीं
रमलू बोल्या- ताऊ आज तो मन्ने टाइम ही नहीं मिला इन्टरनेट पे जाण का
ताऊ बोल्या-अरे भाई सूबे ते ही पावला जी ने बधाई देने लग रहे हैं लोग चलो हम भी उनको शुभकामनायें दे दे
रमलू बोल्या -ताऊ पावला जी कितने साल के हो गए कुछ पता हैं आपको
ताऊ-बोल्या-जब ते तू किसी को जाणे,उसका जन्म दिन तो तब से समझना चाहिए मेरी तो कल ही बात हुयी थी पावला जी से रात को यो समझ ले कोई १४-१५ घंटे हुए होंगे,इसलिए में समझू सूं के पावला जी कोई आज साँझ तक एक दिन के होही जायेंगे कोई ज्यादा उम्र नही हैं,इब हम तो पके फल हो गए म्हारी भी उम्र लाग जाये पावला जी को,

ताऊ ओर रमलू लुहार ओर पुरे गाम की तरफ से पावला जी को पहले जन्म दिन पे हार्दिक बधाई
रमलू बोल्या-ताऊ फेर आज साँझ नै पार्टी होगी के नहीं,ढाबे वाली?
ताऊ बोल्या-अरे बावला इब पार्टी की बात करे से ,हम हरियाणा में ओर पावला जी भिलाई में
फेर पार्टी किस तरह होगी?
रमलू बोल्या - ताऊ न्यू कर ले पार्टी हम आज मना लेते हैं हरियाणा में ओर जब भिलाई जायेंगे तो पार्टी का बिल पावला जी दे देंगे के भाई तेरे पहले जन्म दिन  की खुसी मनाई थी उसका बिल हैं
ताऊ बोल्या-तू ठीक बोल्या, नु ए कर ले,साँझ ने जब तक बोतल ना खुलेगी तो फेर किसा जन्म दिन,अरे भाई अस्सी ओर तुस्सी नहीं पैग मारे तो मजा किस तरह आवेगा. 
रमलू बोल्या-नहीं ताऊ जन्म दिन जोर शोर से मानेगा तू चिंता मत कर मै इब्बे केंटिन ते बोतल ले के आऊं
ताऊ ओर रमलू लुहार ओर पुरे गाम की तरफ से पावला जी को पहले जन्म दिन पे हार्दिक बधाई वे शतायु हो ताऊ नै भी अपनी उम्र जोड़ दी हैं,मिला के गिन लियो,
खूब जमेगी मिलके, जब बैठेंगे दो दीवाने जमके 

आपका 
रमलू लुहार





रविवार, 20 सितंबर 2009

रिटायर फौजी ताऊ मनफूल सिंग की आप सब को ईद मुबारक

ताऊ नै रमलू ते पूछ्या-रमलू चाँद दिख गया
रमलू बोल्या-ताऊ चाँद तो मै देखता ही रहूँ सूं
ताऊ -अरे बावला आज के चाँद की बात करू सूं
रमलू-आज के चाँद की के बात सै,
ताऊ - अरे तेरे समझ में नहीं आया मै ईद के चाँद की बार करू सूं
रमलू- ओहो ताऊ इब समझ मै आई दिख गया कल ईद सै,कल ईद मनावेंगे जोर दार चलो सबने ईद की बधाई दे दे
आप सबने रमलू ओर  फौजी ताऊ मनफूल सिंग की तरफ से हार्दिक बधाई, हम सब तहे दिल से आपको ईद की मुबारकबाद देते हैं और मासूम अली रज़ा भाई के यंहा ईद की दावत में जायेंगे,
एक बार फिर से सबको ईद मुबारक  

