सोमवार, 28 सितंबर 2009

जो बटन प्रोबलम कर रहया सै उसने डायरेकट कर दो -फौजी ताऊ मनफूल सिंग का कहणा

सुबह-सुबह ताऊ ने पता चल्या के ब्लोग्वानी बंद हो गयी ताऊ नई भी बड़ा अफ़सोस होया,के क्यूँ बंद होयगी? इसा के हो गया मेरी भी समझ में नहीं आया फेर दो चार लोंगो ने कहानी बताई सारी के सिर्फ एक बटन का ही प्रोब्लम सै, तो यारो जो बटन प्रोब्लम कर रह्या सै उसी ने हटा दो सारा रोला ख़तम,यो मान लो के बटन ही ख़राब हो गया था डायरेकट कर दो, हम भी कभी - कभी घर के बिजली के बटन,टयूबवेल के मोटर के बटन को डायरेकट करते है,यो सारा मामला रेंकिंग का सै पसंद -नापसंद का सै, हमने तो भाई इस ते इतना मतबल कोणी, भाई एक म्हारे जैसे गांव के गंवार की भी बाते पाठको तक पहुच रही सै यो ही म्हारे लिए बड़ी बात है, चाहे उसका माध्यम कोई भी हो, जैसे भी अपनी नाराजी दूर करो ब्लोग्वानी फेर से चालू करो,आज सुबह से ही ठीक नहीं लग रह्या सै, जणू अपना कोई ख़ास आज म्हारे ते बिछड़ गया, मन्ने तो यो समाचार भी अविनाश जी की पोस्ट ते मिल्या, तो लोगो एक बार फेर रिटायर फौजी हवलदार ताऊ मनफूल सिंग का कहणा सै के ब्लोगवाणी चालू करनी चाहिए.
रमलू भी यो ही बात कह रहया सै,

आपका 
रमलू लुहार  

रविवार, 27 सितंबर 2009

जब मै पर्चा दाखिल कर रह्या सूं,तो इलेक्शन तो लडूंगा ही-फौजी ताऊ मनफूल सिंग

रमलू लुहार आज सारे काम जल्दी-जल्दी निपटाने लग रहा था,क्योंकि आज ताऊ को पर्चा भरना है,५ दिन से तैयारी चल रही थी,इलेक्शन में खडा होना कोई मामूली बात तो नहीं है, दो दिन तक तो पावला जी का जनम दिन मनाया कैंटीन की असली दारू थी, बूढों को जयादा चढ़ गई, रामेसर और बनवारी तो दो दिन खाट से ही नहीं उठे, बनवारी के दस्त लग गे,उसके दारू गर्मी कर गयी, इब कर गई तो कर गई, सारे के सारे ही बडे से बड़े उत सै,ताऊ तो पहले ही कह रहा था के कम चढाओ पण मान्य ही कोई नहीं, वो कह्या करे ना "चाहे जूते पडो हजार तमाशा घुस के देखेंगे" यो ही हाल इन बूढों का सै,इब इसमें फंस गया रमलू पूरी तैयारी रमलू नै ही करनी पड़ी,हरियाणे का इलेक्शन सै,वो भी गुडगावं विधान सभा सीट का बड़ा मुस्किल काम सै,एक ते एक पैसे वाले लोगो को पार्टियों अपने टिकट दिए हैं,यो अपनी सहारा पार्टी तो गरीबों की पार्टी सै,धन बल का मुकाबला जन बल ते ही हो सके है, तो ताऊ नै अपणे सारे सगे सम्बन्धी-रिश्तेदार-यार-मित्तर नै कह दिया के,कल पर्चा भरण जाणा सै,अपनी अपनी सवारी लेके आ जाईयो, सूबे ते ही सारे आण लग रहे सै, गावं की सीमा में ताऊ नै पूरी छोलों की बेवस्था करवा दी है, गोवर्धन हलवाई नै बैठा दिया,सबको खिलाओ,कोई भूखा नहीं जाणा चाहिए,फालतू कोई खाली पेट चक्कर खा के पडेगा ओर बदनामी ताऊ की होगी, रमलू नै सारा इंतजाम कर लिया पहले ते ही,वो गुरु सुलेमान के अखाडे के ४० पहलवान किराये में कर के आ गया था वो पहुच गए,अखाडे के पहलवानों की सेवा म्हारे यहाँ सारी पार्टियाँ लेती है,कईयों के तो खुद के ही अखाडे है,गाम के छोरे घर ते दूध पी के आ यही जोर लगते है, ३ ट्रेक्टर कर दिए, साउंड सिस्टम लगा दिया, बेनर ओर पोस्टर परमानन्द जी ने भिजवा दिए ओर दारू अपणे कोटे की ताऊ केंटिन ते लेके ही आ गया था, हरियाणे में फोजियों की नफरी ज्यादा है, हर गांव में ५० तो रिटायर फोजी मिल ही जायेंगे,ताऊ नै रिटायर फोजियों की एसोसिअशन से भी कह दिया था पूरी एसोसिएसन ताऊ के समर्थन में है,फोजियों की समस्या है,अगर एक फौजी विधायक बन जायेगा तो चलो अपना फौजी तो सै कुछ तो काम करेगा, यो कह के सारे फौजी भी अपणे साथ सै, ताई नै भी अपनी सारी भायली एकठी कर रखी है,सूबे ते ही घाघरी गोटेदार चमकाए कड़ी है, पूछ रही सै बर-बर में कब चालना सै? ताऊ भी अपनी डरेश लगा के तैयार सै, सर पे पगड़ी फौजी बुसशर्ट और निचे पतलून एक दम नोसे (दूल्हा) सा लग रह्या सै, रमलू नै पर्चा तैयार कर राख्या सै, ताऊ ने यो मिनी सचिवालय में जा के भरना सै, अरे चालो रे !!!!!!!! चालो टैम हो लिया इब चाल भी पडो फेर टैम निकल जायेगा, बनवारी नै जोर लगाया, रामेषर बोल्या - अरे धीरे जोर सुसरे कल तो तेरे दस्त लाग रहे थे, कड़े धोती ही ख़राब करेगा, बनवारी चुप हो गया, रामेषर नै तो साले नै मुफ्त की चौधर चाहिए,खुद तो कुछ करेगा नहीं और दुसरे नै भी नहीं करण देगा,शुम्भु बोल्या, चालो -चालो टैम मत ना लगाओ ताऊ बोल्या,
इब ताऊ का लश्कर निकल पड़या पर्चा दाखिल करण के लिए,भाई रेली की शान देखते ही बणे थी,सबते आगे ताऊ और ताई ट्रेक्टर के अंजन पे बैठे थे नोटों की माला डाल रखी थी, रमलू ट्रेक्टर चलावे था,४० पहलवान ट्रेक्टर के चारों तरफ मोटर सायकिलों पे पीछे ट्रेक्टर,जिप ,ऊंट गाड़ी, जुगाड़ सारी सवारी ही चल रही थी,अपणे ताऊ का टौर ही कुछ ओर सै, ताऊ की रेली में किसान जवान मजदूर रिटायर फौजी सारे ही आ लिए, आगे -आगे "खड़ी चोट बेन्ड पार्टी" का बेन्ड बाजण लगा रह्या है, छोरे भी अपना डी.जे. लेके आ गये,"गाना बजा राख्या है दीवाना राधे का" जोर दार डांस हो रहया है, ताऊ की चारों तरफ रोनक -रोनक, सहर के सरे नागरिकों से ताऊ हाथ जोड़ के राम-राम कर रह्या सै,ताई भी घूँघट में से हाथ निकल के हिला रही सै जणू इब्बे इटली ते ही आई सै, ताऊ का जलुश मिनी सचिवालय पहुँच गया, सिर्फ १० आदमियों ने ही फार्म भरण वाली जगह में जाणे की इजाजत सै,अपणे परधान परमानन्द जी पहले ही पहुच गए थे, ताऊ को फारम भरवाना था, निर्वाचन अधिकारी के सामने ताऊ नै पर्चे पे दस्खत करे, अधिकारी ने पूछ्या-ताऊ इलेक्शन लड़ रहे हो, म्हारे ताऊ का भी दिमाग घूम गया वो बोल्या-"जब मै पर्चा दाखिल कर रह्या सूं,तो इलेक्शन तो लडूंगा ही,नहीं तो या सारी बारात तेरी भुवा नै ब्याहण नै ले के आया सूं," वो बेचारा जवाब सुण के चुप हो गया, ताऊ का पर्चा दाखिल हो गया, बड़ी धूम-धाम सै,सारे पतरकार ताऊ के पीछे कैमरे लेके पड़ गए,बोल्ले ताऊ एकाध बाईट तो दे दे, ताऊ बोल्या " बाईट यूँ सड़क पे नहीं मिल्या करती" कल सारे म्हारे चौपाल पे आओ तो वही पतरकार सम्मलेन होगा खुली चौपाल में," आपको मेरा न्योता है, खाने पीने का पूरा इंतजाम रहेगा,यो कह के ताऊ नै सबसे बिदा ली ओर आगली तैयारी के लिए अपनी मण्डली को लेके गावं नै चल दिए.