फौजी ताऊ मनफूल सिंग का सिलेक्शन,ताऊ लडेगा इब हरियाणे इलेक्शन


आप सब ने रमलू की राम-राम ,
आज ताऊ की चौपाल साँझ नै फेर जम गयी आज ताऊ तो घर पे ही मोजूद था,दो दिन की गैरहाजिरी ताऊ की हमने लगा रक्खी थी,
शिम्भू नै पूछा-ताऊ आप कहाँ चले गए थे, पुरे दो दिन गायब थे,
ताऊ बोल्या-भाई शिम्भू बात यूँ हैं के वो अपना सै न गुडगांव आला परमानद जांगडा,उसने भाई नई पार्टी बनाई सै,इब इलेक्शन आरे सें न,उसने बुलाया था,पूछे था,के इलेक्शन लड़ना हैं के?
फेर आपने के कह्या? रामेषर बोल्या ,
ताऊ बोल्या-भाई बात यो हैं के पहले तो मेरे मन में इलेक्शन लड़ने की की कोई बात नहीं थी,पण परमानन्द का ब्योहार,काबिलियत पार्टी के उद्देश्य भी मेरे बिचारों से मिलते हैं, और गरीबों की बात भी समझे सै यो समझ के मन्ने इलेक्शन लड़ने का मन बना लिया,
पण ताऊ यो तो बता पार्टी का नाम के सै.-बनवारी बोल्या
ताऊ-भाई पार्टी का नाम से रास्ट्रीय सहारा पार्टी
सुखराम बोल्या-घणा सुथरा नाम सै ताऊ ,गरीबों ,मजदूरों,कामगारों,किसानो नै सहारा तो चाहिए,और या पार्टी एक दिन जरुर सहारा बनेगी,ताऊ यो तू  पहली बर कोई दिमाग आला काम करके आया सै,
ताऊ भोत बढ़िया सोच्या, हमने एक दिन यो भी काम करना था, यो तो आप शास्त्री जी के सपने नै साकार कर रहे सो, आप म्हारे हिंदुस्तान मै पहले आदमी होगे जो एक साथ किसान+जवान+नेता का रोल करोगे, वाह-वाह मौज होयगी,फेर ताऊ हमने के करना पडेगा, रमलू बोल्या
ताऊ बोल्या -रमलू इस इलेक्शन की पूरी जिम्मेदारी लिखा पढ़ी की तन्ने ही संभालनी पड़ेगी ,आज कल चुनाव लड़ना कोई बच्चों का खेल कोणी,कोई पहले की तरह कोणी के फारम भराया ओर खड़े होगे,आज कल तो चुनाव आयोग बहुत कड़े रूल निकल दिए ,मुतन का भी हिसाब देना पडेगा,
बनवारी बोल्या-नु हो गया ताऊ ,हमने तो पता  ही न था,
ताऊ बोल्या -भईयों पार्टी नै मेरी टिकट भी डिक्लेर कर दी सै ,काल के अखबारां में आज्या गा, पण तैयार इब ते ही करनी पड़ेगी,
सारे एक सूर में बोले-हम तैयार हैं ताऊ ,तू जो कहेगा सब हाजिर सै,तू हुकुम कर ,तेरे समर्थम में पूरा गाम खडा सै,हम अपने गम की इज्जत ख़राब थोड़े होने देंगे,जी जान लगा देंगे,यो समझ ले एक कुरुक्षेत्र की लडाई ओर लड़ ली
ताऊ भी राजी हो गया के अपने सारे साथी तैयार सै,
ताऊ बोल्या-तो थम सुन लो,परसुं फारम भरना हैं उसकी तयारी करनी पड़ेगी,
रामेषर बोल्या-ताऊ तन्ने ताई ते पूछ ली इलेक्शन लड़ने की ,मंजूरी ले ली, नहीं तो फेर झाडू ले के मिनी सचिवालय में तेरा जुलुस काढेगी,तेरी तो आरती होगी ओर थोडा भोत प्रसाद हमने भी दिल्वावेगा .
ताऊ बोल्या -रे मन्ने उस ते पूछ लिया से ,उसकी मंजूरी हो गयी सै, जब ही मन्ने थम ते कह्या सै, वो तो अपनी पूरी महिला मण्डली ले के तैयार सै,उसकी राधा स्वामी भजन मण्डली अपने इब कामआवेगी,
शिम्भी बोल्या- तो ताऊ फेर इलेक्शन की तयारी चालू करते हैं, अभी से,
अभी सै ,बावली बूच अभी से किस तरह चालू करेगा ,इसके लिए अपने आदमियों की मीटिंग बुला के पूरी पलानिग करनी पड़ेगी, रमलू नै सलाह दी
शिम्भू बोल्या-अरे रमलू मै नु कहे था के एक-एक- घूंट मार  लेते तो तयारी चालू हो जाती, भाई बिना दवा-
दारु के किसा इलेक्शन,
अरे शर्म कर रे बूढे,गांव बस्या ही नहीं डकैत पहले ही आ गए, रामेषर बोल्या,
ताऊ सबकी बात सुणे था चुपचाप,पुराना फौजी आदमी,नियत डोल ही गयी
ताऊ बोल्या-चालो यार इलेक्शन तो लड़ना ही सै, शिम्भू भी अपना ही आदमी सै, उसका मन मै नहीं मार सकता चालो एक-एक क्यूँ  दो-दो घूंट हो जाये, पर कल सबेरे बैठ के सारा प्रोगराम तय करना सै,ओर शाम नै यहीं पे आके पूरी तयारी का जायजा लेना सै,कड़े कोई कमी रह जाये उसने भी पूरी करनी सै,
चलो रे भाई ठेके पे ,थारी ताई नै बस पता नहीं चलना चाहिए,बाकी सब ठीक सै,
नु कहके सारे इलेक्शन की तयारी करने चल पड़े,

आपका
रमलू लुहार

(फोटो गूगल से साभार)

गुरुवार, 17 सितंबर 2009

फौजी ताऊ की चौपाल में कविताई

शाम नै फेर ताऊ की चौपाल जम गयी पर ताऊ नै आया,सबने चिंता होने लग गयी के ताऊ गया तो गया कहाँ ,
बनवारी बोल्या-रमलू आज ताऊ नहीं आया मन्ने हुक्का भी सिलगा लिया चिलम भी भर लाया,
रमलू बोल्या गया होगा कहीं काम से आ जायेगा, रामेषर बोल्या -रमलू जा पूछ के आ के ताऊ गया कहाँ,
रमलू बोल्या -किस ते पुछू ?
शिम्भू बोल्या -ताई ते पुच्या. मैं कोणी जाता मन्ने ताई ते डर लगे हैं, जाते ही सौ सवाल खडे कर देगी,रमलू बोल्या,
राधे बोल्या - अरे बूढे शिम्बू तेरी अकाल ख़राब हो रही सै, तू बूढी ने ताई बोलता हैं,तेरी तो भाभी लगे सै,
शिम्भू बोल्या-बुढापे में बालक ओर बूढे की एक ही मति हो जाती हैं ओर ताई कह भी दिया तो के फर्क पड़े सै ,म्हारे बच्चों की तो ताई हैं, सोच ले म्हारी भी ताई ही समझ ले ,जा बातों की खराद मत उतर पूछ के आ
रमलू पूछे गया तो ताई नै बताया के सरपंच के साथ जाने वाला था फेर गया के पता नहीं, फेर बोली याद आया वो तो सुखराम के साथ बैल गाड़ी पे बैठ के एक गाम में गया हैं, बतावे था के सुखराम कीछोरी नै उसकी सासू घणी परेशान करे सै,तो गाम मै पंचायत होगी उसमे ही गया सै, रमलू जवाब लेके वापस आया ,ओर सबको ये बात बताई , बनवारी बोल्या- यार आज की साँझ ख़राब हो गयी ताऊ भी ना पाया,
रामेसर बोल्या कैसे ख़राब होय गी, आज मै ताऊ पे एक कविताई बना के लाया हूँ, वो सुनो,
राधे बोल्या -अरे तू कवी कब से हो गया, सुसरे इस्कूल का तो तनने मुह नहीं देख्या,
अरे कविता करने के लिए के इस्कूल जाना जरुरी सै, अपने मन में याद कर ले फेर किसी पढ़े लिखे मास्टर ते डायरी में लिखवा ले, यो बात तो पते की कही,हमारे देश में इतने कवी हुए के उनके पास डिग्री थी ओर बड़े
बड़े ग्रन्थ लिख मारे ,बहोत बढ़िया सुना भाई ,शंभू बोल्या,
रमलू बोल्या - अरे रोला मत मचाओ भाई प्रेम ते कविताई सुनो रामेषर की,
ताऊ मनफूल सिंग का पाया नहीं ठिकाना
इब उस फौजी नै मन्ने ही ढूंढ़ने पडेगा जाना
बहोत बढ़िया वाह -वाह कर दिया कमाल,यो कविता तो इसने म्हारे ताऊ पे बने हैं, चल आगे बोल, रमलू बोल्या
या मिलेगा फेर तन्ने रमलू की गोल मॉल में
या मिलेगा फेर तन्ने गांव के अल्हड चाल में
या मिलेगा फेर तन्ने गुरतुर गोठ की ताल में
या मिलेगा फेर तन्ने एक लोहार की टाल में
या मिलेगा फेर तन्ने ललित डॉट के माल में
या मिलेगा फेर तन्ने ललित वा
बोल्डणी के जाल में
या मिलेगा फेर तन्ने शिल्पकार की पड़ताल में
या मिलेगा फेर तन्ने जंतर-मंतर की हड़ताल में
या मिलेगा फेर तन्ने अपने घर के ही जंजाल में
रोज मिलेगा फेर तन्ने ताऊ साँझ की चोपाल में

वाह भाई वह बड़ी बढ़िया कविता सुनाई, मजा आ गया जी सा आ गया ,बनवारी बोया, चलो भाई आज की सभा ख़त्म करो कल मिलेंगे जब ताऊ आ जायेगा,
सबने राम -राम