मित्रों ताऊ की चौपाल में कल पतरकार वार्ता है, ताऊ रिटायर फौजी हवालदार मनफूल सिंग की आपने भी आना है, सबने ताऊ का निमंत्रण सै,जिसने ताऊ कहनी भूल गए उसने मै कह रह्या सूं,जरुर -जरुर आणा,



आपका 
रमलू लुहार 


(फोटो गूगल से साभार)

सोमवार, 21 सितंबर 2009

पावला जी को पहले जन्मदिन की बधाई,रिटायर फौजी ताऊ मनफूल सिंग की तरफ से


ताऊ बोल्या-अरे सुणियो रे लोगो आज सबके जन्म दिन की की खबर रखने
वाले बी.एस.पावला जी का जनम दिन सै,तमने पता हैं के नहीं
रमलू बोल्या- ताऊ आज तो मन्ने टाइम ही नहीं मिला इन्टरनेट पे जाण का
ताऊ बोल्या-अरे भाई सूबे ते ही पावला जी ने बधाई देने लग रहे हैं लोग चलो हम भी उनको शुभकामनायें दे दे
रमलू बोल्या -ताऊ पावला जी कितने साल के हो गए कुछ पता हैं आपको
ताऊ-बोल्या-जब ते तू किसी को जाणे,उसका जन्म दिन तो तब से समझना चाहिए मेरी तो कल ही बात हुयी थी पावला जी से रात को यो समझ ले कोई १४-१५ घंटे हुए होंगे,इसलिए में समझू सूं के पावला जी कोई आज साँझ तक एक दिन के होही जायेंगे कोई ज्यादा उम्र नही हैं,इब हम तो पके फल हो गए म्हारी भी उम्र लाग जाये पावला जी को,

ताऊ ओर रमलू लुहार ओर पुरे गाम की तरफ से पावला जी को पहले जन्म दिन पे हार्दिक बधाई
रमलू बोल्या-ताऊ फेर आज साँझ नै पार्टी होगी के नहीं,ढाबे वाली?
ताऊ बोल्या-अरे बावला इब पार्टी की बात करे से ,हम हरियाणा में ओर पावला जी भिलाई में
फेर पार्टी किस तरह होगी?
रमलू बोल्या - ताऊ न्यू कर ले पार्टी हम आज मना लेते हैं हरियाणा में ओर जब भिलाई जायेंगे तो पार्टी का बिल पावला जी दे देंगे के भाई तेरे पहले जन्म दिन  की खुसी मनाई थी उसका बिल हैं
ताऊ बोल्या-तू ठीक बोल्या, नु ए कर ले,साँझ ने जब तक बोतल ना खुलेगी तो फेर किसा जन्म दिन,अरे भाई अस्सी ओर तुस्सी नहीं पैग मारे तो मजा किस तरह आवेगा. 
रमलू बोल्या-नहीं ताऊ जन्म दिन जोर शोर से मानेगा तू चिंता मत कर मै इब्बे केंटिन ते बोतल ले के आऊं
ताऊ ओर रमलू लुहार ओर पुरे गाम की तरफ से पावला जी को पहले जन्म दिन पे हार्दिक बधाई वे शतायु हो ताऊ नै भी अपनी उम्र जोड़ दी हैं,मिला के गिन लियो,
खूब जमेगी मिलके, जब बैठेंगे दो दीवाने जमके 