बुधवार, 16 सितंबर 2009

मैडल वाला मुक्का जणू इसने ही मारया हैं-ताऊ फौजी मनफूल सिंग की चौपाल

ताऊ के घर के आगे नीम का पेड़ सै,आज साँझ नै अपनी चौपाल फेर जमने लग गई,लगभग सारे लिए पर ताऊ नही आया,सारे ताऊ का इंतजार कर रहे थे ,
रमलू बोल्या -"कल दोपहरे में ताऊ कह गया था के सारे बुड्ढों को बता देना के कल हिन्दी दिवस मान्या गया है सबको अपनी बोली में ही हिन्दी बोलना है,
रामेसर बोल्या-यो ताऊ हिन्दी दिवस कब मना गया हमने तो पता ही नही चाला,
बनवारी बोल्या-अपने हिंदुस्तान हिन्दी दिवस यूँ ही मनाया जाता है, के किसी को पता भी ना चाले और हिन्दी दिवस भी मन जा,
भाई क्यूँ हिन्दी के पीछे पड़ रहे हो, जब दिवस मन गया तो मन गया जब अपने ताऊ नै कै ही दिया सै तो मान भी लो और सारे हिन्दी बोलो,रामधन बोल्या
इतने में ताऊ भी आ गया
शिम्भू बोल्या-ताऊ राम-राम,
ताऊ बोल्या राम-राम,
भाई आज आपने देर हो गयी -रमलू बोल्या
अरे भाई आज म्हारे गाम में गुल्ली डंडा संग के अध्यक्ष का चुनाव था,
बड़ा हंगामा हुआ जैसे लाडू बाँट रहे हों,ताऊ बोल्या
रमलू बोल्या " तो ताऊ आपने भी परधानी का फार्म भरया था के ?
भरया तो था रे भाई, लेकिन हमने तो कुण जितने दे था. वहां तो बड़े बड़े आदमी आये थे लम्बी लम्भी गाड़ियों में बैठ के,
तो ताऊ अपना गुल्ली डंडा के सारे देश में इतन प्रसिद्ध हो गया जो इतने बड़े बड़े आदमी आये थे प्रधानी करने के लिए. रमलू बोल्या,
ताऊ बोल्या-अरे भाई पहले तो हुक्का भरो,अरे बनवारी चिलम सुलगा के नहीं लाया, सुसरे
आज ठाली बैठा हैं,
बनवारी बोल्या-नहीं ताऊ आपका इंतजाम तो मै आपके आने के पहले ही तैयार रखता हूँ, यो ले,
ताऊ नै एक सुट्टा मार के लम्बी सास भरी और बोल्या - अरे भाई यो परधानी इलेक्शन इतना बड़ा हो जायेगा मन्ने पता नहीं था, गाम में जैसे मेला लाग गया हो, सकुल के पास एक ने हलवाई बैठा दिया था,वो पूरी छोले मुफ्त में खिला रहा था,एक कंडीडेट ने जलेबी और दूध की ही दुकान लगा दी थी,अपने मुफ्त में खाए जाओ,
मन्ने हलवाई ते पूछ्या- छोरे तू ये बता तेरे को यहाँ ये मुफ्त की दुकान किसने लगवाई हैं?
हलवाई बोल्या - वो अपना सेठ हैं न बनिया रोडूमल उसने लगवाया हैं, वो भी खडा हैं न परधानी के लिए सबको मुफ्त में देशी घी की जलेभियाँ और इमरती खिला रहा सै,
अरे भाई इसकी बाम्बे में फैक्टरी भी सै ना-ताऊ बोल्या
हलवाई बोल्या - ताऊ इसकी मोबाइल की फेक्ट्री सै, सबने एक -एक मोबाइल भी देगा फ्री में,
तो भाई बता रमलू सारी जिन्दगी बचपने में गुल्ली डंडा हम खेले हमारे बाप दादा खेले और म्हारे बच्चे भी खेल रहे सै,ताऊ बोल्या