आपका 
रमलू लुहार





रविवार, 20 सितंबर 2009

रिटायर फौजी ताऊ मनफूल सिंग की आप सब को ईद मुबारक

ताऊ नै रमलू ते पूछ्या-रमलू चाँद दिख गया
रमलू बोल्या-ताऊ चाँद तो मै देखता ही रहूँ सूं
ताऊ -अरे बावला आज के चाँद की बात करू सूं
रमलू-आज के चाँद की के बात सै,
ताऊ - अरे तेरे समझ में नहीं आया मै ईद के चाँद की बार करू सूं
रमलू- ओहो ताऊ इब समझ मै आई दिख गया कल ईद सै,कल ईद मनावेंगे जोर दार चलो सबने ईद की बधाई दे दे
आप सबने रमलू ओर  फौजी ताऊ मनफूल सिंग की तरफ से हार्दिक बधाई, हम सब तहे दिल से आपको ईद की मुबारकबाद देते हैं और मासूम अली रज़ा भाई के यंहा ईद की दावत में जायेंगे,
एक बार फिर से सबको ईद मुबारक  

फौजी ताऊ मनफूल सिंग का सिलेक्शन,ताऊ लडेगा इब हरियाणे इलेक्शन


आप सब ने रमलू की राम-राम ,
आज ताऊ की चौपाल साँझ नै फेर जम गयी आज ताऊ तो घर पे ही मोजूद था,दो दिन की गैरहाजिरी ताऊ की हमने लगा रक्खी थी,
शिम्भू नै पूछा-ताऊ आप कहाँ चले गए थे, पुरे दो दिन गायब थे,
ताऊ बोल्या-भाई शिम्भू बात यूँ हैं के वो अपना सै न गुडगांव आला परमानद जांगडा,उसने भाई नई पार्टी बनाई सै,इब इलेक्शन आरे सें न,उसने बुलाया था,पूछे था,के इलेक्शन लड़ना हैं के?
फेर आपने के कह्या? रामेषर बोल्या ,
ताऊ बोल्या-भाई बात यो हैं के पहले तो मेरे मन में इलेक्शन लड़ने की की कोई बात नहीं थी,पण परमानन्द का ब्योहार,काबिलियत पार्टी के उद्देश्य भी मेरे बिचारों से मिलते हैं, और गरीबों की बात भी समझे सै यो समझ के मन्ने इलेक्शन लड़ने का मन बना लिया,
पण ताऊ यो तो बता पार्टी का नाम के सै.-बनवारी बोल्या
ताऊ-भाई पार्टी का नाम से रास्ट्रीय सहारा पार्टी
सुखराम बोल्या-घणा सुथरा नाम सै ताऊ ,गरीबों ,मजदूरों,कामगारों,किसानो नै सहारा तो चाहिए,और या पार्टी एक दिन जरुर सहारा बनेगी,ताऊ यो तू  पहली बर कोई दिमाग आला काम करके आया सै,
ताऊ भोत बढ़िया सोच्या, हमने एक दिन यो भी काम करना था, यो तो आप शास्त्री जी के सपने नै साकार कर रहे सो, आप म्हारे हिंदुस्तान मै पहले आदमी होगे जो एक साथ किसान+जवान+नेता का रोल करोगे, वाह-वाह मौज होयगी,फेर ताऊ हमने के करना पडेगा, रमलू बोल्या
ताऊ बोल्या -रमलू इस इलेक्शन की पूरी जिम्मेदारी लिखा पढ़ी की तन्ने ही संभालनी पड़ेगी ,आज कल चुनाव लड़ना कोई बच्चों का खेल कोणी,कोई पहले की तरह कोणी के फारम भराया ओर खड़े होगे,आज कल तो चुनाव आयोग बहुत कड़े रूल निकल दिए ,मुतन का भी हिसाब देना पडेगा,
बनवारी बोल्या-नु हो गया ताऊ ,हमने तो पता  ही न था,
ताऊ बोल्या -भईयों पार्टी नै मेरी टिकट भी डिक्लेर कर दी सै ,काल के अखबारां में आज्या गा, पण तैयार इब ते ही करनी पड़ेगी,
सारे एक सूर में बोले-हम तैयार हैं ताऊ ,तू जो कहेगा सब हाजिर सै,तू हुकुम कर ,तेरे समर्थम में पूरा गाम खडा सै,हम अपने गम की इज्जत ख़राब थोड़े होने देंगे,जी जान लगा देंगे,यो समझ ले एक कुरुक्षेत्र की लडाई ओर लड़ ली
ताऊ भी राजी हो गया के अपने सारे साथी तैयार सै,
ताऊ बोल्या-तो थम सुन लो,परसुं फारम भरना हैं उसकी तयारी करनी पड़ेगी,
रामेषर बोल्या-ताऊ तन्ने ताई ते पूछ ली इलेक्शन लड़ने की ,मंजूरी ले ली, नहीं तो फेर झाडू ले के मिनी सचिवालय में तेरा जुलुस काढेगी,तेरी तो आरती होगी ओर थोडा भोत प्रसाद हमने भी दिल्वावेगा .
ताऊ बोल्या -रे मन्ने उस ते पूछ लिया से ,उसकी मंजूरी हो गयी सै, जब ही मन्ने थम ते कह्या सै, वो तो अपनी पूरी महिला मण्डली ले के तैयार सै,उसकी राधा स्वामी भजन मण्डली अपने इब कामआवेगी,
शिम्भी बोल्या- तो ताऊ फेर इलेक्शन की तयारी चालू करते हैं, अभी से,
अभी सै ,बावली बूच अभी से किस तरह चालू करेगा ,इसके लिए अपने आदमियों की मीटिंग बुला के पूरी पलानिग करनी पड़ेगी, रमलू नै सलाह दी
शिम्भू बोल्या-अरे रमलू मै नु कहे था के एक-एक- घूंट मार  लेते तो तयारी चालू हो जाती, भाई बिना दवा-
दारु के किसा इलेक्शन,
अरे शर्म कर रे बूढे,गांव बस्या ही नहीं डकैत पहले ही आ गए, रामेषर बोल्या,
ताऊ सबकी बात सुणे था चुपचाप,पुराना फौजी आदमी,नियत डोल ही गयी
ताऊ बोल्या-चालो यार इलेक्शन तो लड़ना ही सै, शिम्भू भी अपना ही आदमी सै, उसका मन मै नहीं मार सकता चालो एक-एक क्यूँ  दो-दो घूंट हो जाये, पर कल सबेरे बैठ के सारा प्रोगराम तय करना सै,ओर शाम नै यहीं पे आके पूरी तयारी का जायजा लेना सै,कड़े कोई कमी रह जाये उसने भी पूरी करनी सै,
चलो रे भाई ठेके पे ,थारी ताई नै बस पता नहीं चलना चाहिए,बाकी सब ठीक सै,
नु कहके सारे इलेक्शन की तयारी करने चल पड़े,