ताऊ तो अपने ज़माने में गुल्ली डंडे का एक लम्बर का खिलाडी था तुने तो परधान बनना जरूरी था?तू परधानी करता तो कम ते कम गुल्ली डंडा ओलम्पिक में शामिल तो हो जाता और गोल्ड मैडल अपने देश नै ही मिलता, रामेषर बोल्या,
ताऊ एक लम्बी साँस खीच के बोल्या, अरे भाई देख यो काम तेरे मेरे बस का नहीं हैं, आज जिसके पास पैसे हैं रुतबा हैं दिल्ली की गलियां जिसने जाने सै ये काम उसका हैं, सेन्ट्रल गोरमेंट नै खेल का अलग फंड बना रख्या सै, उसे सै ये खेल संघ नै पैसे देके चलावे सै, जब बिदेशां में कोई बड़ा टूर्नामेंट होसे तो ये हवाई जहाज से जा सै, अपनी लुगाई नै भी साथ ले जा सै चल घूम के आ जाना कहके,
रमलू बोल्या- तो यो बात सै ताऊ, तो अपने बच्चों को भी ले जाते होंगे?
ताऊ बोल्या- तू बच्चों की बात करता हैं ये मालिश करने वाले भी साथ में जाते हैं,नाम खिलाडियों का होता हैं और मालिश अपनी करवाते हैं, जब कोई खिलाडी अपनी मेहनत और काबिलियत ते जीत जाता हैं तो उसके साथ अपनी फोटो ऐसे खिचवाते हैं जैसे यो मैडल इसने ही लड़ के जित्या सै,
बनवारी बोल्या-हाँ मन्ने देख्या था जब अपना बिजेंद्र मैडल जिताया तो सारे फोटू खिचाने ऐसे कूदे के जणू मैडल वाला मुक्का इन्होने ही मारा हैं,
ताऊ बोल्या - के जमाना आ गया, जिसने कभी हाकी देखि नहीं वो हाकी संघ का प्रधान, जिसने कदे तीर धनुष नहीं देखा वो तीरंदाजी का प्रधान जैसे पुरे महाभारत की लडाई में गुरुद्रोन का परथम शिष्य वो ही था,जिसने कदे फुटबाल के एक भी लात नहीं मारी वो फूटबाल संघ का प्रधान,बना फिर रहा हैं,
बनवारी बोल्या- बताओ फेर देश को मैडल किस तरह मिलेगा? बड़े शर्म की बात सै सवा करोड़ की जनता में एक सोने मैडल लिया वो भी अपने दम पे लेके आया तो नाम रह गया नहीं तो नाक कटी की कटी पड़ी थी,
रमलू बोल्या-भाई यो सोचना देश की जनता का काम सै,आगे ऐसे आदमी चुन के भेजो जो जो म्हारे देश के खिलाडीयों के बारे में सोचे और खुद भी इन्टरनेशनल खिलाडी हो, उसका अनुभव ही हमें मैडल दिलाएगा,
ताऊ बोल्या-रमलू तुने सही बात कही ऐसा दिन हमको लाना ही पडेगा।नेताओं के लिए मेरी ये ही सलाह हैं की भाई तुम देश को चलाओ और खिलाडीयों को खेलने दो खेल संघ चलाने दो,चलो रे भाई दिया बत्ती का टैम हो गया सै,
रमलू बोल्या-ताऊ कल की पाकिस्तान की लडाई का किस्सा तो अधुरा ही रह गया,
ताऊ बोल्या-अरे मै अभी जिन्दा हूँ मरया कोणी फेर किसे दिन सुना देंगे,तुमने तो मन्ने इस लफडे में ही उलझा दिया ,चलो रे भाई सबने मेरी राम-राम