आपका
रमलू लुहार

(फोटो गूगल से साभार)

गुरुवार, 17 सितंबर 2009

फौजी ताऊ की चौपाल में कविताई

शाम नै फेर ताऊ की चौपाल जम गयी पर ताऊ नै आया,सबने चिंता होने लग गयी के ताऊ गया तो गया कहाँ ,
बनवारी बोल्या-रमलू आज ताऊ नहीं आया मन्ने हुक्का भी सिलगा लिया चिलम भी भर लाया,
रमलू बोल्या गया होगा कहीं काम से आ जायेगा, रामेषर बोल्या -रमलू जा पूछ के आ के ताऊ गया कहाँ,
रमलू बोल्या -किस ते पुछू ?
शिम्भू बोल्या -ताई ते पुच्या. मैं कोणी जाता मन्ने ताई ते डर लगे हैं, जाते ही सौ सवाल खडे कर देगी,रमलू बोल्या,
राधे बोल्या - अरे बूढे शिम्बू तेरी अकाल ख़राब हो रही सै, तू बूढी ने ताई बोलता हैं,तेरी तो भाभी लगे सै,
शिम्भू बोल्या-बुढापे में बालक ओर बूढे की एक ही मति हो जाती हैं ओर ताई कह भी दिया तो के फर्क पड़े सै ,म्हारे बच्चों की तो ताई हैं, सोच ले म्हारी भी ताई ही समझ ले ,जा बातों की खराद मत उतर पूछ के आ
रमलू पूछे गया तो ताई नै बताया के सरपंच के साथ जाने वाला था फेर गया के पता नहीं, फेर बोली याद आया वो तो सुखराम के साथ बैल गाड़ी पे बैठ के एक गाम में गया हैं, बतावे था के सुखराम कीछोरी नै उसकी सासू घणी परेशान करे सै,तो गाम मै पंचायत होगी उसमे ही गया सै, रमलू जवाब लेके वापस आया ,ओर सबको ये बात बताई , बनवारी बोल्या- यार आज की साँझ ख़राब हो गयी ताऊ भी ना पाया,
रामेसर बोल्या कैसे ख़राब होय गी, आज मै ताऊ पे एक कविताई बना के लाया हूँ, वो सुनो,
राधे बोल्या -अरे तू कवी कब से हो गया, सुसरे इस्कूल का तो तनने मुह नहीं देख्या,
अरे कविता करने के लिए के इस्कूल जाना जरुरी सै, अपने मन में याद कर ले फेर किसी पढ़े लिखे मास्टर ते डायरी में लिखवा ले, यो बात तो पते की कही,हमारे देश में इतने कवी हुए के उनके पास डिग्री थी ओर बड़े
बड़े ग्रन्थ लिख मारे ,बहोत बढ़िया सुना भाई ,शंभू बोल्या,
रमलू बोल्या - अरे रोला मत मचाओ भाई प्रेम ते कविताई सुनो रामेषर की,
ताऊ मनफूल सिंग का पाया नहीं ठिकाना
इब उस फौजी नै मन्ने ही ढूंढ़ने पडेगा जाना
बहोत बढ़िया वाह -वाह कर दिया कमाल,यो कविता तो इसने म्हारे ताऊ पे बने हैं, चल आगे बोल, रमलू बोल्या
या मिलेगा फेर तन्ने रमलू की गोल मॉल में
या मिलेगा फेर तन्ने गांव के अल्हड चाल में
या मिलेगा फेर तन्ने गुरतुर गोठ की ताल में
या मिलेगा फेर तन्ने एक लोहार की टाल में
या मिलेगा फेर तन्ने ललित डॉट के माल में
या मिलेगा फेर तन्ने ललित वा
बोल्डणी के जाल में
या मिलेगा फेर तन्ने शिल्पकार की पड़ताल में
या मिलेगा फेर तन्ने जंतर-मंतर की हड़ताल में
या मिलेगा फेर तन्ने अपने घर के ही जंजाल में
रोज मिलेगा फेर तन्ने ताऊ साँझ की चोपाल में

वाह भाई वह बड़ी बढ़िया कविता सुनाई, मजा आ गया जी सा आ गया ,बनवारी बोया, चलो भाई आज की सभा ख़त्म करो कल मिलेंगे जब ताऊ आ जायेगा,
सबने राम -राम