आपका

रमलू लुहार

मंगलवार, 15 सितंबर 2009

हिंदी नहीं आती तो भैंस ही चराते :- रिटायर फौजी हवलदार ताऊ मनफूल सिंग कहणा

आज ताऊ दोपहरे में ही आ गया बोल्या रमलू के कर रहया सै ,
मैं बोल्या ताऊ अखबार पढूं सुं,
ताऊ बोल्या के समाचार लिख रखया सै ,
मैं बोल्या ताऊ कल हिन्दी दिवस मनाया गया सै ,उसे का समाचार सै,
ताऊ बोल्या -कोई नई बात?
मैं बोल्या -ताऊ नई बात सै के हिन्दी का परचार और प्रसार होना चाहिए हिन्दी राष्ट्रा भाषा तो बनगी पुरे राष्ट्र की भाषा नहीं बनी से
ताऊ बोल्या -क्यूँ ?
मैं बोल्या - साल में एक बार हल्ला मचावे हैं।हिंदी दिवस मनाया गया अख़बार में आपनी अपनी फोटो छाप ले हैं.हिंदी जिंदाबाद कर ले हैं, हो गया हिंदी दिवस,हिंदी नै सब जगह लागु करने के लिए राजनैतिक इच्छा शक्ति जरुरी हैं.सरकार ने हर जगह बोर्ड लगा रखे हैं, हिंदी लिखो, हिंदी आवेदन करो,हिंदी भाषा का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करो, पण मेरे को कही नहीं लगता के हिंदी सरकारी भाषा भी बनी हैं, सरकार की कथनी करनी में खुद ही फर्क हैं, ये सोच अंग्रेजों ने कम्पूटर भी हिंदी में बना दिया,चलो रे भाई तुम हिंदी वाले भी चलाओ, मेरे को अंग्रेजी बिलकुल ही नहीं आती, फेर भी मैं कम्पूटर चला लेता हूँ.
ताऊ बोल्या-भाई रमलू हिंदी बिना तो काम ही नहीं चलता, अंग्रेजों को भी हिंदुस्तान पे राज करने के लिए हिंदी सीखनी पड़ी थी,नहीं तो के वो राज कर सकते थे, जब उनसे अपना राज वापस लेना था तो हमारे नेताओं को अंग्रेजी सीखनी पड़ी,अंग्रेज तो चले गए राज छोड़ के पण यो अंग्रेजी इनके मत्थे लगा गये, सारे जितने बड़े काम हो सै ना सब अंग्रेज्जी मै हो सै. फेर हिंदी के साथ दोगली निति लगा रखी सै, जिसने अंग्रेजी पढ़ ली वो अफसर ,जिसने हिंदी पढ़ी वो चपरासी, बात ये भी राज की सै ,अगर चपरासी भी अंग्रेजी पढ़ा लिखा लगावेंगे तो साहब अफसरों की काली करतुते पढ़ नहीं लेगा, जाण नहीं जायेगा
मैं बोल्या -ताऊ आपने तो ये बड़े पते की बात कही, चाहे मंत्रालय का काम हो, कोर्ट कचहरी का सारा ही अंग्रेजी में हो से। एक बात और बताऊँ आपने, या लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी जीवन बीमा सरकारी सै ,पर इसके अग्रीमेंट में लिख रखा सै के "विवाद की स्थिति में अंग्रेजी में लिखा हुआ अग्रेमेंट माना जायेगा.
ताऊ बोल्या-ये जीवन बीमा कम्पनी के अंग्रेज फूफे लगा करते थे।'सुसरे पैसे म्हारे और गुण अन्ग्रेज्जो के. के सरकार को नहीं दीखता के यो के करतूत करने लग रहे हैं.
मैं बोल्या-ताऊ आज ते नब्बे साल पहले अंग्रेजी राज में भरतपुर के महाराजा किशन सिंग जी ने अपने स्टेट में हिंदी लागु कर दी थी ,और डुंडी पीटवा दी थी के उनके राज में सरकारी काम सिर्फ हिंदी में ही होगा उसने १९१८ में राज सँभालते ही ये काम किया।राजनैतिक इच्छा शक्ति होना चाहिए बस,
ताऊ बोल्या-म्हारा हरियाणा,राजस्थान,उ।प,बिहार,छात्तिसगड़,हिमाचल,उत्तराखंड,एम्.पी.सारे ही हिंदी भासी परदेश हैं,यहाँ के आदमी को बिना हिंदी के काम ही नहीं चलता,थोडा घणा उच्चारण का ही फर्क हैं, भाई इतने साल हमने फौज नोकरी हिंदी में ही तो करी हैं.नहीं आज भी भैंस ही चराते रहते. भाई हिंदी म्हारी प्राण वायु हैं इसके बिना तो जीने की हम सोच ही नही सकते. आज से अपनी मण्डली वाले सारे बूढों को बोल देना की थोडी बहुत गलती चलेगी फेर हिंदी बोलने की कोशिश पूरी करें.आज म्हारा भी हिंदी दिवस हो गया. बाकी बाद में देखेंगे.