बुधवार, 16 सितंबर 2009

मैडल वाला मुक्का जणू इसने ही मारया हैं-ताऊ फौजी मनफूल सिंग की चौपाल

ताऊ के घर के आगे नीम का पेड़ सै,आज साँझ नै अपनी चौपाल फेर जमने लग गई,लगभग सारे लिए पर ताऊ नही आया,सारे ताऊ का इंतजार कर रहे थे ,
रमलू बोल्या -"कल दोपहरे में ताऊ कह गया था के सारे बुड्ढों को बता देना के कल हिन्दी दिवस मान्या गया है सबको अपनी बोली में ही हिन्दी बोलना है,
रामेसर बोल्या-यो ताऊ हिन्दी दिवस कब मना गया हमने तो पता ही नही चाला,
बनवारी बोल्या-अपने हिंदुस्तान हिन्दी दिवस यूँ ही मनाया जाता है, के किसी को पता भी ना चाले और हिन्दी दिवस भी मन जा,
भाई क्यूँ हिन्दी के पीछे पड़ रहे हो, जब दिवस मन गया तो मन गया जब अपने ताऊ नै कै ही दिया सै तो मान भी लो और सारे हिन्दी बोलो,रामधन बोल्या
इतने में ताऊ भी आ गया
शिम्भू बोल्या-ताऊ राम-राम,
ताऊ बोल्या राम-राम,
भाई आज आपने देर हो गयी -रमलू बोल्या
अरे भाई आज म्हारे गाम में गुल्ली डंडा संग के अध्यक्ष का चुनाव था,
बड़ा हंगामा हुआ जैसे लाडू बाँट रहे हों,ताऊ बोल्या
रमलू बोल्या " तो ताऊ आपने भी परधानी का फार्म भरया था के ?
भरया तो था रे भाई, लेकिन हमने तो कुण जितने दे था. वहां तो बड़े बड़े आदमी आये थे लम्बी लम्भी गाड़ियों में बैठ के,
तो ताऊ अपना गुल्ली डंडा के सारे देश में इतन प्रसिद्ध हो गया जो इतने बड़े बड़े आदमी आये थे प्रधानी करने के लिए. रमलू बोल्या,
ताऊ बोल्या-अरे भाई पहले तो हुक्का भरो,अरे बनवारी चिलम सुलगा के नहीं लाया, सुसरे
आज ठाली बैठा हैं,
बनवारी बोल्या-नहीं ताऊ आपका इंतजाम तो मै आपके आने के पहले ही तैयार रखता हूँ, यो ले,
ताऊ नै एक सुट्टा मार के लम्बी सास भरी और बोल्या - अरे भाई यो परधानी इलेक्शन इतना बड़ा हो जायेगा मन्ने पता नहीं था, गाम में जैसे मेला लाग गया हो, सकुल के पास एक ने हलवाई बैठा दिया था,वो पूरी छोले मुफ्त में खिला रहा था,एक कंडीडेट ने जलेबी और दूध की ही दुकान लगा दी थी,अपने मुफ्त में खाए जाओ,
मन्ने हलवाई ते पूछ्या- छोरे तू ये बता तेरे को यहाँ ये मुफ्त की दुकान किसने लगवाई हैं?
हलवाई बोल्या - वो अपना सेठ हैं न बनिया रोडूमल उसने लगवाया हैं, वो भी खडा हैं न परधानी के लिए सबको मुफ्त में देशी घी की जलेभियाँ और इमरती खिला रहा सै,
अरे भाई इसकी बाम्बे में फैक्टरी भी सै ना-ताऊ बोल्या
हलवाई बोल्या - ताऊ इसकी मोबाइल की फेक्ट्री सै, सबने एक -एक मोबाइल भी देगा फ्री में,
तो भाई बता रमलू सारी जिन्दगी बचपने में गुल्ली डंडा हम खेले हमारे बाप दादा खेले और म्हारे बच्चे भी खेल रहे सै,ताऊ बोल्या
ताऊ तो अपने ज़माने में गुल्ली डंडे का एक लम्बर का खिलाडी था तुने तो परधान बनना जरूरी था?तू परधानी करता तो कम ते कम गुल्ली डंडा ओलम्पिक में शामिल तो हो जाता और गोल्ड मैडल अपने देश नै ही मिलता, रामेषर बोल्या,
ताऊ एक लम्बी साँस खीच के बोल्या, अरे भाई देख यो काम तेरे मेरे बस का नहीं हैं, आज जिसके पास पैसे हैं रुतबा हैं दिल्ली की गलियां जिसने जाने सै ये काम उसका हैं, सेन्ट्रल गोरमेंट नै खेल का अलग फंड बना रख्या सै, उसे सै ये खेल संघ नै पैसे देके चलावे सै, जब बिदेशां में कोई बड़ा टूर्नामेंट होसे तो ये हवाई जहाज से जा सै, अपनी लुगाई नै भी साथ ले जा सै चल घूम के आ जाना कहके,
रमलू बोल्या- तो यो बात सै ताऊ, तो अपने बच्चों को भी ले जाते होंगे?
ताऊ बोल्या- तू बच्चों की बात करता हैं ये मालिश करने वाले भी साथ में जाते हैं,नाम खिलाडियों का होता हैं और मालिश अपनी करवाते हैं, जब कोई खिलाडी अपनी मेहनत और काबिलियत ते जीत जाता हैं तो उसके साथ अपनी फोटो ऐसे खिचवाते हैं जैसे यो मैडल इसने ही लड़ के जित्या सै,
बनवारी बोल्या-हाँ मन्ने देख्या था जब अपना बिजेंद्र मैडल जिताया तो सारे फोटू खिचाने ऐसे कूदे के जणू मैडल वाला मुक्का इन्होने ही मारा हैं,
ताऊ बोल्या - के जमाना आ गया, जिसने कभी हाकी देखि नहीं वो हाकी संघ का प्रधान, जिसने कदे तीर धनुष नहीं देखा वो तीरंदाजी का प्रधान जैसे पुरे महाभारत की लडाई में गुरुद्रोन का परथम शिष्य वो ही था,जिसने कदे फुटबाल के एक भी लात नहीं मारी वो फूटबाल संघ का प्रधान,बना फिर रहा हैं,
बनवारी बोल्या- बताओ फेर देश को मैडल किस तरह मिलेगा? बड़े शर्म की बात सै सवा करोड़ की जनता में एक सोने मैडल लिया वो भी अपने दम पे लेके आया तो नाम रह गया नहीं तो नाक कटी की कटी पड़ी थी,
रमलू बोल्या-भाई यो सोचना देश की जनता का काम सै,आगे ऐसे आदमी चुन के भेजो जो जो म्हारे देश के खिलाडीयों के बारे में सोचे और खुद भी इन्टरनेशनल खिलाडी हो, उसका अनुभव ही हमें मैडल दिलाएगा,
ताऊ बोल्या-रमलू तुने सही बात कही ऐसा दिन हमको लाना ही पडेगा।नेताओं के लिए मेरी ये ही सलाह हैं की भाई तुम देश को चलाओ और खिलाडीयों को खेलने दो खेल संघ चलाने दो,चलो रे भाई दिया बत्ती का टैम हो गया सै,
रमलू बोल्या-ताऊ कल की पाकिस्तान की लडाई का किस्सा तो अधुरा ही रह गया,
ताऊ बोल्या-अरे मै अभी जिन्दा हूँ मरया कोणी फेर किसे दिन सुना देंगे,तुमने तो मन्ने इस लफडे में ही उलझा दिया ,चलो रे भाई सबने मेरी राम-राम