आपका
रमलू लुहार

सोमवार, 14 सितंबर 2009

ताऊ फौजी तन्ने दीखता कोणी ! मुच्छा वाला मर्द

आप सब नै रमलू का राम-राम। भाइयों आज तो मै दूध-धार का काम निपटा चुका। अब टाइम हो रहा है अपनी मण्डली धोरे जाण का.ताऊ आज भिवानी गया था, आ गया होगा,मै पहुँचा अपणे अड्डे ताऊ आली पोली पे , सारे फालतू के लोग वहां काम की बातें करते मिलेंगे, और उनका हेड आपणा ताऊ ,फेर के पूछना सबकीमोज नए टोपिक पे गरमा -गर्म बहस।
इतनी देर में ताऊ भी आ गया ।
ताऊ राम-राम ! बडा तावला आ गया ?
ताऊ बोल्या - अरे इसा कुण सा मै लंका में चला गया था। भिवानी ही तो गया था, कईr काम थे ,पहला तो मुरारी के छोरे ने वा के होया कर कलेक्टर बनाने वाले परीक्षा का फार्म भरना था, और आँख दिखानी थी।गुप्ता हस्पताल में ,
रामेसर बोल्या-फेर दिखा दी आपने ,
ताऊ- हाँ भाई दिखा दी ,डाकदर बोल्या "ताऊ दुवाई लेजा ,इब्बे कुछ नही बिगडा सै.दस-पन्द्र साल और चाल जागी।
बनवारी बोल्या-ताऊ किसा रह्या सफर,ठीक ठाक तो था ? इब बनवारी ने ताऊ के सफर की चिंता करी।
ताऊ बोल्या-अरे भाई सूबे जाके टिकट ली, घणी लम्बी लाइन थी, फेर मन्ने वो जुग्गे वाला छोरा सुद्धू दिख गया मै बोल्या रे बेटा एक टिकट मेरी भी ले दे .उसने मेरी टिकट ली। रेल में घणी भीड़ थी ,तले-ऊपर आदमी चढ़े पड़े थे। मन्ने तो भाई एक छोरे ने अपनी सीट दे दी।
मेरी सिट के सामने चार-पॉँच लुगाई भी बैठी थी उसमे ते एक लम्बी -तगडी थी ,उसने पहले तो मन्ने देख्या फेर झट घूँघट निकला, तो उसने बराबर आली लुगाई ने पूछ्या " ये बैरण इब क्यूँ घूँघट काढ्या ? वो बोल्ली-" ये भोलू की माँ !!!!! तन्ने दीखता कोणी ! मुच्छा वाला मर्द तो इब्बे चढ्या सै गाड्डी में,पहले तो सारे मेरे जैसे ही बैठे थे।
रमलू बोल्या ताऊ इब भी तेरे मार्केट वेल्यु बनी हुयी सै. जरा संभल के चल्या कर।
ताऊ-अरे इब आगे की सुण- इतने में टी टी आ गया "चलो भाई टिकट दिखाओ"
मेरे सामने सिट पे खरक बोंद वाला गोवर्धन बैठा था,उसके साथ उसके बेटी -जमाई,उसकी लुगाई और दो जवान-जवान छोरे थे। टी टी ने टिकट दिखान की कही तो उसने पञ्च टिकट निकाली.
टी टी ने कह्या "माणस छह और टिकट पांच, तो गोवर्धन बोल्या "साब ये चार टिकट तो हमारे चारो बड़ों के और ये एक टिकट इन दोना टाबरों (बच्चों) की आधी - आधी करके
टी टी बोल्या " तू जिनको बच्चे कह रहा है ये ब्याह लायक हो गये हैं।
मेरी भी पुराणी खुंदक थी गोवर्धन के साथ मैं बोल्या" टी टी साब जब आपको ये छोरे बयाह के लायक दिख रहे हैं तो कर दे इनका टीका।"
टी टी बोला "अभी करता हूँ टीका फौजी आप के सामणे.यो कहके टी टी ने अपनी रसीद निकाली और पांच-पॉँच सौ के दंड की पर्ची फाड़ दी.
मैं बोल्या " रे गोवर्धन तेरे दोनों छोरों का टीका तो करवा दिया बरात के न्युते ने भूल मत जाइये.
चलो रे भाई इब टैम अपने - अपने घर चालो, नहीं तो थारी भी पर्ची कटेगी घर जा के. यो कह के ताऊ हुक्के का दो सुट्टा मार के चाल पड़ा घर नै.

मित्रों आपको कैसी लगी ताऊ की यात्रा,अपनी जीवंत उपस्थिति टिप्पणी के माध्यम से दे .
कल हमारा ताऊ पाकिस्तान की लडाई के पुराणी यादो में ले जाएगा.इंतजार करें................

आपका
रमलू लुहार

(फोटो गूगल से साभार)

रविवार, 13 सितंबर 2009

आज ताऊ की आंट कोण आया देखो?????????

ताऊ आज तावला-तावला बस अड्डे से आण लग रह्या था में भी कुछ पड़चुनी का सामन लें जा रह्या था."ताऊ राम-राम कहाँ भाज्या जा रह्या सै तावला-तावला?"
ताऊ बोल्या "अरे जा नही रहा रह्या हूँ."ससुरा गया था. तेरी ताई नै घी जोड़ राख्या था.उसके भतीजे का ब्याह सै दीवाली पीछे.कई दिन ते कह रही थी ,सोच्या के आज उसकी भी शिकायत दूर कर दयूं
मै बोल्या ताऊ जल्दी जा तेरी मण्डली पोली के आगे तैयार बैठी सै.हुक्का राख्या सै, और रामधन चिलम सिल्गान गया था ,जाते ही गरम -गरम मिलेगीसामान लेके मैं भी पहुँच रह्या सूं।