आपका

रमलू लुहार

मंगलवार, 15 सितंबर 2009

हिंदी नहीं आती तो भैंस ही चराते :- रिटायर फौजी हवलदार ताऊ मनफूल सिंग कहणा

आज ताऊ दोपहरे में ही आ गया बोल्या रमलू के कर रहया सै ,
मैं बोल्या ताऊ अखबार पढूं सुं,
ताऊ बोल्या के समाचार लिख रखया सै ,
मैं बोल्या ताऊ कल हिन्दी दिवस मनाया गया सै ,उसे का समाचार सै,
ताऊ बोल्या -कोई नई बात?
मैं बोल्या -ताऊ नई बात सै के हिन्दी का परचार और प्रसार होना चाहिए हिन्दी राष्ट्रा भाषा तो बनगी पुरे राष्ट्र की भाषा नहीं बनी से
ताऊ बोल्या -क्यूँ ?
मैं बोल्या - साल में एक बार हल्ला मचावे हैं।हिंदी दिवस मनाया गया अख़बार में आपनी अपनी फोटो छाप ले हैं.हिंदी जिंदाबाद कर ले हैं, हो गया हिंदी दिवस,हिंदी नै सब जगह लागु करने के लिए राजनैतिक इच्छा शक्ति जरुरी हैं.सरकार ने हर जगह बोर्ड लगा रखे हैं, हिंदी लिखो, हिंदी आवेदन करो,हिंदी भाषा का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करो, पण मेरे को कही नहीं लगता के हिंदी सरकारी भाषा भी बनी हैं, सरकार की कथनी करनी में खुद ही फर्क हैं, ये सोच अंग्रेजों ने कम्पूटर भी हिंदी में बना दिया,चलो रे भाई तुम हिंदी वाले भी चलाओ, मेरे को अंग्रेजी बिलकुल ही नहीं आती, फेर भी मैं कम्पूटर चला लेता हूँ.
ताऊ बोल्या-भाई रमलू हिंदी बिना तो काम ही नहीं चलता, अंग्रेजों को भी हिंदुस्तान पे राज करने के लिए हिंदी सीखनी पड़ी थी,नहीं तो के वो राज कर सकते थे, जब उनसे अपना राज वापस लेना था तो हमारे नेताओं को अंग्रेजी सीखनी पड़ी,अंग्रेज तो चले गए राज छोड़ के पण यो अंग्रेजी इनके मत्थे लगा गये, सारे जितने बड़े काम हो सै ना सब अंग्रेज्जी मै हो सै. फेर हिंदी के साथ दोगली निति लगा रखी सै, जिसने अंग्रेजी पढ़ ली वो अफसर ,जिसने हिंदी पढ़ी वो चपरासी, बात ये भी राज की सै ,अगर चपरासी भी अंग्रेजी पढ़ा लिखा लगावेंगे तो साहब अफसरों की काली करतुते पढ़ नहीं लेगा, जाण नहीं जायेगा
मैं बोल्या -ताऊ आपने तो ये बड़े पते की बात कही, चाहे मंत्रालय का काम हो, कोर्ट कचहरी का सारा ही अंग्रेजी में हो से। एक बात और बताऊँ आपने, या लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी जीवन बीमा सरकारी सै ,पर इसके अग्रीमेंट में लिख रखा सै के "विवाद की स्थिति में अंग्रेजी में लिखा हुआ अग्रेमेंट माना जायेगा.
ताऊ बोल्या-ये जीवन बीमा कम्पनी के अंग्रेज फूफे लगा करते थे।'सुसरे पैसे म्हारे और गुण अन्ग्रेज्जो के. के सरकार को नहीं दीखता के यो के करतूत करने लग रहे हैं.
मैं बोल्या-ताऊ आज ते नब्बे साल पहले अंग्रेजी राज में भरतपुर के महाराजा किशन सिंग जी ने अपने स्टेट में हिंदी लागु कर दी थी ,और डुंडी पीटवा दी थी के उनके राज में सरकारी काम सिर्फ हिंदी में ही होगा उसने १९१८ में राज सँभालते ही ये काम किया।राजनैतिक इच्छा शक्ति होना चाहिए बस,
ताऊ बोल्या-म्हारा हरियाणा,राजस्थान,उ।प,बिहार,छात्तिसगड़,हिमाचल,उत्तराखंड,एम्.पी.सारे ही हिंदी भासी परदेश हैं,यहाँ के आदमी को बिना हिंदी के काम ही नहीं चलता,थोडा घणा उच्चारण का ही फर्क हैं, भाई इतने साल हमने फौज नोकरी हिंदी में ही तो करी हैं.नहीं आज भी भैंस ही चराते रहते. भाई हिंदी म्हारी प्राण वायु हैं इसके बिना तो जीने की हम सोच ही नही सकते. आज से अपनी मण्डली वाले सारे बूढों को बोल देना की थोडी बहुत गलती चलेगी फेर हिंदी बोलने की कोशिश पूरी करें.आज म्हारा भी हिंदी दिवस हो गया. बाकी बाद में देखेंगे.

आपका
रमलू लुहार

सोमवार, 14 सितंबर 2009

ताऊ फौजी तन्ने दीखता कोणी ! मुच्छा वाला मर्द

आप सब नै रमलू का राम-राम। भाइयों आज तो मै दूध-धार का काम निपटा चुका। अब टाइम हो रहा है अपनी मण्डली धोरे जाण का.ताऊ आज भिवानी गया था, आ गया होगा,मै पहुँचा अपणे अड्डे ताऊ आली पोली पे , सारे फालतू के लोग वहां काम की बातें करते मिलेंगे, और उनका हेड आपणा ताऊ ,फेर के पूछना सबकीमोज नए टोपिक पे गरमा -गर्म बहस।
इतनी देर में ताऊ भी आ गया ।
ताऊ राम-राम ! बडा तावला आ गया ?
ताऊ बोल्या - अरे इसा कुण सा मै लंका में चला गया था। भिवानी ही तो गया था, कईr काम थे ,पहला तो मुरारी के छोरे ने वा के होया कर कलेक्टर बनाने वाले परीक्षा का फार्म भरना था, और आँख दिखानी थी।गुप्ता हस्पताल में ,
रामेसर बोल्या-फेर दिखा दी आपने ,
ताऊ- हाँ भाई दिखा दी ,डाकदर बोल्या "ताऊ दुवाई लेजा ,इब्बे कुछ नही बिगडा सै.दस-पन्द्र साल और चाल जागी।
बनवारी बोल्या-ताऊ किसा रह्या सफर,ठीक ठाक तो था ? इब बनवारी ने ताऊ के सफर की चिंता करी।
ताऊ बोल्या-अरे भाई सूबे जाके टिकट ली, घणी लम्बी लाइन थी, फेर मन्ने वो जुग्गे वाला छोरा सुद्धू दिख गया मै बोल्या रे बेटा एक टिकट मेरी भी ले दे .उसने मेरी टिकट ली। रेल में घणी भीड़ थी ,तले-ऊपर आदमी चढ़े पड़े थे। मन्ने तो भाई एक छोरे ने अपनी सीट दे दी।
मेरी सिट के सामने चार-पॉँच लुगाई भी बैठी थी उसमे ते एक लम्बी -तगडी थी ,उसने पहले तो मन्ने देख्या फेर झट घूँघट निकला, तो उसने बराबर आली लुगाई ने पूछ्या " ये बैरण इब क्यूँ घूँघट काढ्या ? वो बोल्ली-" ये भोलू की माँ !!!!! तन्ने दीखता कोणी ! मुच्छा वाला मर्द तो इब्बे चढ्या सै गाड्डी में,पहले तो सारे मेरे जैसे ही बैठे थे।
रमलू बोल्या ताऊ इब भी तेरे मार्केट वेल्यु बनी हुयी सै. जरा संभल के चल्या कर।
ताऊ-अरे इब आगे की सुण- इतने में टी टी आ गया "चलो भाई टिकट दिखाओ"
मेरे सामने सिट पे खरक बोंद वाला गोवर्धन बैठा था,उसके साथ उसके बेटी -जमाई,उसकी लुगाई और दो जवान-जवान छोरे थे। टी टी ने टिकट दिखान की कही तो उसने पञ्च टिकट निकाली.
टी टी ने कह्या "माणस छह और टिकट पांच, तो गोवर्धन बोल्या "साब ये चार टिकट तो हमारे चारो बड़ों के और ये एक टिकट इन दोना टाबरों (बच्चों) की आधी - आधी करके
टी टी बोल्या " तू जिनको बच्चे कह रहा है ये ब्याह लायक हो गये हैं।
मेरी भी पुराणी खुंदक थी गोवर्धन के साथ मैं बोल्या" टी टी साब जब आपको ये छोरे बयाह के लायक दिख रहे हैं तो कर दे इनका टीका।"
टी टी बोला "अभी करता हूँ टीका फौजी आप के सामणे.यो कहके टी टी ने अपनी रसीद निकाली और पांच-पॉँच सौ के दंड की पर्ची फाड़ दी.
मैं बोल्या " रे गोवर्धन तेरे दोनों छोरों का टीका तो करवा दिया बरात के न्युते ने भूल मत जाइये.
चलो रे भाई इब टैम अपने - अपने घर चालो, नहीं तो थारी भी पर्ची कटेगी घर जा के. यो कह के ताऊ हुक्के का दो सुट्टा मार के चाल पड़ा घर नै.

मित्रों आपको कैसी लगी ताऊ की यात्रा,अपनी जीवंत उपस्थिति टिप्पणी के माध्यम से दे .
कल हमारा ताऊ पाकिस्तान की लडाई के पुराणी यादो में ले जाएगा.इंतजार करें................

आपका
रमलू लुहार

(फोटो गूगल से साभार)

रविवार, 13 सितंबर 2009

आज ताऊ की आंट कोण आया देखो?????????

ताऊ आज तावला-तावला बस अड्डे से आण लग रह्या था में भी कुछ पड़चुनी का सामन लें जा रह्या था."ताऊ राम-राम कहाँ भाज्या जा रह्या सै तावला-तावला?"
ताऊ बोल्या "अरे जा नही रहा रह्या हूँ."ससुरा गया था. तेरी ताई नै घी जोड़ राख्या था.उसके भतीजे का ब्याह सै दीवाली पीछे.कई दिन ते कह रही थी ,सोच्या के आज उसकी भी शिकायत दूर कर दयूं
मै बोल्या ताऊ जल्दी जा तेरी मण्डली पोली के आगे तैयार बैठी सै.हुक्का राख्या सै, और रामधन चिलम सिल्गान गया था ,जाते ही गरम -गरम मिलेगीसामान लेके मैं भी पहुँच रह्या सूं।

ताऊ गया अपने ठिकाने पे, मण्डली जमी हुई थीहुक्का तैयार था ,गाम के सारे बिगडे हुए ,घर से काढे हुए बुड्ढे मौजूद थे, ताऊ का ही इंतजार हो रह्या था, ताऊ तो म्हारे गाम की रौनक सै,
ताऊ के पहुचते ही सारे बोले "ताऊ राम-राम.कित हो आया?
ताऊ बोल्या ससुराल गया था ,घी पहुचाने,तम बताओ के चल रहया सै,
बनवारी बोल्या हम तो ताऊ तेरी ही बाट देखे थे ,कल का किस्सा फोज आला आगे भी सुनना सै,
वाह रे भाई !!! आगे की सुण ल्यो,
लडाई का टाइम था म्हारी कानबाई (गाड़ियों का काफिला) जम्मू ते श्रीनगर जावे था ,रस्ते में ब्रेक हुआ हम सब खाना खाने बैठे ,खाना खाने के बाद चलन लगे तो,म्हारी गाडी स्टार्ट ही नहीं हुई,पुराना ज़माना था ,गाडियाँ भी इसी थी के ठण्ड के मारे डीजल भी जम जाया करता.
हमारे सूबेदार साहब बोले "हवलदार मनफूल सिंग ! गाडी स्टार्ट क्यों नहीं हो रही हैं?
पता नहीं साब के बिगड़ गया? जोंगा जीप थी,
चलो बोनट खोलो हम देखते हैं.
मेने बोनट खोल्या ,सूबेदार ने मरमम्त का काम चालू कराया.पंप का आइल काला था वो साब के सारे कपडों में लग गया.खैर गाडी तो चालू होयगी.साब बोले मेरी दूसरी वर्दी लाओ, और इसको साफ़ करवा देना , जी साब .
वो वर्दी मेने डांगरी को दे दी.उसने मेरे ते पूछ्या साब "इसमें तो काला आइल ज्यादा लग साबुन से तो साफ़ होगी नहीं(उस ज़माने में कोण सा सुपररीन ,सर्फ़ एक्सेल मिल्या करता), वो डांगरी भी सुसरा बावली बूच था .सुसरा आधा पागल .
मेने उसते क्या "म्हारे पास पेट्रोल घणा ही तो एक काम कर इसे पेट्रोल से साफ़ कर ले."
वो गया और शेर के बच्चे ने पेट्रोल का जरीकेन निकाल के उसमे सारी वर्दी हैट सब डबो के धो दिए ,
उसमे से बाद में पेट्रोल नहीं निकला तो ,मेरे धोरे आया
और बोल्या साब "वर्दी तो धो दी पण उसका पेट्रोल नहीं निकल रहा हैं.
मन्ने सोच्या मन ही मन के इब साला आंट में आया सै १५ अगस्त आले दिन साले ने मेरी वर्दी ऐसी धोई थी के सी.ओ.साब नै परेड ग्राउंड मै ही सबके सामने मेरी परेड ले ली.आज इसका भी नंबर सै ,
मै बोल्या "अरे छीतरिया तू रह गया न मुर्ख का मुर्ख". एक काम कर,माचिस सै तेरे धोरे?
वो बोल्या -हाँ साब
मै बोल्या -तू नु कर उस पत्थर पे इस वर्दी नै धर के आग लगा दे ,पेट्रोल -पेट्रोल जल जा गा. और वर्दी मेसे पेट्रोल भी निकल जा गा ,सूबेदार साब भी तन्ने शाबासी देगा.
आगे के होया आप खुद समझदार हो,वो भी सुण ल्यो
सूबेदार साब नै उसको साबासी दी और इनाम में एक हफ्ते २ घंटे की पिट्टू परेड कराई ,इसके बाद एक हफ्ते के क्वाटरगार्ड ड्यूटी भी लगाई ,तो भाई फौज के तो ये मजे थे ,पहले के आदमी भोले भी थे.बात मान भी जाया करते.
चालो भाई दिया बत्ती का टाइम हो रह्या सै, थारी ताई भी बाट देखती होगी के मेरे पीहर गया था के सामाचार लाया, बाकी कल देखेंगे, अरे भाई काल तो मन्ने भिवानी जाना सै.सांझ नै मिलेंगे.अरे बनवारी यो हुक्के की के तम्बाखू लाया सै, कल थोडी झटके वाली लाइए ,यो ओडर देके ताऊ हुक्के का एक दम मार के घर नै चाल पड़ा .
भाई आपने यो म्हारा फौजी ताऊ कैसा लाग्या,एक चटका लगा के अपनी उपस्थिति दर्ज कराओ
और भाई एक बात बताऊँ "यो उड़न तस्तरी आराम कब करे सै इसका पता लगे तो मन्ने जरुर बतइयो,मन्ने तो लगे सै इसने कई डरैवर राख रक्खे सै जब ही रात-दिन हांडती फिरे सै,क्यूँ के ताऊ धोरे भी आवेसै रात नै."