ताऊ गया अपने ठिकाने पे, मण्डली जमी हुई थीहुक्का तैयार था ,गाम के सारे बिगडे हुए ,घर से काढे हुए बुड्ढे मौजूद थे, ताऊ का ही इंतजार हो रह्या था, ताऊ तो म्हारे गाम की रौनक सै,
ताऊ के पहुचते ही सारे बोले "ताऊ राम-राम.कित हो आया?
ताऊ बोल्या ससुराल गया था ,घी पहुचाने,तम बताओ के चल रहया सै,
बनवारी बोल्या हम तो ताऊ तेरी ही बाट देखे थे ,कल का किस्सा फोज आला आगे भी सुनना सै,
वाह रे भाई !!! आगे की सुण ल्यो,
लडाई का टाइम था म्हारी कानबाई (गाड़ियों का काफिला) जम्मू ते श्रीनगर जावे था ,रस्ते में ब्रेक हुआ हम सब खाना खाने बैठे ,खाना खाने के बाद चलन लगे तो,म्हारी गाडी स्टार्ट ही नहीं हुई,पुराना ज़माना था ,गाडियाँ भी इसी थी के ठण्ड के मारे डीजल भी जम जाया करता.
हमारे सूबेदार साहब बोले "हवलदार मनफूल सिंग ! गाडी स्टार्ट क्यों नहीं हो रही हैं?
पता नहीं साब के बिगड़ गया? जोंगा जीप थी,
चलो बोनट खोलो हम देखते हैं.
मेने बोनट खोल्या ,सूबेदार ने मरमम्त का काम चालू कराया.पंप का आइल काला था वो साब के सारे कपडों में लग गया.खैर गाडी तो चालू होयगी.साब बोले मेरी दूसरी वर्दी लाओ, और इसको साफ़ करवा देना , जी साब .
वो वर्दी मेने डांगरी को दे दी.उसने मेरे ते पूछ्या साब "इसमें तो काला आइल ज्यादा लग साबुन से तो साफ़ होगी नहीं(उस ज़माने में कोण सा सुपररीन ,सर्फ़ एक्सेल मिल्या करता), वो डांगरी भी सुसरा बावली बूच था .सुसरा आधा पागल .
मेने उसते क्या "म्हारे पास पेट्रोल घणा ही तो एक काम कर इसे पेट्रोल से साफ़ कर ले."
वो गया और शेर के बच्चे ने पेट्रोल का जरीकेन निकाल के उसमे सारी वर्दी हैट सब डबो के धो दिए ,
उसमे से बाद में पेट्रोल नहीं निकला तो ,मेरे धोरे आया
और बोल्या साब "वर्दी तो धो दी पण उसका पेट्रोल नहीं निकल रहा हैं.
मन्ने सोच्या मन ही मन के इब साला आंट में आया सै १५ अगस्त आले दिन साले ने मेरी वर्दी ऐसी धोई थी के सी.ओ.साब नै परेड ग्राउंड मै ही सबके सामने मेरी परेड ले ली.आज इसका भी नंबर सै ,
मै बोल्या "अरे छीतरिया तू रह गया न मुर्ख का मुर्ख". एक काम कर,माचिस सै तेरे धोरे?
वो बोल्या -हाँ साब
मै बोल्या -तू नु कर उस पत्थर पे इस वर्दी नै धर के आग लगा दे ,पेट्रोल -पेट्रोल जल जा गा. और वर्दी मेसे पेट्रोल भी निकल जा गा ,सूबेदार साब भी तन्ने शाबासी देगा.
आगे के होया आप खुद समझदार हो,वो भी सुण ल्यो
सूबेदार साब नै उसको साबासी दी और इनाम में एक हफ्ते २ घंटे की पिट्टू परेड कराई ,इसके बाद एक हफ्ते के क्वाटरगार्ड ड्यूटी भी लगाई ,तो भाई फौज के तो ये मजे थे ,पहले के आदमी भोले भी थे.बात मान भी जाया करते.
चालो भाई दिया बत्ती का टाइम हो रह्या सै, थारी ताई भी बाट देखती होगी के मेरे पीहर गया था के सामाचार लाया, बाकी कल देखेंगे, अरे भाई काल तो मन्ने भिवानी जाना सै.सांझ नै मिलेंगे.अरे बनवारी यो हुक्के की के तम्बाखू लाया सै, कल थोडी झटके वाली लाइए ,यो ओडर देके ताऊ हुक्के का एक दम मार के घर नै चाल पड़ा .
भाई आपने यो म्हारा फौजी ताऊ कैसा लाग्या,एक चटका लगा के अपनी उपस्थिति दर्ज कराओ
और भाई एक बात बताऊँ "यो उड़न तस्तरी आराम कब करे सै इसका पता लगे तो मन्ने जरुर बतइयो,मन्ने तो लगे सै इसने कई डरैवर राख रक्खे सै जब ही रात-दिन हांडती फिरे सै,क्यूँ के ताऊ धोरे भी आवेसै रात नै."

आपका
रमलू लुहार


(फोटो गूगल से साभार )

 

फ़ौजी ताऊ की फ़ौज