आपका
रमलू लुहार


(फोटो गूगल से साभार )

शनिवार, 12 सितंबर 2009

फौजी ताऊ की कारस्तानी


चलो भाई सबने मेरी राम-राम आज शाम नै ताऊ की मण्डली फेर बैठ गई,रामधन हुक्के की चिलम भर लाया और काम चालू हो गया,मै भी पहुँच गया ताऊ धोरे ,क्यूँ के रिटाएर फौजी धोरे टाइम पास मजे ते हो जाया करे.रामफल नै हुक्के का एक सुट्टा मारा फेर बोल्या ---

"ताऊ एक बात तो बता तू फोज़ मै कुकर भरती हो गया ? पढ़ा लिखा तू सै कोणी फेर किसने फोज मै भरती कर लिया ? तन्ने यो चमत्कार किस तरियां करया

ताऊ बोल्या- अरे छोरो पहले की तो बात ही अलग सै.पहले फोज मै पढ़ाई लिखाई की जरुरत कोणी थी फोज मै भरती होण ते पहले मै भैंस चराया करताएक दिन मै भैंस चरावे था तो सड़क पे एक जीप आ के रुकी. एक फौजी साहब उतरा ,
पहले तो मै डर गया फेर उसने पुच्चा "क्या तुम फौज में भरती होगे",
में सोच में पड़ गया. फेर बोल्या तुम्हारे घर में कोण-कोण हैं,
मै बोल्या -बापू सै माँ तो कोणी ताई धोरे रहू सूं.
वो बोल्या "कल पानीपत में भरती हैं ,तुम अपने बापू से पूछ के आ जाना मै भरती कर लूँगा "
तो बड़े मुस्किल ते मै ताई और बापू नै मना के पानीपत चला गया फोज में भरती हो गया.
तो वो टाइम लडाई का टाइम था .तगडे ६ फुट साढ़े ६ फुट के जवान तुरते भर्ती कर लेते थे. फिर उनको वहां फौज में भरती करके पढ़ते थे. रोमन अंग्रेजी सिखाते थे. एसा नही हैं की अनपढ़ ही रहते थे .
फौज में अनुशासन जयादा होता हैं. येस मतबल येस ,नो तो हैं नहीं वहां पे.तो ताऊ तेरे ते कभी अनुशासन में गलती हुई हैं.? मणि राम ने पूछा.

एक बार का किस्सा बताऊ -म्हारे हेड क्वाटर मै आग लग गयी और हमारा ऑफिस सातवी मंजिल पे था.आग निचे के मंजिल मै लगी थी
ब्रिगेडियर सब बोले - हवलदार मनफूल सिंग,तुम सबको ऊपर छत पर ले जाओ जावो ,
हमने नीचे जाल पकडा के सिपाही तैनात कर दिए हैं, वे जाल पकडेंगे और तुम सब एक एक करके कूद जाओ .
मै बोला जी साब जी.
फेर बोले सबसे बाद में मै कुदूंगा ध्यान रखना अटेंशन रहना ,
जी साब जी.
हम सारे छत पे गए निचे सिपाही जाल पकड के खड़े थे सारे सिपाही कूद गए .
उसके बाद ब्रिगेडियर साब और मै बच गए थे .साब ने कहा मनफूल सिंग कूदो, ये कहते ही मै कूद गया. अब बारी ब्रिगेडियर साब की थी .वो ऊपर से बोले "तैयार -अटेंशन -और कूद गए. निचे क्या हुआ उसका हॉल सुण ले, ऊपर से ज्यों ही साहब कूदे ,मैंने भी हुँकार भरी "सावधान" सारे सिपाही धरती पे जाल छोड़ "सावधान " हो गये.
भगवान् उनकी आत्मा नै शांति दे. बड़े अच्छे अफसर थे. इसे कड़े अनुशासन में हमने काम करना पड़ा करता. बाकी की काल देखेंगे.

आपको हमारे ताऊ कैसे लगे जिवंत प्रतिक्रिया आमंत्रित है.जिससे हमारा भी उत्साह बना रहे ,
हमारे पुराने जानकार अनील पुसदकर भी २२ साल बाद मिले आज यहाँ ब्लॉग पर मिलकर बड़ा अच्छा लगा.
आपका
रमलू लुहार

(फोटो गूगल से साभार).

 

फ़ौजी ताऊ की फ़ौज